19 सितंबर 2026
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने भगवा रंग विवाद की PIL खारिज की, याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने भगवा रंग विवाद की PIL खारिज की, याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका

सारांश

पश्चिम बंगाल में सरकारी संपत्तियों को भगवा रंगने के खिलाफ दायर PIL कलकत्ता हाई कोर्ट में नहीं टिकी — याचिकाकर्ता ने खंडपीठ की टिप्पणी के बाद खुद याचिका वापस ली। अलग मामले में कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय का बेदखली नोटिस भी रद्द किया।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के खिलाफ दायर PIL याचिकाकर्ता द्वारा वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की।
मुख्य न्यायाधीश आर.वी.
घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने कहा — याचिकाकर्ता अदालती हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं कर सके।
याचिका में एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, कोलकाता की दीवारों और एक मीडिया संस्थान के गेट को भगवा रंगे जाने का उल्लेख था।
दो दिन पूर्व न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय पर अग्निशमन विभाग का बेदखली नोटिस रद्द कर दिया था।
कैमक स्ट्रीट कार्यालय पिछले महीने छत पर कथित अवैध होर्डिंग हटाए जाने के बाद विवादों में आया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने पर सरकारी धन खर्च किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका स्वयं याचिकाकर्ता द्वारा वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की गई।

मामले का पृष्ठभूमि

मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष पेशे से वकील याचिकाकर्ता ने यह जनहित याचिका दाखिल की थी। उनका तर्क था कि पश्चिम बंगाल सरकार बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के जनता के धन का उपयोग सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने में कर रही है।

याचिका में उदाहरण के रूप में कोलकाता के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों का हवाला दिया गया, जिन्हें कथित तौर पर भगवा रंग से रंगा गया बताया गया। इसके अलावा एक मीडिया संस्थान के गेट को भी कथित तौर पर भगवा रंगे जाने का मुद्दा अदालत के सामने रखा गया।

खंडपीठ की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस मामला प्रस्तुत करने में सफल नहीं रहे, जो अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता को न्यायोचित ठहराता हो। इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस लेने का निर्णय लिया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर याचिका को खारिज कर दिया।

अभिषेक बनर्जी कार्यालय विवाद: संबंधित घटनाक्रम

इस फैसले से दो दिन पूर्व, कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के मध्य कोलकाता स्थित कैमक स्ट्रीट कार्यालय को लेकर पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग द्वारा जारी बेदखली नोटिस को रद्द कर दिया था।

न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस को कार्यालय निरीक्षण की तारीख की सूचना देने वाला नोटिस जारी करे और आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी भी पार्टी को उपलब्ध कराए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन फिर भी नहीं होता है, तो अग्निशमन विभाग कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

कैमक स्ट्रीट कार्यालय विवाद की पृष्ठभूमि

अभिषेक बनर्जी का कैमक स्ट्रीट कार्यालय पिछले महीने तब विवाद में आया जब कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिस ने इमारत की छत पर लगे कथित अवैध होर्डिंग को हटा दिया। इस घटना के बाद अग्निशमन विभाग ने बेदखली नोटिस जारी किया था, जिसे हाई कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया।

आगे की स्थिति

भगवा रंग विवाद पर PIL का इस प्रकार समाप्त होना बताता है कि राज्य की संपत्तियों के रंगरोगन जैसे नीतिगत निर्णयों पर न्यायिक हस्तक्षेप तभी संभव है जब याचिकाकर्ता मौलिक अधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन या सार्वजनिक हित को ठोस नुकसान को प्रमाणित कर सके। इस मामले में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बहस अदालती दायरे से बाहर ही रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का ठोस प्रमाण चाहिए। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों ही रंग-राजनीति के आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहे हैं। अदालत का रुख स्पष्ट संकेत देता है कि नीतिगत सौंदर्यशास्त्र के मामले विधायिका और जनता के दायरे में हैं, न कि न्यायपालिका के। असली प्रश्न यह है कि सरकारी धन के व्यय का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा है या नहीं — जो इस PIL में भी नहीं उठाया जा सका।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाई कोर्ट में भगवा रंग विवाद की PIL क्यों खारिज हुई?
याचिकाकर्ता खुद ने याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई आधार प्रस्तुत नहीं कर सके जो अदालती हस्तक्षेप को उचित ठहराता।
यह PIL किसने और किस मुद्दे पर दायर की थी?
पेशे से वकील एक याचिकाकर्ता ने यह PIL दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार कथित तौर पर बिना स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने पर जनता का धन खर्च कर रही है। याचिका में कोलकाता के एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स और एक मीडिया संस्थान के गेट का विशेष उल्लेख था।
अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय का विवाद क्या है?
तृणमूल कांग्रेस नेता और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी का कोलकाता स्थित कैमक स्ट्रीट कार्यालय पिछले महीने उस समय विवाद में आया जब नगर निगम कर्मचारियों और पुलिस ने छत पर लगा कथित अवैध होर्डिंग हटाया। इसके बाद अग्निशमन विभाग ने बेदखली नोटिस जारी किया, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया।
अग्निशमन विभाग के नोटिस पर कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने बेदखली नोटिस रद्द करते हुए अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस को निरीक्षण तिथि की सूचना दे और आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी उपलब्ध कराए। अगर इसके बाद भी दिशानिर्देशों का पालन न हो, तब विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
क्या इस PIL के खारिज होने से भगवा रंग विवाद पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
नहीं, यह PIL वापस लिए जाने के आधार पर खारिज हुई है, इसलिए इसमें गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं आया। सरकारी संपत्तियों के रंगरोगन का मुद्दा राजनीतिक बहस के दायरे में बना रहेगा; कोई न्यायिक निर्देश जारी नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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