पुडुचेरी नकली नोट मामला: सीबीआई ने 14 साल से फरार मोहम्मद इस्माइल शेख को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 9 अक्टूबर 2026 को पुडुचेरी के नकली भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) मामले में वांछित भगोड़े मोहम्मद इस्माइल शेख को गिरफ्तार किया। शेख लगभग 14 साल से कानून की पकड़ से बाहर था — 2 जुलाई 2012 को जमानत पर रिहा होने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया था।
मामले का पृष्ठभूमि
सीबीआई के अनुसार, मोहम्मद इस्माइल शेख पुडुचेरी में ₹1,000 के नकली नोट चलाने और उनके लेन-देन में शामिल था। उसे पुडुचेरी की एक फलों की दुकान पर ₹19,000 मूल्य के नकली नोटों के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया था।
इसके बाद जाँच एजेंसी ने उस गेस्ट हाउस की तलाशी ली जहाँ शेख ठहरा हुआ था, और वहाँ से ₹1,71,500 मूल्य के अतिरिक्त नकली नोट बरामद किए गए। इस मामले में उसे पहली बार 18 जनवरी 2012 को गिरफ्तार किया गया था।
14 साल बाद गिरफ्तारी कैसे हुई
2 जुलाई 2012 को जमानत मिलने के बाद शेख ने जान-बूझकर अदालत की कार्यवाही से खुद को दूर रखा और लंबे समय तक छिपा रहा। सीबीआई की एक विशेष टीम ने तकनीकी सुरागों और निरंतर प्रयासों के बल पर उसका ठिकाना पता लगाया और अंततः 9 अक्टूबर 2026 को उसे हिरासत में लिया।
गौरतलब है कि नकली करेंसी से जुड़े मामलों में इतने लंबे समय तक फरार रहना एजेंसी के लिए एक बड़ी चुनौती थी। सीबीआई ने कहा कि आरोपी को सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीबीआई की प्रतिबद्धता
सीबीआई ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि एजेंसी नकली नोट चलाने वाले प्रत्येक अपराधी को पकड़ने, उन्हें सज़ा दिलाने और देश की आर्थिक अखंडता की रक्षा करने के अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अलग मामले में आईबीपीएस परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़
इसी दौरान, एक अलग कार्रवाई में सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी कर बैंकिंग परीक्षा में धोखाधड़ी और परीक्षार्थी की जगह परीक्षा देने वाले एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक सीजीएसटी इंस्पेक्टर भी शामिल है।
यह मामला इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था। सीबीआई की मुंबई स्थित स्पेशल टास्क ब्रांच के अनुसार, इन आरोपियों ने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार — दोनों चरणों में असली उम्मीदवारों की जगह खुद शामिल होकर चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को भंग किया।
सीबीआई ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी से न केवल सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, बल्कि मेहनती और योग्य उम्मीदवारों को उनके हक के अवसरों से भी वंचित होना पड़ता है। दोनों मामलों में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।