कर्नाटक गन्ना किसानों के लिए केंद्र एक हफ्ते में बनाएगा उच्च-स्तरीय समिति: प्रह्लाद जोशी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कर्नाटक के गन्ना किसान नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने एक हफ्ते के भीतर एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति चीनी मिलों पर लगे कुप्रबंधन के आरोपों, भुगतान विवादों और गन्ने के वजन में कटौती जैसे संवेदनशील मुद्दों की जाँच करेगी।
बैठक में क्या हुआ
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी तथा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक में चीनी मिलों द्वारा बताई गई चीनी रिकवरी के आँकड़ों में गड़बड़ी के आरोप, गन्ने के वजन में कटौती और भुगतान से जुड़े विवादों पर विस्तार से चर्चा हुई। कर्नाटक के सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी, कृषि मंत्री नरेंद्र स्वामी, चीनी एवं कपड़ा मंत्री रुद्रप्पा मनप्पा लमानी, केंद्रीय कृषि मंत्रालय तथा खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व सांसद राजू शेट्टी सहित किसान नेता भी इस बैठक में शामिल थे।
प्रस्तावित समिति की संरचना
मंत्रियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित समिति में केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों के प्रतिनिधियों के अलावा किसान संगठनों, चीनी मिलों और कृषि वैज्ञानिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। शिवराज चौहान ने कहा कि सरकार किसानों और वैज्ञानिकों को एक साझा मंच पर लाकर चीनी रिकवरी, वजन और भुगतान विवादों के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को किसानों की चिंताओं पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
जाँच के दायरे में क्या आएगा
यह समिति गन्ने की कटाई के तकनीकी पहलुओं, चीनी रिकवरी मापन के वैज्ञानिक मानकों, प्रयोगशाला परीक्षण प्रणालियों और वजन करने की व्यवस्था की सटीकता की जाँच करेगी। इसके साथ ही उन आरोपों की भी जाँच होगी जिनके अनुसार कुछ चीनी मिलें वास्तविक चीनी रिकवरी से कम आँकड़े दर्ज करती हैं, जिसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले भुगतान पर पड़ता है।
एफआरपी, एमएसपी और इथेनॉल पर चर्चा
प्रह्लाद जोशी ने बैठक में गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत-आकलन के तरीकों को विस्तार से समझाया। उन्होंने किसानों के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और FRP के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया। बैठक में राज्य परामर्शदात्री मूल्य (SAP) और इथेनॉल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
आगे की राह
मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बार-बार उठने वाले विवादों के लिए अस्थायी राहत देने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना है, जो किसानों के शोषण को स्थायी रूप से रोक सके। बैठक में वेस्ट मैनेजमेंट, फसल बीमा और गन्ना किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि सुधारात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य सरकारों के सहयोग की ज़रूरत पर विशेष बल दिया गया। प्रस्तावित समिति की रिपोर्ट पर अमल से यह तय होगा कि दशकों पुरानी गन्ना-भुगतान समस्या का वास्तविक हल निकलता है या नहीं।