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केंद्र सरकार ने निर्यातित कार्गो को वापस लाने की प्रक्रिया को सरल बनाया

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केंद्र सरकार ने निर्यातित कार्गो को वापस लाने की प्रक्रिया को सरल बनाया

सारांश

केंद्र सरकार ने निर्यात किए गए कार्गो को भारत वापस लाने के लिए नियमों को सरल बनाया है। यह निर्णय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के चलते लिया गया है। जानिए इस नए नियम के तहत क्या बदलाव आए हैं।

मुख्य बातें

सरलीकरण से निर्यातकों को मिलेगी राहत।
नई प्रक्रिया 15 दिनों तक प्रभावी रहेगी।
शिपिंग दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है।
सील में छेड़छाड़ पर पूर्ण निरीक्षण होगा।
शिपिंग बिल रद्द करने की नई सुविधा जल्द शुरू होगी।

नई दिल्ली, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने निर्यातित कार्गो को भारत में वापस लाने के लिए नियमों को अधिक सहज बना दिया है। यह निर्णय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण जहाजों की आवाजाही में आई रुकावट के चलते लिया गया है।

यह कदम तब उठाया गया है जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कई भारतीय जहाज अपने गंतव्य पर नहीं पहुँच सके और उन्हें वापस भारतीय बंदरगाहों पर लौटना पड़ा है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी परिपत्र में, सरकार ने उन सामानों के निपटान के लिए एक सरलीकृत प्रक्रिया का ऐलान किया है जो भारतीय बंदरगाहों पर वापस आ रहे हैं।

यह अस्थायी राहत निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए दी गई है।

इससे उन निर्यातकों के "वापस लाने" के अनुरोधों को संसाधित करने में भी मदद मिलेगी जिनका सामान विदेशों में नहीं पहुँच सका।

यह छूट परिपत्र की तारीख से 15 दिनों तक प्रभावी रहेगी।

नई व्यवस्था के तहत, भारत लौट रहे कंटेनरों को बंदरगाह टर्मिनलों पर सामान्य आयात दस्तावेज, जैसे कि बिल ऑफ एंट्री, जमा किए बिना उतारा जा सकेगा।

हालांकि, सीमा शुल्क अधिकारी कंटेनरों को जहाजों से उतारने की अनुमति देने से पहले शिपिंग दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे।

अधिकारी कंटेनर के विवरण का मिलान संबंधित शिपिंग बिलों से करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कंटेनर की सील सही सलामत है।

यदि किसी सील के साथ छेड़छाड़ की गई हो या वह टूटी हुई पाई जाती है, तो कंटेनर का पूर्ण निरीक्षण किया जाएगा।

सीबीआईसी ने निर्यातकों को ऐसे शिपमेंट के शिपिंग बिल रद्द करने की अनुमति भी दी है, भले ही निर्यात सामान्य घोषणापत्र (ईजीएम) पहले ही दाखिल किया गया हो।

ईजीएम दाखिल करने के बाद शिपिंग बिल रद्द करने की सुविधा के लिए जल्द ही भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (आईसीईएस) प्लेटफॉर्म पर एक नया विकल्प शुरू किया जाएगा।

यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि निर्यात प्रोत्साहन उन कार्गो के लिए गलती से जारी न किए जाएं जो कभी विदेशी गंतव्यों तक पहुंचे ही नहीं।

शिपिंग बिल रद्द होने के बाद, इसकी जानकारी आईसीईजीएटीई के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक और विदेश व्यापार महानिदेशालय जैसी एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी।

हालांकि, यदि निर्यातकों को पहले से ही कोई कर लाभ या निर्यात प्रोत्साहन प्राप्त हो चुका है, जिसमें आईजीएसटी रिफंड या ड्यूटी ड्रॉबैक शामिल है, तो उन्हें यह राशि सरकार को वापस करनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ऐसे समय में सरकार का सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक होता है। यह उपाय निर्यातकों की चिंताओं का समाधान करने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी सुगम बनाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्यात किए गए कार्गो को वापस लाने की प्रक्रिया में क्या बदलाव आया है?
सरकार ने निर्यातित कार्गो को वापस लाने के लिए नियमों को सरल बनाया है, जिससे बिना सामान्य आयात दस्तावेज जमा किए कंटेनरों को उतारा जा सकेगा।
क्या निर्यातकों को शिपिंग बिल रद्द करने की अनुमति है?
हाँ, निर्यातकों को ऐसे शिपमेंट के शिपिंग बिल रद्द करने की अनुमति है, भले ही ईजीएम पहले से दाखिल किया गया हो।
राष्ट्र प्रेस
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