23 सितंबर 2026
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चंडीगढ़ में बम धमकी ईमेल पर पुलिस सतर्क, एसएसपी कंवरदीप कौर की अध्यक्षता में बड़ी बैठक

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चंडीगढ़ में बम धमकी ईमेल पर पुलिस सतर्क, एसएसपी कंवरदीप कौर की अध्यक्षता में बड़ी बैठक

सारांश

चंडीगढ़ में ईमेल के जरिए बम धमकियों का सिलसिला जारी रहने के बाद पुलिस ने स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी विभागों को एक छत के नीचे लाकर समन्वित एसओपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। सीसीटीवी, डीएफएमडी और मासिक मॉक ड्रिल अनिवार्य किए गए हैं।

मुख्य बातें

चंडीगढ़ पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को ईमेल-आधारित बम धमकियों के मद्देनजर स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी विभागों के साथ समन्वय बैठक की।
बैठक की अध्यक्षता एसएसपी कंवरदीप कौर ने की; एसएसपी ऑपरेशन्स राजेश शर्मा और एसपी सिटी विजय कुमार भी उपस्थित रहे।
सभी संस्थानों को सीसीटीवी बढ़ाने, डीएफएमडी लगाने और डीएफएम सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए।
हर महीने कम से कम एक मॉक ड्रिल आयोजित करना सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य किया गया।
हितधारकों के सुझाव शामिल कर एक व्यावहारिक एसओपी तैयार की जाएगी जो धमकी मिलने पर तत्काल प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करे।

चंडीगढ़ पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को शहर में ईमेल के जरिए मिल रही बम की धमकियों के मद्देनजर स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम समन्वय बैठक आयोजित की। बैठक का मुख्य उद्देश्य ऐसी धमकियों से निपटने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करना था, जिसमें सभी हितधारकों की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित हो।

बैठक का स्वरूप और प्रमुख उपस्थिति

बैठक की अध्यक्षता एसएसपी कंवरदीप कौर ने की। एसएसपी ऑपरेशन्स राजेश शर्मा और एसपी सिटी विजय कुमार भी इस बैठक में उपस्थित रहे। शहर के प्राइवेट और सरकारी स्कूलों, बड़े अस्पतालों, फायर और इमरजेंसी सर्विसेज तथा इंजीनियरिंग विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।

यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब पिछले कुछ महीनों में देश के कई शहरों में स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियाँ मिली हैं। चंडीगढ़ में भी इस तरह के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

सुरक्षा उपायों पर निर्देश

एसएसपी कंवरदीप कौर ने बैठक के दौरान सभी संस्थानों को अपने परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों को डीएफएम सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे।

इसके तहत सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाना, डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) लगाना और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था करना शामिल है। गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आए हैं जब शहर के कई संस्थान अभी तक पर्याप्त भौतिक सुरक्षा ढाँचे से वंचित हैं।

मॉक ड्रिल और आपातकालीन तैयारी

पुलिस ने सभी संस्थानों को हर महीने कम से कम एक बार मॉक ड्रिल आयोजित करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में छात्र, स्टाफ, मरीज और आम लोग घबराएँ नहीं और सुरक्षित ढंग से परिसर से बाहर निकाला जा सके।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नियमित अभ्यास से न केवल संस्थागत तैयारी बढ़ती है, बल्कि धमकी की स्थिति में समन्वित प्रतिक्रिया भी त्वरित और प्रभावी हो जाती है।

एसओपी में हितधारकों का सुझाव शामिल होगा

चंडीगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया कि ईमेल-आधारित बम धमकियों के लिए जो एसओपी तैयार की जा रही है, उसमें इस बैठक में शामिल हितधारकों के सुझाव और फीडबैक को भी समाहित किया जाएगा। पुलिस का लक्ष्य एक ऐसा व्यावहारिक और समन्वित रिस्पॉन्स सिस्टम खड़ा करना है, जो किसी भी धमकी की स्थिति में तुरंत सक्रिय हो सके और आम जनता, छात्रों तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।

आम जनता से अपील

चंडीगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। किसी संदिग्ध ईमेल या असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दी जाए। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शहरवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि देशभर में ऐसी ईमेल धमकियों का सिलसिला महीनों से जारी है और अब तक कितने मामलों में स्रोत का पता चल सका है। सीसीटीवी और डीएफएमडी की माँग जायज है, पर छोटे स्कूलों और सामुदायिक अस्पतालों के पास इसके लिए बजट कहाँ से आएगा — यह प्रश्न बैठक में अनुत्तरित रहा। असली परीक्षा यह है कि एसओपी कागज पर नहीं, ज़मीन पर कितनी तेज़ी से लागू होती है और क्या इसके पालन की निगरानी का कोई तंत्र भी खड़ा किया जाएगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंडीगढ़ में बम धमकी की ईमेल कहाँ-कहाँ भेजी गई हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में चंडीगढ़ के स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों को ईमेल के जरिए बम की धमकियाँ मिली हैं। यह प्रवृत्ति देश के कई अन्य शहरों में भी देखी गई है।
चंडीगढ़ पुलिस ने इन धमकियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को एसएसपी कंवरदीप कौर की अध्यक्षता में एक समन्वय बैठक बुलाई, जिसमें सभी संस्थानों को सीसीटीवी, डीएफएमडी और अन्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा मासिक मॉक ड्रिल भी अनिवार्य की गई है।
मॉक ड्रिल क्यों जरूरी है और इसका उद्देश्य क्या है?
पुलिस के अनुसार, हर महीने कम से कम एक बार मॉक ड्रिल से छात्र, स्टाफ, मरीज और आम लोग आपात स्थिति में घबराए बिना सुरक्षित तरीके से परिसर खाली कर सकेंगे। इससे संस्थागत तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया दोनों मजबूत होते हैं।
बम धमकी मिलने पर आम नागरिक क्या करें?
चंडीगढ़ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध ईमेल या असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस ने हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
चंडीगढ़ पुलिस की एसओपी कब तक तैयार होगी?
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हितधारकों के सुझाव और फीडबैक शामिल करने के बाद एसओपी को अंतिम रूप दिया जाएगा, हालाँकि इसकी कोई निश्चित समय-सीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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