चंद्र शेखर आजाद की मांग: CEC नियुक्ति में पारदर्शिता और मतपत्र प्रणाली की वापसी
सारांश
मुख्य बातें
आजाद समाज पार्टी-कांशी राम के अध्यक्ष और सांसद चंद्र शेखर आजाद ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की। यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध चल रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया।
नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की मांग
आजाद ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बुनियादी बदलाव नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा, 'पहले की तरह ही एक प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट शामिल हो, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी के प्रभाव में न आकर चुनाव आयुक्त और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त बन सके।'
उन्होंने यह भी कहा, 'हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, लेकिन अगर लोग चुनाव प्रक्रिया पर ही अविश्वास करने लगें तो क्या होगा?' — यह टिप्पणी चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर गहरी चिंता को दर्शाती है।
विरोध स्थल पर अनुमति न मिलना: लोकतंत्र पर सवाल
आजाद ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल है, फिर भी वहाँ अनुमति नहीं दी गई। उनके अनुसार, चाहे कारण कुछ भी हों, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों को विरोध के अधिकार से वंचित करना चिंताजनक है।
मतपत्र प्रणाली की वापसी की मांग
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती की माँग का समर्थन करते हुए आजाद ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर पुरानी मतपत्र प्रणाली की वापसी की वकालत की। गौरतलब है कि यह माँग विपक्षी दलों की साझा चिंता का हिस्सा बनती जा रही है, जो EVM की विश्वसनीयता पर कथित तौर पर सवाल उठाते रहे हैं।
गोमती बाढ़ और गन्ना किसानों का मुद्दा
आजाद ने उत्तर प्रदेश में गोमती नदी के उफान से जलमग्न हुए क्षेत्रों — विशेषकर फैजुल्लागंज और अन्य इलाकों — का भी ज़िक्र किया। उन्होंने राज्य सरकार से बाढ़ पीड़ितों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने और नुकसान की भरपाई करने की अपील की।
गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर उन्होंने याद दिलाया कि उच्च न्यायालय ने बकाया राशि पर 15 प्रतिशत ब्याज दिए जाने का फैसला सुनाया था। उनके अनुसार, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने मिल मालिकों का पक्ष लेते हुए मंत्रिमंडल में प्रस्ताव लाकर इस फैसले को रोकने की कोशिश की, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। समाजवादी पार्टी सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्वीकार कर दिया। आजाद ने माँग की कि किसानों को निर्धारित ब्याज दरों पर जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है और कई विपक्षी दल संस्थागत सुधार की माँग कर रहे हैं।