10 अक्टूबर 2026
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पुडुचेरी नकली नोट मामला: सीबीआई ने 14 साल बाद फरार भगोड़े मोहम्मद इस्माइल शेख को दबोचा

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पुडुचेरी नकली नोट मामला: सीबीआई ने 14 साल बाद फरार भगोड़े मोहम्मद इस्माइल शेख को दबोचा

सारांश

14 साल से कानून की नज़रों से छिपा भगोड़ा आखिरकार पकड़ा गया। सीबीआई ने तकनीकी सुरागों के दम पर मोहम्मद इस्माइल शेख को दबोचा, जो पुडुचेरी में ₹1,71,500 के नकली नोट बरामद होने के बावजूद जमानत के बाद फरार हो गया था।

मुख्य बातें

सीबीआई ने मोहम्मद इस्माइल शेख को नकली भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) मामले में 14 साल से अधिक समय बाद गिरफ्तार किया।
शेख को पहले 18 जनवरी 2012 को गिरफ्तार कर 2 जुलाई 2012 को जमानत पर रिहा किया गया था, जिसके बाद वह फरार हो गया।
पुडुचेरी के एक गेस्ट हाउस से ₹1,71,500 मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए थे।
एक अलग मामले में सीबीआई ने दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर आईबीपीएस परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क के 4 लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में एक सीजीएसटी इंस्पेक्टर भी शामिल है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 10 अक्टूबर 2026 को नकली भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) मामले में एक भगोड़े आरोपी को गिरफ्तार किया, जो 14 साल से अधिक समय से कानून की पकड़ से बाहर था। आरोपी की पहचान मोहम्मद इस्माइल शेख के रूप में हुई है, जो पुडुचेरी में नकली नोटों के लेन-देन में शामिल था और जमानत मिलने के बाद अदालत में पेश न होकर फरार हो गया था।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई के अनुसार, मोहम्मद इस्माइल शेख को पुडुचेरी में एक फलों की दुकान पर ₹19,000 मूल्य के नकली ₹1,000 के नोटों के साथ पकड़ा गया था। इसके बाद जाँच एजेंसी ने उस गेस्ट हाउस की तलाशी ली जहाँ वह ठहरा हुआ था, और वहाँ से ₹1,71,500 मूल्य के अतिरिक्त नकली नोट बरामद किए गए।

शेख को पहली बार 18 जनवरी 2012 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 2 जुलाई 2012 को उसे जमानत पर रिहा किया गया, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ और जान-बूझकर कानूनी प्रक्रिया से बचता रहा।

कैसे हुई गिरफ्तारी

सीबीआई की एक विशेष टीम ने तकनीकी सुरागों और लगातार निगरानी के ज़रिये शेख का पता लगाया। 14 से अधिक वर्षों की इस खोज के बाद एजेंसी को सफलता मिली। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने बताया कि आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।

एजेंसी ने अपने बयान में कहा कि वह नकली नोटों का चलन करने वाले हर अपराधी को पकड़ने और देश की आर्थिक अखंडता की रक्षा करने के प्रति प्रतिबद्ध है।

एक अलग मामले में सीबीआई की कार्रवाई

इसी बीच, एक अलग मामले में सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी कर बैंकिंग परीक्षाओं में धोखाधड़ी और परीक्षा में दूसरों की जगह बैठने वाले एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक सीजीएसटी इंस्पेक्टर भी शामिल है।

यह मामला इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आईबीपीएस) की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर सामने आया। आरोप है कि इन लोगों ने लिखित परीक्षा और इंटरव्यू जैसे कई चरणों में असली उम्मीदवारों की जगह बैठकर चयन प्रक्रिया को बाधित किया।

आम जनता और न्याय व्यवस्था पर असर

नकली नोटों का प्रचलन देश की मौद्रिक व्यवस्था को सीधे नुकसान पहुँचाता है और आम नागरिकों, विशेषकर छोटे व्यापारियों को प्रभावित करता है। गौरतलब है कि ₹1,000 के नोट 2016 की नोटबंदी में बंद कर दिए गए थे, लेकिन उससे पहले के मामलों में यह मुद्रा बड़े पैमाने पर जाली नोटों की श्रेणी में पाई गई थी। बैंकिंग परीक्षा धोखाधड़ी के मामले में योग्य और मेहनती उम्मीदवारों के अवसर छिने जाने की चिंता लंबे समय से उठाई जाती रही है।

क्या होगा आगे

सीबीआई के अनुसार, मोहम्मद इस्माइल शेख को शीघ्र ही संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उसकी जमानत रद्द होने और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है। बैंकिंग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों से भी पूछताछ जारी है और नेटवर्क के और सदस्यों की तलाश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस खामी की याद दिलाती है जो जमानत प्रणाली और फरार आरोपियों की निगरानी में दशकों से बनी हुई है। यह सवाल उठता है कि तकनीकी सुरागों पर निर्भर जाँच एजेंसी को इतना लंबा समय क्यों लगा, और ऐसे मामलों में नियमित निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है। एफआईसीएन मामले अक्सर सीमा-पार नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिनकी गहरी जाँच ज़रूरी है — केवल वाहक को पकड़ना पर्याप्त नहीं। आईबीपीएस धोखाधड़ी मामला भी यह दर्शाता है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं की अखंडता पर बहु-राज्यीय नेटवर्क का बढ़ता खतरा एक गंभीर संरचनात्मक चुनौती बन चुका है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद इस्माइल शेख कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
मोहम्मद इस्माइल शेख पुडुचेरी में नकली ₹1,000 के नोटों के लेन-देन में शामिल एक आरोपी है। उसे 2012 में गिरफ्तार कर जमानत दी गई थी, लेकिन वह अदालत में पेश न होकर फरार हो गया और 14 साल बाद सीबीआई ने उसे दोबारा गिरफ्तार किया।
पुडुचेरी नकली नोट मामले में कितने जाली नोट बरामद हुए थे?
सीबीआई के अनुसार, शेख को फलों की दुकान पर ₹19,000 मूल्य के नकली नोटों के साथ पकड़ा गया था। इसके बाद उसके गेस्ट हाउस से ₹1,71,500 मूल्य के अतिरिक्त जाली नोट बरामद किए गए।
सीबीआई ने 14 साल बाद आरोपी को कैसे पकड़ा?
सीबीआई की एक विशेष टीम ने तकनीकी सुरागों और लगातार प्रयासों के ज़रिये शेख का पता लगाया। एजेंसी ने बताया कि आरोपी जान-बूझकर छिपता रहा और कानूनी प्रक्रिया से बचता रहा।
आईबीपीएस परीक्षा धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने क्या कार्रवाई की?
सीबीआई की मुंबई स्थित स्पेशल टास्क ब्रांच ने दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक सीजीएसटी इंस्पेक्टर भी है। इन पर बैंकिंग परीक्षाओं में असली उम्मीदवारों की जगह बैठने का आरोप है।
नकली नोट मामले में आगे क्या होगा?
सीबीआई ने कहा है कि मोहम्मद इस्माइल शेख को कानूनी प्रावधानों के अनुसार सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा। एजेंसी ने देश की आर्थिक अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
राष्ट्र प्रेस
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