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चंद्र शेखर आजाद की मांग: CEC नियुक्ति में पारदर्शिता और मतपत्र प्रणाली की वापसी

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चंद्र शेखर आजाद की मांग: CEC नियुक्ति में पारदर्शिता और मतपत्र प्रणाली की वापसी

सारांश

चंद्र शेखर आजाद ने CEC ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध प्रदर्शनों के बीच चुनाव आयुक्त नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और मतपत्र प्रणाली की वापसी की माँग की। साथ ही गोमती बाढ़ पीड़ितों की मदद और गन्ना किसानों को 15% ब्याज सहित बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया।

मुख्य बातें

चंद्र शेखर आजाद ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में CEC नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की माँग की।
यह माँग CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उठाई गई।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने को आजाद ने 'दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र' के लिए चिंताजनक बताया।
BSP प्रमुख मायावती की माँग का समर्थन करते हुए आजाद ने मतपत्र प्रणाली की वापसी की वकालत की।
गोमती नदी के उफान से फैजुल्लागंज सहित कई क्षेत्र जलमग्न; आजाद ने सरकार से राहत की अपील की।
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार गन्ना किसानों को बकाये पर 15% ब्याज देने की माँग; सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज कर चुकी है।

आजाद समाज पार्टी-कांशी राम के अध्यक्ष और सांसद चंद्र शेखर आजाद ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की। यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध चल रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया।

नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की मांग

आजाद ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा, 'पहले की तरह ही एक प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट शामिल हो, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी के प्रभाव में न आकर चुनाव आयुक्त और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त बन सके।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, लेकिन अगर लोग चुनाव प्रक्रिया पर ही अविश्वास करने लगें तो क्या होगा?' — यह टिप्पणी चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर गहरी चिंता को दर्शाती है।

विरोध स्थल पर अनुमति न मिलना: लोकतंत्र पर सवाल

आजाद ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल है, फिर भी वहाँ अनुमति नहीं दी गई। उनके अनुसार, चाहे कारण कुछ भी हों, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों को विरोध के अधिकार से वंचित करना चिंताजनक है।

मतपत्र प्रणाली की वापसी की मांग

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती की माँग का समर्थन करते हुए आजाद ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर पुरानी मतपत्र प्रणाली की वापसी की वकालत की। गौरतलब है कि यह माँग विपक्षी दलों की साझा चिंता का हिस्सा बनती जा रही है, जो EVM की विश्वसनीयता पर कथित तौर पर सवाल उठाते रहे हैं।

गोमती बाढ़ और गन्ना किसानों का मुद्दा

आजाद ने उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के उफान से जलमग्न हुए क्षेत्रों — विशेषकर फैजुल्लागंज और अन्य इलाकों — का भी ज़िक्र किया। उन्होंने राज्य सरकार से बाढ़ पीड़ितों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने और नुकसान की भरपाई करने की अपील की।

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर उन्होंने याद दिलाया कि उच्च न्यायालय ने बकाया राशि पर 15 प्रतिशत ब्याज दिए जाने का फैसला सुनाया था। उनके अनुसार, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने मिल मालिकों का पक्ष लेते हुए मंत्रिमंडल में प्रस्ताव लाकर इस फैसले को रोकने की कोशिश की, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। समाजवादी पार्टी सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्वीकार कर दिया। आजाद ने माँग की कि किसानों को निर्धारित ब्याज दरों पर जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है और कई विपक्षी दल संस्थागत सुधार की माँग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस संरचनात्मक खामी की ओर इशारा है जो 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी अनसुलझी है — चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में कार्यपालिका का एकाधिकार। जब तक नियुक्ति प्रक्रिया में स्वतंत्र और संस्थागत जाँच का प्रावधान नहीं होगा, व्यक्ति बदलने से विश्वासयोग्यता का संकट नहीं टलेगा। मतपत्र प्रणाली की माँग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक तो है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि क्या विपक्ष इसके व्यावहारिक और वित्तीय निहितार्थों पर कोई ठोस वैकल्पिक प्रस्ताव लेकर आया है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्र शेखर आजाद ने CEC नियुक्ति में पारदर्शिता की माँग क्यों की?
आजाद ने यह माँग इसलिए उठाई क्योंकि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उनका मानना है कि सिर्फ CEC को हटाने से समस्या हल नहीं होगी — नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका सुनिश्चित करना ज़रूरी है।
मतपत्र प्रणाली की वापसी की माँग किसने और क्यों की?
BSP प्रमुख मायावती की माँग का समर्थन करते हुए चंद्र शेखर आजाद ने भी EVM की जगह पुरानी मतपत्र प्रणाली बहाल करने की वकालत की। यह माँग EVM की विश्वसनीयता को लेकर विपक्षी दलों की साझा चिंता का हिस्सा है।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
आजाद के अनुसार जंतर-मंतर विरोध के लिए निर्धारित स्थल होने के बावजूद वहाँ प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। अनुमति न दिए जाने के कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन आजाद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताया।
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का बकाया ब्याज विवाद क्या है?
उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि गन्ना किसानों के बकाये पर 15% ब्याज दिया जाए। तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने मंत्रिमंडल में प्रस्ताव लाकर इसे रोकने की कोशिश की, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी SLP अस्वीकार कर दी। आजाद ने किसानों को तत्काल भुगतान की माँग की।
गोमती नदी की बाढ़ से कौन से क्षेत्र प्रभावित हैं?
गोमती नदी के जलस्तर बढ़ने से फैजुल्लागंज सहित उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। आजाद ने राज्य सरकार से बाढ़ पीड़ितों को बुनियादी सुविधाएँ देने और नुकसान की भरपाई करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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