13 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक गन्ना किसानों के लिए केंद्र एक हफ्ते में बनाएगा उच्च-स्तरीय समिति: प्रह्लाद जोशी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक गन्ना किसानों के लिए केंद्र एक हफ्ते में बनाएगा उच्च-स्तरीय समिति: प्रह्लाद जोशी

सारांश

नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद केंद्र ने एक हफ्ते में उच्च-स्तरीय समिति बनाने का वादा किया। चीनी रिकवरी में गड़बड़ी, वजन कटौती और भुगतान विवाद — कर्नाटक के गन्ना किसानों की पुरानी शिकायतों का स्थायी समाधान अब वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रणाली से करने की कोशिश।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार एक हफ्ते के भीतर कर्नाटक गन्ना किसानों के मुद्दों पर उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति गठित करेगी।
समिति में केंद्र, कर्नाटक व महाराष्ट्र सरकार, किसान संगठन, चीनी मिलें और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे।
समिति चीनी रिकवरी के आँकड़ों में गड़बड़ी , वजन कटौती और भुगतान विवादों की जाँच करेगी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को किसानों की चिंताओं पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में FRP , MSP , SAP और इथेनॉल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
पूर्व सांसद राजू शेट्टी समेत किसान नेता और कर्नाटक के तीन राज्य मंत्री बैठक में मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कर्नाटक के गन्ना किसान नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने एक हफ्ते के भीतर एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति चीनी मिलों पर लगे कुप्रबंधन के आरोपों, भुगतान विवादों और गन्ने के वजन में कटौती जैसे संवेदनशील मुद्दों की जाँच करेगी।

बैठक में क्या हुआ

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक में चीनी मिलों द्वारा बताई गई चीनी रिकवरी के आँकड़ों में गड़बड़ी के आरोप, गन्ने के वजन में कटौती और भुगतान से जुड़े विवादों पर विस्तार से चर्चा हुई। कर्नाटक के सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी, कृषि मंत्री नरेंद्र स्वामी, चीनी एवं कपड़ा मंत्री रुद्रप्पा मनप्पा लमानी, केंद्रीय कृषि मंत्रालय तथा खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व सांसद राजू शेट्टी सहित किसान नेता भी इस बैठक में शामिल थे।

प्रस्तावित समिति की संरचना

मंत्रियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित समिति में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों के प्रतिनिधियों के अलावा किसान संगठनों, चीनी मिलों और कृषि वैज्ञानिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। शिवराज चौहान ने कहा कि सरकार किसानों और वैज्ञानिकों को एक साझा मंच पर लाकर चीनी रिकवरी, वजन और भुगतान विवादों के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को किसानों की चिंताओं पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

जाँच के दायरे में क्या आएगा

यह समिति गन्ने की कटाई के तकनीकी पहलुओं, चीनी रिकवरी मापन के वैज्ञानिक मानकों, प्रयोगशाला परीक्षण प्रणालियों और वजन करने की व्यवस्था की सटीकता की जाँच करेगी। इसके साथ ही उन आरोपों की भी जाँच होगी जिनके अनुसार कुछ चीनी मिलें वास्तविक चीनी रिकवरी से कम आँकड़े दर्ज करती हैं, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ता है।

एफआरपी, एमएसपी और इथेनॉल पर चर्चा

प्रह्लाद जोशी ने बैठक में गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत-आकलन के तरीकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने किसानों के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और FRP के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया। बैठक में राज्य परामर्शदात्री मूल्य (SAP) और इथेनॉल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

आगे की राह

मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बार-बार उठने वाले विवादों के लिए अस्थायी राहत देने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना है, जो किसानों के शोषण को स्थायी रूप से रोक सके। बैठक में वेस्ट मैनेजमेंट, फसल बीमा और गन्ना किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि सुधारात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य सरकारों के सहयोग की ज़रूरत पर विशेष बल दिया गया। प्रस्तावित समिति की रिपोर्ट पर अमल से यह तय होगा कि दशकों पुरानी गन्ना-भुगतान समस्या का वास्तविक हल निकलता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह भी पिछली ऐसी ही पहलों की तरह रिपोर्ट देकर ठंडे बस्ते में चली जाएगी। FRP और SAP के बीच की खाई, और चीनी रिकवरी की स्वतंत्र जाँच की माँग जब तक पारदर्शी तंत्र से नहीं जुड़ती, तब तक किसानों का भरोसा जीतना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार गन्ना किसानों के लिए जो समिति बनाएगी, उसमें कौन शामिल होगा?
प्रस्तावित उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों के प्रतिनिधि, किसान संगठन, चीनी मिलें और कृषि वैज्ञानिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति एक हफ्ते के भीतर गठित की जाएगी।
कर्नाटक के गन्ना किसानों की मुख्य शिकायतें क्या हैं?
किसानों की प्रमुख शिकायतें चीनी मिलों द्वारा चीनी रिकवरी के आँकड़ों में कथित गड़बड़ी, गन्ने के वजन में कटौती और भुगतान से जुड़े विवाद हैं। आरोप है कि कुछ मिलें वास्तविक रिकवरी से कम आँकड़े दर्ज करती हैं, जिससे किसानों का भुगतान प्रभावित होता है।
FRP और MSP में क्या फर्क है?
FRP (उचित और लाभकारी मूल्य) विशेष रूप से गन्ने के लिए केंद्र द्वारा तय न्यूनतम मूल्य है, जबकि MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) अन्य फसलों के लिए लागू होता है। प्रह्लाद जोशी ने बैठक में किसानों को इन दोनों के बीच का अंतर विस्तार से समझाया।
इस बैठक में कौन-कौन से राज्य और केंद्रीय प्रतिनिधि शामिल थे?
बैठक में केंद्र की ओर से मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान शामिल थे। कर्नाटक से सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी, कृषि मंत्री नरेंद्र स्वामी और चीनी-कपड़ा मंत्री रुद्रप्पा मनप्पा लमानी के साथ-साथ पूर्व सांसद राजू शेट्टी सहित किसान नेता भी उपस्थित रहे।
यह समिति क्या काम करेगी और इससे किसानों को क्या फायदा होगा?
समिति चीनी रिकवरी के वैज्ञानिक मानकों, प्रयोगशाला परीक्षण प्रणाली और वजन व्यवस्था की सटीकता की जाँच करेगी तथा दीर्घकालिक सुधार के सुझाव देगी। इसका उद्देश्य एक पारदर्शी प्रणाली बनाना है जिससे किसानों को उनकी उपज का सही दाम और उचित व्यवहार सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले