29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कलकत्ता हाईकोर्ट ने रद्द किया 2024 का मामला, कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के घर पुलिस छापे से था विवाद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रद्द किया 2024 का मामला, कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के घर पुलिस छापे से था विवाद

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को वह मामला रद्द कर दिया जो 2024 चुनावों के दौरान कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के किराए के घर पर पुलिस छापे से उपजा था। पुलिस की अपनी रिपोर्ट में तलाशी में कुछ नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद यह फैसला आया।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को सुवेंदु अधिकारी से जुड़ा पुराना मामला रद्द कर दिया।
विवाद मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्वी मिदनापुर के कोलाघाट में उनके किराए के घर पर पश्चिम बंगाल पुलिस की छापेमारी से उपजा था।
पुलिस ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट में बताया कि तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला और जब्ती सूची खाली रही।
अधिकारी ने आरोप लगाया था कि छापे में लगभग 80 पुलिसकर्मी शामिल थे और I-PAC के कर्मचारी भी मौजूद थे।
उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर इस कार्रवाई का सूत्रधार होने का आरोप लगाया था; BJP नेताओं ने उस समय जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी से जुड़ा एक पुराना कानूनी मामला रद्द कर दिया, जिसकी जड़ें मई 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान पूर्वी मिदनापुर जिले के कोलाघाट में हुई पुलिस छापेमारी में थीं। अदालत के इस फैसले से उस विवादास्पद घटना से उपजी कानूनी कार्यवाही का औपचारिक अंत हो गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के किराए के मकान पर छापा मारा था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि यह कार्रवाई एक वांछित अपराधी की गिरफ्तारी के लिए की गई थी।

घटना के समय सुवेंदु अधिकारी घर पर मौजूद नहीं थे, क्योंकि वे किसी अन्य स्थान पर एक राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल थे। अधिकारी ने आरोप लगाया था कि इस अभियान में लगभग 80 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।

सुवेंदु अधिकारी के आरोप

तत्कालीन नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया था कि यह छापेमारी चुनाव के दौरान उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान करने की साजिश थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने छापे और तलाशी अभियान के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी पर इस पुलिस कार्रवाई के पीछे मुख्य सूत्रधार होने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने दावा किया कि TMC के लिए चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम करने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कर्मचारी भी पुलिसकर्मियों के साथ उस दौरान मौजूद थे।

विरोध प्रदर्शन और स्थानीय तनाव

इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं और समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मौके पर पहुँचकर पुलिसकर्मियों से तीखी बहस की। यह विवाद चुनाव आचार संहिता के बीच राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गया था।

अदालत में पुलिस की रिपोर्ट और फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर अपनी रिपोर्ट में पुलिस ने स्वीकार किया कि कोलाघाट में की गई तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला और जब्ती की सूची खाली रही। जाँच आगे नहीं बढ़ी।

इन्हीं परिस्थितियों की समीक्षा के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को मामले को रद्द कर दिया। यह फैसला राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच लंबे समय से चले आ रहे एक कानूनी विवाद का पटाक्षेप करता है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और BJP के बीच चुनावी तनाव के चरम पर सामने आया था। आलोचकों का कहना है कि राज्य में विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई का यह पैटर्न नया नहीं है। हाईकोर्ट का यह निर्णय भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऐसे मामलों में जवाबदेही का अभाव राज्य की संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप जरूरी था, लेकिन न्यायालय के दरवाज़े तक पहुँचने की ज़रूरत ही यह दर्शाती है कि निगरानी तंत्र कहाँ चूका।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुवेंदु अधिकारी से जुड़ा मामला क्यों रद्द किया?
पुलिस ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में खुद स्वीकार किया कि कोलाघाट में तलाशी के दौरान कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला और जब्ती की सूची खाली रही। इसके बाद जाँच आगे नहीं बढ़ी, जिसे आधार बनाकर अदालत ने 29 सितंबर 2026 को मामला रद्द कर दिया।
2024 में कोलाघाट में क्या हुआ था?
मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने पूर्वी मिदनापुर के कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के किराए के घर पर छापा मारा था। पुलिस ने दावा किया था कि यह एक वांछित अपराधी की तलाश में किया गया था, लेकिन तलाशी में कुछ नहीं मिला।
सुवेंदु अधिकारी ने इस छापे पर क्या आरोप लगाए थे?
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि यह छापा उन्हें चुनाव के दौरान राजनीतिक रूप से परेशान करने के लिए मारा गया। उन्होंने दावा किया कि इसमें लगभग 80 पुलिसकर्मी शामिल थे, प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, और I-PAC के कर्मचारी भी पुलिस के साथ मौजूद थे।
अभिषेक बनर्जी का इस मामले से क्या संबंध बताया गया था?
सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया था कि वे इस पुलिस कार्रवाई के मुख्य सूत्रधार थे। यह आरोप सुवेंदु अधिकारी का था; इसे न्यायालय ने न तो स्वीकार किया और न ही इस पर कोई टिप्पणी की।
इस फैसले का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
हाईकोर्ट का यह निर्णय पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच जारी राजनीतिक तनाव में एक नया मोड़ है। आलोचकों के अनुसार यह फैसला राज्य में विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले