कलकत्ता हाई कोर्ट ने भगवा रंग विवाद की PIL खारिज की, याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने पर सरकारी धन खर्च किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका स्वयं याचिकाकर्ता द्वारा वापस लिए जाने के आधार पर खारिज की गई।
मामले का पृष्ठभूमि
मुख्य न्यायाधीश आर.वी. घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष पेशे से वकील याचिकाकर्ता ने यह जनहित याचिका दाखिल की थी। उनका तर्क था कि पश्चिम बंगाल सरकार बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के जनता के धन का उपयोग सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने में कर रही है।
याचिका में उदाहरण के रूप में कोलकाता के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों का हवाला दिया गया, जिन्हें कथित तौर पर भगवा रंग से रंगा गया बताया गया। इसके अलावा एक मीडिया संस्थान के गेट को भी कथित तौर पर भगवा रंगे जाने का मुद्दा अदालत के सामने रखा गया।
खंडपीठ की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस मामला प्रस्तुत करने में सफल नहीं रहे, जो अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता को न्यायोचित ठहराता हो। इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस लेने का निर्णय लिया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर याचिका को खारिज कर दिया।
अभिषेक बनर्जी कार्यालय विवाद: संबंधित घटनाक्रम
इस फैसले से दो दिन पूर्व, कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के मध्य कोलकाता स्थित कैमक स्ट्रीट कार्यालय को लेकर पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग द्वारा जारी बेदखली नोटिस को रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस को कार्यालय निरीक्षण की तारीख की सूचना देने वाला नोटिस जारी करे और आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी भी पार्टी को उपलब्ध कराए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन फिर भी नहीं होता है, तो अग्निशमन विभाग कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
कैमक स्ट्रीट कार्यालय विवाद की पृष्ठभूमि
अभिषेक बनर्जी का कैमक स्ट्रीट कार्यालय पिछले महीने तब विवाद में आया जब कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिस ने इमारत की छत पर लगे कथित अवैध होर्डिंग को हटा दिया। इस घटना के बाद अग्निशमन विभाग ने बेदखली नोटिस जारी किया था, जिसे हाई कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया।
आगे की स्थिति
भगवा रंग विवाद पर PIL का इस प्रकार समाप्त होना बताता है कि राज्य की संपत्तियों के रंगरोगन जैसे नीतिगत निर्णयों पर न्यायिक हस्तक्षेप तभी संभव है जब याचिकाकर्ता मौलिक अधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन या सार्वजनिक हित को ठोस नुकसान को प्रमाणित कर सके। इस मामले में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बहस अदालती दायरे से बाहर ही रहेगी।