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भोजपुर एनकाउंटर: खेसारी लाल यादव ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की, ₹50,000 सहायता और न्याय का वादा

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भोजपुर एनकाउंटर: खेसारी लाल यादव ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की, ₹50,000 सहायता और न्याय का वादा

सारांश

भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव बिहार के बिलौती गांव पहुंचे, भरत तिवारी के परिवार को ₹50,000 दिए और न्याय का वादा किया। साथ ही पुलिस की आंतरिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए — जबकि बिहार पुलिस ने एसएचओ समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

मुख्य बातें

भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव 22 जून को बिलौती गांव, भोजपुर में भरत तिवारी के परिवार से मिले और ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी।
खेसारी ने न्यायिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाया — कहा कि जांच एजेंसी और आरोपी दोनों एक ही पुलिस व्यवस्था से हैं।
बिहार के एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित की गई है।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर एसएचओ , दो सब-इंस्पेक्टर , एक एएसआई और एक कांस्टेबल निलंबित किए गए।
मुठभेड़ 17 जून को हुई थी; पुलिस और परिवार के बीच घटनाक्रम को लेकर परस्पर विरोधाभासी दावे हैं।

भोजपुरी अभिनेता एवं गायक खेसारी लाल यादव 22 जून को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव पहुंचे और भरत तिवारी के शोकसंतप्त परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की और न्याय की लड़ाई में हर कदम पर साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। यह मुलाकात उस भोजपुर एनकाउंटर के बाद बढ़ते विवाद के बीच हुई, जिसमें 17 जून को पुलिस अभियान के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी।

खेसारी ने परिवार को क्या कहा

परिवार के सदस्यों से बातचीत में खेसारी लाल यादव ने कहा कि न्याय की यह लड़ाई मुख्य रूप से परिवार की अपनी है और उन्हें आंदोलन जारी रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह मुद्दा गांव की सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए — परिवार को अपनी मांगें बड़े सार्वजनिक मंचों और शहरी केंद्रों तक ले जानी चाहिए।

उन्होंने परिवार को आगाह किया कि भरत तिवारी की शहादत को महज प्रचार का मुद्दा न बनने दिया जाए। उनके शब्दों में, जो होना था वह हो चुका है, क्योंकि भरत अब वापस नहीं आएंगे — इसलिए परिवार को अपना संघर्ष अर्थपूर्ण बनाना होगा।

न्यायिक जांच पर सवाल

खेसारी लाल यादव ने बिहार सरकार द्वारा घोषित न्यायिक जांच पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी और आरोपी दोनों एक ही पुलिस व्यवस्था से जुड़े हों, तो जांच की निष्पक्षता पर भरोसा कैसे किया जाए। उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों की स्वतंत्र जांच की मांग के बीच आई है।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

बिहार के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने बताया कि पुलिस मुख्यालय ने शाहबाद रेंज के डीआईजी को मामले की जांच सौंपी है। उनके अनुसार इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और एफएसएल विश्लेषण सहित वैज्ञानिक जांच पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा।

एडीजी ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित की गई है और जांच पूर्ण पारदर्शिता के साथ होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुठभेड़ को किसी भी स्थिति में उपलब्धि नहीं माना जा सकता और पुलिस केवल आत्मरक्षा में ही बल प्रयोग कर सकती है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में घटना के शुरुआती चरण में लापरवाही पाए जाने के बाद कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। निलंबित अधिकारियों में स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ), दो सब-इंस्पेक्टर, एक सहायक सब-इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

15 जून को सोशल मीडिया पर भरत तिवारी के पिस्तौल लिए हुए कथित वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस बिलौती गांव पहुंची थी। 17 जून को गांव में पुलिस अभियान के दौरान यह मुठभेड़ हुई। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने अधिकारियों पर पहले गोली चलाई, जबकि परिवार के सदस्यों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि गोली लगने से पहले उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। यह विरोधाभासी दावा ही इस पूरे विवाद की जड़ है और न्यायिक जांच का केंद्रबिंदु बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खेसारी का यह सवाल — कि जब जांचकर्ता और आरोपी एक ही तंत्र से हों तो निष्पक्षता कहां से आएगी — वास्तविक है। बिहार में एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर यह पहला सवाल नहीं है; असली परीक्षा यह होगी कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होती है या फाइलों में दब जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजपुर एनकाउंटर मामला क्या है?
17 जून को बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में पुलिस अभियान के दौरान भरत तिवारी की मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि भरत ने पहले अधिकारियों पर गोली चलाई, जबकि परिवार और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने गोली लगने से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था।
खेसारी लाल यादव ने परिवार को क्या सहायता दी?
खेसारी लाल यादव ने भरत तिवारी के परिवार को ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी। उन्होंने परिवार को न्याय की लड़ाई जारी रखने का आग्रह किया और आश्वासन दिया कि जहां भी जरूरत होगी, वे साथ खड़े रहेंगे।
बिहार सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित की है। इसके अलावा एसएचओ समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और एफएसएल विश्लेषण सहित वैज्ञानिक जांच के आदेश दिए गए हैं।
खेसारी ने न्यायिक जांच पर सवाल क्यों उठाए?
खेसारी लाल यादव ने कहा कि जांच एजेंसी और आरोपी दोनों एक ही पुलिस व्यवस्था से जुड़े हैं, इसलिए जांच की निष्पक्षता संदिग्ध हो सकती है। यह सवाल राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की स्वतंत्र जांच की मांग के साथ मेल खाता है।
भरत तिवारी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की शुरुआत कैसे हुई?
15 जून को सोशल मीडिया पर भरत तिवारी के पिस्तौल लिए हुए कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस बिलौती गांव पहुंची। 17 जून को इसी अभियान के दौरान मुठभेड़ हुई जिसमें भरत तिवारी की मौत हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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