गन्ना एफआरपी पर प्रल्हाद जोशी का कर्नाटक किसानों को न्योता — दिल्ली आओ, बात करते हैं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 29 सितंबर 2026 को कर्नाटक के गन्ना किसानों को नई दिल्ली आने का खुला निमंत्रण दिया, ताकि फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) में बढ़ोतरी की उनकी माँग पर संबंधित अधिकारियों के साथ सीधी चर्चा हो सके। हुबली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में जोशी ने किसानों से सड़क पर उतरने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।
मंत्री का खुला निमंत्रण
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में जोशी ने कहा, 'मैं कर्नाटक के किसानों का दिल्ली में पूरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूँ। हम किसान नेताओं को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठने और उनके मुद्दों पर चर्चा करने तथा समाधान खोजने का इंतजाम करेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए सदा तत्पर है।
एफआरपी की मौजूदा स्थिति
जोशी ने बताया कि मई 2026 में गन्ने का एफआरपी बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया गया था। उन्होंने याद दिलाया कि फरवरी 2026 में जब वे एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, तब किसान नेताओं ने उनसे मुलाकात कर एफआरपी बढ़ाने की माँग रखी थी — और उसके बाद केंद्र ने मई में वह बढ़ोतरी की। उन्होंने यह भी नोट किया कि बढ़ोतरी के बाद कोई भी किसान प्रतिनिधि उनसे नहीं मिला, जबकि अब कुछ किसान एक बार फिर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।
निर्णय-प्रक्रिया की रूपरेखा
जोशी ने स्पष्ट किया कि एफआरपी में किसी भी संभावित बढ़ोतरी का निर्णय कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों तथा राज्य के गन्ना आयुक्त की रिपोर्ट और सिफारिशों पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अगर आप सीधे दिल्ली आते हैं, तो हम संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे और उचित कीमत सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाएंगे।'
किसानों की चिंता और विरोध की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में एफआरपी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। गौरतलब है कि राज्य की चीनी मिलें और केंद्र द्वारा घोषित एफआरपी के बीच का अंतर किसानों की वास्तविक आय को प्रभावित करता है। हुबली में मंगलवार को प्रस्तावित विरोध इसी असंतोष की अभिव्यक्ति थी।
आगे की राह
जोशी ने भरोसा दिलाया कि सरकार गन्ना किसानों की चिंताओं और भ्रम पर विस्तृत चर्चा करने तथा उन्हें राहत देने के लिए उचित कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा, 'हम उनकी शिकायतों को पूरी विनम्रता से सुनेंगे और सही समाधान खोजने की पूरी कोशिश करेंगे।' अब यह किसान नेताओं पर निर्भर है कि वे संवाद के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या विरोध जारी रखते हैं।