छत्तीसगढ़: नारायणपुर में 15 किलो प्रेशर कुकर IED और हथियारों का जखीरा बरामद, माओवादियों को बड़ा झटका
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 7 जुलाई 2026 को नारायणपुर पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 53वीं बटालियन ने एक संयुक्त माओवाद-विरोधी अभियान के दौरान जंगल में छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद किया, जिसमें 15 किलोग्राम का एक शक्तिशाली प्रेशर कुकर IED भी शामिल था। अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है।
अभियान की पृष्ठभूमि और नेतृत्व
विश्वसनीय खुफिया सूचना के आधार पर यह संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अभियान का नेतृत्व नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुड़िया और ITBP की 53वीं बटालियन के कमांडेंट संजय कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इस ऑपरेशन में ITBP के जवान, नारायणपुर पुलिस का एक प्रतिनिधि दल और एक पाँच सदस्यीय बम निरोधक दस्ता (BDS) शामिल था।
टीम ने एडसमेटा गाँव और अडिंगपार कैंप के आसपास के घने जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाया। यह क्षेत्र वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित माना जाता है और सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।
बरामद हथियार और विस्फोटक सामग्री
घने जंगलों में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों को माओवादियों द्वारा छिपाकर रखा गया हथियारों और विस्फोटकों का विशाल भंडार मिला। बरामद सामग्री में शामिल हैं:
15 किलोग्राम का प्रेशर कुकर IED, एक स्थानीय निर्मित रॉकेट लॉन्चर, 16 देसी 51 मिमी मोर्टार गोले, 5 देसी 84 मिमी रॉकेट लॉन्चर राउंड, 10 देसी 40×46 मिमी बैरल ग्रेनेड लॉन्चर राउंड, .303 राइफल के 8 कारतूस और 4 टैक्टिकल पाउच।
मौके पर बरामद 15 किलो के प्रेशर कुकर IED को बम निरोधक दस्ते ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए नियंत्रित विस्फोट के ज़रिए सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया।
अभियान का महत्व
यह ऑपरेशन उन क्षेत्रों में चलाया गया जिन्हें घोषित रूप से 'नक्सल मुक्त' किया जा चुका है, फिर भी वहाँ माओवादी गतिविधियों के अवशेष बने हुए हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में IED हमलों में सुरक्षाकर्मियों की जानें जा चुकी हैं — ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी संभावित हमलों को रोकने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों का मानना है कि इस बरामदगी से क्षेत्र में माओवादियों की परिचालन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचा है। अभियान पूरा होने के बाद संयुक्त सुरक्षा बल सुरक्षित रूप से अडिंगपार कैंप लौट आए।
आगे की रणनीति
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध अभियान और सघन तलाशी ऑपरेशन पूरी मज़बूती के साथ जारी रहेंगे। यह संयुक्त अभियान राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय का भी प्रमाण है, जो आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और स्थानीय नागरिकों को नक्सली खतरे से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।