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बंटी यादव हत्याकांड: राजद विधायक भाई वीरेंद्र की माँग — परिजनों को मिले ₹10 करोड़ मुआवजा

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बंटी यादव हत्याकांड: राजद विधायक भाई वीरेंद्र की माँग — परिजनों को मिले ₹10 करोड़ मुआवजा

सारांश

राजद विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने बंटी यादव हत्याकांड में ₹10 करोड़ मुआवजे की माँग करते हुए सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया। उनका कहना है कि देह व्यापार नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कीमत बंटी यादव ने अपनी जान देकर चुकाई, और आरोपी का एनकाउंटर न्याय का विकल्प नहीं हो सकता।

मुख्य बातें

राजद विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने 16 जुलाई को पटना में बंटी यादव के परिजनों के लिए ₹10 करोड़ मुआवजे की माँग की।
कथित तौर पर बंटी यादव ने देह व्यापार नेटवर्क का विरोध किया था, जिसमें राजनेताओं और पुलिसकर्मियों के शामिल होने के आरोप हैं।
विधायक ने हत्याकांड के एक आरोपी के एनकाउंटर को अनुचित बताया और न्यायिक प्रक्रिया से सज़ा दिलाने की माँग की।
बिहार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में कानून-व्यवस्था, महंगाई और विकास परियोजनाओं के अधर में लटकने का मुद्दा उठाने की घोषणा।
विधायक ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से इस संवेदनशील मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने बंटी यादव हत्याकांड में बिहार सरकार और प्रशासन पर उदासीन रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। 16 जुलाई को पटना में बातचीत के दौरान उन्होंने माँग की कि बंटी यादव के परिजनों को ₹10 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। विधायक के अनुसार, यह मामला न केवल एक हत्या का है, बल्कि इसके पीछे देह व्यापार के बड़े नेटवर्क और उससे जुड़े राजनीतिक-पुलिस गठजोड़ का पर्दाफाश करने की कीमत चुकाने की कहानी है।

मामले की पृष्ठभूमि

विधायक भाई वीरेंद्र सिंह के अनुसार, बंटी यादव ने देह व्यापार से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाने का साहस दिखाया था। कथित तौर पर इस देह व्यापार के नेटवर्क में कई राजनेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही थी। इसके अलावा, कुछ पुलिसकर्मी भी इस रैकेट से उगाही करते थे, ऐसा आरोप लगाया गया है। बंटी यादव के इस विरोध से नाराज तत्वों ने कथित तौर पर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

विधायक ने इस बात पर दुख जताया कि बंटी यादव एक गरीब परिवार से थे — उनके पिता का निधन हो चुका है और उनकी माँ विधवा हैं। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार की सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरी ही इस मामले में प्रशासनिक उदासीनता की असली वजह है।

एनकाउंटर पर उठाए सवाल

राजद विधायक ने बंटी यादव हत्याकांड में संलिप्त बताए गए एक आरोपी के एनकाउंटर पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, किसी भी आरोपी का सीधे एनकाउंटर करना उचित और कानूनी प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति आपराधिक कृत्य में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत कठोरतम सज़ा — आजीवन कारावास या मृत्युदंड — दिलाई जानी चाहिए। भाई वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि एनकाउंटर से सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।

मानसून सत्र में उठाएँगे बिहार के मुद्दे

विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने बताया कि वे बिहार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ती महंगाई का मुद्दा ज़ोरदार तरीके से उठाएँगे। उनके अनुसार, राज्य में वित्तीय संकट के कारण विकास परियोजनाएँ अधर में लटकी हुई हैं — सड़क निर्माण रुका है और कई ठेकेदारों का भुगतान बाकी है। उन्होंने केंद्र सरकार से भी बिहार के विकास में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

एक देश एक चुनाव और राजनीतिक व्यवस्था पर तंज

'एक देश एक चुनाव' के प्रस्ताव पर भाई वीरेंद्र सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सरकार के इशारों पर काम करें, तो कुछ भी संभव है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे दल और धर्म से ऊपर उठकर देश के वास्तविक मुद्दों — बेरोज़गारी और महंगाई — पर ध्यान दें। साथ ही उन्होंने कहा कि आज नेताओं से जनता का भरोसा उठ चुका है क्योंकि वे कॉरपोरेट हितों की सेवा में लग गए हैं।

न्याय की माँग और आगे की राह

विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि वह बंटी यादव हत्याकांड का स्वतः संज्ञान ले और बिना किसी दबाव के त्वरित कार्रवाई करे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह अवैध हथियार मामलों में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संज्ञान लेते हैं, उसी तरह इस संवेदनशील प्रकरण में भी न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना चाहिए। इस मामले में न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय होना अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो देह व्यापार नेटवर्क के बड़े सूत्रधार — जिनमें कथित तौर पर राजनेता और पुलिसकर्मी शामिल हैं — कभी बेनकाब नहीं होंगे। बिहार में विपक्ष का यह आक्रामक रुख मानसून सत्र से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी है, लेकिन इससे मूल सवाल कमज़ोर नहीं होता — जवाबदेही किसकी और कब?
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंटी यादव हत्याकांड क्या है?
बंटी यादव की हत्या का यह मामला बिहार में चर्चा में है। कथित तौर पर बंटी यादव ने देह व्यापार नेटवर्क का विरोध किया था, जिसमें राजनेताओं और पुलिसकर्मियों के शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं, और इसी विरोध के चलते उनकी हत्या की गई बताई जाती है।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने ₹10 करोड़ मुआवजे की माँग क्यों की?
विधायक भाई वीरेंद्र सिंह का कहना है कि बंटी यादव एक गरीब परिवार के थे, उनके पिता का निधन हो चुका है और माँ विधवा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित की सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरी के कारण सरकार और प्रशासन इस मामले में उदासीन बने हुए हैं, इसलिए परिजनों को ₹10 करोड़ मुआवजा दिया जाना चाहिए।
बंटी यादव हत्याकांड में आरोपी के एनकाउंटर पर क्या विवाद है?
राजद विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने आरोपी के एनकाउंटर को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कठोरतम सज़ा दिलाई जानी चाहिए थी, क्योंकि एनकाउंटर से नेटवर्क के बड़े सूत्रधार कभी सामने नहीं आएँगे और सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
बिहार मानसून सत्र में भाई वीरेंद्र सिंह कौन-से मुद्दे उठाएँगे?
विधायक भाई वीरेंद्र सिंह ने घोषणा की है कि वे आगामी बिहार विधानसभा मानसून सत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ती महंगाई और विकास परियोजनाओं के अधर में लटकने के मुद्दे उठाएँगे। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण रुका है और कई ठेकेदारों का भुगतान बाकी है।
इस मामले में न्यायपालिका की क्या भूमिका हो सकती है?
राजद विधायक ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका तर्क है कि जिस तरह अवैध हथियार मामलों में अदालतें स्वतः संज्ञान लेती हैं, उसी तरह इस संवेदनशील हत्याकांड में भी न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि बंटी यादव को न्याय मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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