16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ बांग्लादेश टिप्पणी वाली PIL खारिज की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ बांग्लादेश टिप्पणी वाली PIL खारिज की

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के बांग्लादेश संबंधी बयान पर दायर PIL खारिज कर दी। राज्य सरकार की रिपोर्ट में उनके 2 जून के एस्प्लेनेड भाषण में कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को ममता बनर्जी के खिलाफ बांग्लादेश टिप्पणी पर दायर PIL खारिज की।
राज्य सरकार की रिपोर्ट में ममता के 2 जून के एस्प्लेनेड भाषण में कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया।
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की खंडपीठ ने अवरतनु सरकार की याचिका खारिज की।
1 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने PIL की स्वीकार्यता पर पहले ही सवाल उठाए थे।
ममता ने कहा था कि बांग्लादेश का एक हत्यारोपी मेघालय के रास्ते आया था और STF ने उसे गिरफ्तार किया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार, 16 सितंबर को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरुद्ध दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। यह याचिका उनके द्वारा 2 जून को कोलकाता के एस्प्लेनेड में एक सार्वजनिक सभा में बांग्लादेश से संबंधित की गई टिप्पणी को लेकर दायर की गई थी। राज्य सरकार की रिपोर्ट में उक्त बयान में किसी संज्ञेय अपराध का तत्व नहीं पाए जाने के बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

विधानसभा चुनाव के बाद 2 जून को आयोजित एस्प्लेनेड जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा था कि बांग्लादेश का एक हत्यारोपी मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल में दाखिल हुआ था और राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे गिरफ्तार किया था। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, किंतु उपस्थित कई लोगों का मानना था कि उनका संकेत युवा बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी की हत्या से जुड़े प्रकरण की ओर था।

ममता बनर्जी ने उस सभा में कहा था, 'उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने खुद मुझे फोन कर इसका श्रेय दिया था। मैंने इतने दिनों तक इस बारे में कुछ नहीं कहा। मैंने चुप्पी साधे रखी। लेकिन अब हमारे खिलाफ अत्याचार की सीमा पार हो गई है। फिर भी शिष्टाचारवश मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहती। इससे बांग्लादेश के लोग नाराज हो सकते हैं। मैं ऐसा नहीं चाहती। मैं उस देश से प्रेम करती हूँ।' सभा में मौजूद लोगों के नाम पूछने पर उन्होंने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था।

PIL दायर और पहली सुनवाई

अवरतनु सरकार नामक व्यक्ति ने इस बयान पर कार्रवाई की माँग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। 1 सितंबर को हुई पहली सुनवाई में तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती ने याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या अदालत किसी भी व्यक्ति द्वारा कही गई हर बात पर सुनवाई कर सकती है। उसी सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विवादित बयान पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।

सरकारी रिपोर्ट और अदालत का फैसला

बुधवार को अदालत में पेश की गई राज्य सरकार की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ममता बनर्जी के बयान में किसी संज्ञेय अपराध का कोई तत्व नहीं पाया गया। इसके आधार पर नए मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अवरतनु सरकार की जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

व्यापक संदर्भ और महत्त्व

यह मामला ऐसे समय में सामने आया जब भारत-बांग्लादेश संबंध और पश्चिम बंगाल की सीमावर्ती राजनीति दोनों ही संवेदनशील दौर से गुज़र रहे हैं। गौरतलब है कि सार्वजनिक भाषणों में राजनेताओं के बयानों को लेकर PIL दायर करने की प्रवृत्ति हाल के वर्षों में बढ़ी है, और अदालतें ऐसे मामलों में स्वीकार्यता की सीमा को लेकर सतर्क रही हैं।

इस फैसले से स्पष्ट होता है कि अदालत ने राजनीतिक भाषण को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर माना — जब तक कि उसमें कोई ठोस संज्ञेय तत्व न हो। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।

आगे की स्थिति

PIL खारिज होने के बाद फिलहाल इस मामले में कोई और कानूनी कार्यवाही लंबित नहीं है। यह देखना होगा कि याचिकाकर्ता उच्चतर न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें राजनीतिक भाषणों को आपराधिक शिकायतों का आधार बनाया जाता है। राज्य सरकार की रिपोर्ट और अदालत की टिप्पणी दोनों यह संकेत देती हैं कि बिना ठोस संज्ञेय तत्व के PIL को हथियार की तरह इस्तेमाल करना न्यायिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। हालाँकि ममता बनर्जी के बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक विवाद बना रहेगा — खासकर तब, जब उन्होंने स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री का संदर्भ दिया और नाम बताने से इनकार किया। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे अस्पष्ट बयान, जो जानबूझकर नाम छोड़ते हैं, लोकतांत्रिक जवाबदेही के मानकों पर खरे उतरते हैं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ PIL क्यों खारिज की?
राज्य सरकार की रिपोर्ट में ममता बनर्जी के 2 जून के एस्प्लेनेड भाषण में कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया, जिसके आधार पर मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे की खंडपीठ ने 16 सितंबर को PIL खारिज कर दी। इससे पहले भी 1 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए थे।
ममता बनर्जी ने बांग्लादेश के बारे में क्या कहा था?
2 जून को कोलकाता के एस्प्लेनेड में एक जनसभा में ममता बनर्जी ने कहा था कि बांग्लादेश का एक हत्यारोपी मेघालय के रास्ते पश्चिम बंगाल आया था और STF ने उसे गिरफ्तार किया था। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने खुद उन्हें फोन कर इसका श्रेय दिया था।
यह PIL किसने दायर की थी और किस आधार पर?
अवरतनु सरकार नामक व्यक्ति ने ममता बनर्जी के बांग्लादेश संबंधी बयान पर कार्रवाई की माँग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस बयान पर कानूनी संज्ञान लिया जाना चाहिए।
1 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने क्या कहा था?
1 सितंबर को तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती ने PIL की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या अदालत किसी भी व्यक्ति द्वारा कही गई हर बात पर सुनवाई कर सकती है। उसी सुनवाई में राज्य सरकार से विवादित बयान पर रिपोर्ट माँगी गई थी।
इस फैसले का आगे क्या असर हो सकता है?
PIL खारिज होने के बाद इस मामले में फिलहाल कोई कानूनी कार्यवाही लंबित नहीं है। यह फैसला भविष्य में राजनीतिक भाषणों पर दायर PIL की स्वीकार्यता के लिए एक न्यायिक संदर्भ बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले