13 अक्टूबर 2026
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गन्ना किसानों के लिए संयुक्त समिति बनाएगी केंद्र सरकार: प्रह्लाद जोशी

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गन्ना किसानों के लिए संयुक्त समिति बनाएगी केंद्र सरकार: प्रह्लाद जोशी

सारांश

केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की शिकायतों के दीर्घकालिक समाधान के लिए संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया है। मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक से 'राज्य सलाहकार मूल्य' लागू करने का आग्रह किया और किसान नेता राजू शेट्टी की सहमति का हवाला देते हुए विरोध-प्रदर्शन न करने की अपील की।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 13 अक्टूबर 2026 को गन्ना किसानों के लिए संयुक्त समिति गठन की घोषणा की।
समिति में गन्ना किसान, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र-राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और जोशी ने कर्नाटक व महाराष्ट्र के किसान नेताओं के साथ 3 से 4 घंटे विचार-विमर्श किया।
किसान नेता राजू शेट्टी ने संयुक्त समिति के गठन पर सहमति जताई।
कर्नाटक से 'राज्य सलाहकार मूल्य' (SAP) लागू करने का आग्रह; तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश में यह पहले से लागू।
चीनी मिलों द्वारा नौ प्रतिशत बर्बादी की कटौती और तौल में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई का आग्रह।

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि केंद्र सरकार शीघ्र ही गन्ना किसानों की समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान के लिए एक संयुक्त समिति का गठन करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसान नेताओं के साथ हाल ही में हुई बैठक रचनात्मक और सफल रही और किसानों को सड़क जाम जैसे कदम उठाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

बैठक का विवरण और चर्चा के मुद्दे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद जोशी ने वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों तथा किसान नेताओं के साथ मिलकर तीन से चार घंटे तक विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए तीन से चार किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव रखे।

बैठक में कथित तौर पर 'उचित और लाभकारी मूल्य', 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' की माँग, गन्ना तौलने में गड़बड़ी, कटाई के बाद चीनी मिलों द्वारा नौ प्रतिशत बर्बादी की कटौती और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग मूल्य निर्धारण जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

संयुक्त समिति का स्वरूप और उद्देश्य

जोशी ने बताया कि प्रस्तावित संयुक्त समिति में गन्ना किसान, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति किसानों की समस्याओं का गहन अध्ययन करेगी और स्थायी समाधान के उपाय सुझाएगी। जोशी ने जोर देकर कहा, 'गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान एक-दो दिन में या केवल एक-दो मंत्रालयों द्वारा नहीं किया जा सकता। इसके लिए कई मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों और राज्य सरकारों की भागीदारी की आवश्यकता है।'

उन्होंने यह भी कहा कि किसान नेता राजू शेट्टी भी संयुक्त समिति गठित करने के केंद्र के निर्णय से सहमत हैं और समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में काम करने को तैयार हैं।

कर्नाटक से 'राज्य सलाहकार मूल्य' लागू करने का आग्रह

जोशी ने बताया कि केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार से गन्ने के लिए 'राज्य सलाहकार मूल्य' (SAP) लागू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश पहले ही यह व्यवस्था लागू कर चुके हैं, और कर्नाटक को भी किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने के लिए इस दिशा में विचार करना चाहिए।

इसके साथ ही, केंद्र ने राज्य सरकार से चीनी रिकवरी दरों, नौ प्रतिशत बर्बादी की कटौती और गन्ना तौलने में गड़बड़ी के मुद्दों पर चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।

सरकार की प्रतिबद्धता और किसानों से अपील

जोशी ने यह भी कहा कि यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों को उनकी शिकायतें सुनने के लिए नई दिल्ली बुलाया और उनके साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राजनीतिक संबद्धता से ऊपर उठकर राज्य सरकारों के साथ मिलकर किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान संगठनों ने सड़क जाम जैसे विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। संयुक्त समिति के गठन की घोषणा और बैठक की सफलता के दावों के बाद अब यह देखना होगा कि समिति कितनी जल्दी अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती है और उन्हें ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गन्ना किसानों की समस्याएँ दशकों पुरानी हैं और पहले भी कई समितियाँ और बैठकें बे-नतीजा रही हैं। असली कसौटी यह होगी कि समिति अपनी सिफारिशें कब तक प्रस्तुत करती है और क्या उन्हें कर्नाटक व महाराष्ट्र की राज्य सरकारें — जिनके पास चीनी मिलों पर सीधा नियंत्रण है — ज़मीन पर उतारती हैं। 'राज्य सलाहकार मूल्य' का मुद्दा केंद्र और राज्य के बीच की उस पुरानी खींचतान को उजागर करता है जिसमें किसान अक्सर बीच में पिसते रहे हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार द्वारा गठित की जाने वाली गन्ना किसान संयुक्त समिति में कौन होगा?
इस समिति में गन्ना किसान, कृषि वैज्ञानिक और केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति किसानों की समस्याओं का अध्ययन कर दीर्घकालिक समाधान सुझाएगी।
दिल्ली में हुई गन्ना किसान बैठक में कौन से मुद्दे उठाए गए?
बैठक में 'उचित और लाभकारी मूल्य', 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' की माँग, गन्ना तौलने में गड़बड़ी, चीनी मिलों द्वारा नौ प्रतिशत बर्बादी की कटौती और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग मूल्य निर्धारण जैसे मुद्दे उठाए गए। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद जोशी ने तीन से चार घंटे तक किसान नेताओं के साथ चर्चा की।
कर्नाटक में 'राज्य सलाहकार मूल्य' क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
'राज्य सलाहकार मूल्य' (SAP) वह न्यूनतम मूल्य है जो राज्य सरकार किसानों को गन्ने के बदले दिलाती है, जो केंद्र द्वारा तय 'उचित और लाभकारी मूल्य' से अधिक हो सकता है। तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश इसे लागू कर चुके हैं, जबकि कर्नाटक अभी तक इसे लागू नहीं कर पाया है।
किसान नेता राजू शेट्टी का संयुक्त समिति पर क्या रुख है?
मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, किसान नेता राजू शेट्टी गन्ना किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संयुक्त समिति बनाने के केंद्र के निर्णय से सहमत हैं। जोशी ने इसे बैठक की सफलता का प्रमाण बताया।
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों के संदर्भ में क्या निर्देश दिए हैं?
केंद्र ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि चीनी रिकवरी दरों, नौ प्रतिशत बर्बादी की कटौती और गन्ना तौलने में गड़बड़ी के मुद्दों पर चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह किसानों की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख शिकायतों में से एक है।
राष्ट्र प्रेस
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