क्या बॉलीवुड का यह खलनायक असल जिंदगी में 'विलेन' नहीं बनना चाहता था?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 3 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आज के समय में किसी भी अभिनेता के लिए नायक और खलनायक की भूमिकाएं निभाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। नायकों को हमेशा नायक की भूमिकाएं ही मिलती थीं, जबकि जिनका इमेज खलनायक का था, उन्हें हर फिल्म में वही रोल मिले। इसी दौर में बॉलीवुड में एक नया खलनायक उभरा, जिनका नाम है मोहन जोशी। यह एक ऐसा कलाकार है, जिनकी जिंदगी आसान नहीं थी, फिर भी उन्होंने अपनी परेशानियों को पार करके एक नई पहचान बनाई। आज उन्हें फिल्म जगत के बड़े सितारों में गिना जाता है।
मोहन जोशी का जन्म 4 सितंबर 1945 को बेंगलुरु के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। रंगमंच और फिल्मी दुनिया में उनका आना एक संयोग था। उनके जीवन में एक घटना ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया और इसके कारण उन्हें अपना करियर बदलना पड़ा, यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया।
फिल्मों में आने से पहले मोहन जोशी ने लगभग 9 साल तक ट्रक ड्राइवर का काम किया। स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने पुणे में किर्लोस्कर ग्रुप में नौकरी की। लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी खुद की ट्रांसपोर्ट कंपनी शुरू की, जहां उन्होंने खुद भी ड्राइविंग की। उनकी कंपनी में तीन गाड़ियां थीं।
हालांकि एक वाहन की दुर्घटना ने उनके जीवन को बदलकर रख दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी को बंद कर दिया और 1987 में मुंबई चले गए। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी जिंदगी की इस घटना को साझा किया।
मोहन जोशी का अभिनय की दुनिया में परिचय एक अलग अंदाज में हुआ, जिससे उन्हें खलनायक के रूप में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार फिल्मों में अभिनय किया। संघर्ष करते हुए उन्होंने रंगमंच पर भी अपनी प्रतिभा दिखाई और फिर बॉलीवुड में खलनायक के रूप में छा गए। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। मोहन जोशी एक ऐसे कलाकार हैं, जो न सिर्फ हिंदी, बल्कि मराठी और भोजपुरी फिल्मों में भी दर्शकों का दिल जीत चुके हैं।