8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दंतेवाड़ा में 5 किलो प्रेशर कुकर आईईडी बरामद, सुरक्षा बलों ने माओवादी साजिश नाकाम की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दंतेवाड़ा में 5 किलो प्रेशर कुकर आईईडी बरामद, सुरक्षा बलों ने माओवादी साजिश नाकाम की

सारांश

दंतेवाड़ा के हिडपाल जंगल में 23 मई को सुरक्षा बलों ने 5 किलो का प्रेशर कुकर आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किया — माओवादियों की उस साजिश को नाकाम किया जो सुरक्षाकर्मियों और ग्रामीणों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।

मुख्य बातें

दंतेवाड़ा के हिडपाल गाँव के जंगल में 23 मई को करीब 5 किलो वजनी प्रेशर कुकर आईईडी बरामद किया गया।
संयुक्त अभियान में जिला पुलिस , 'यंग प्लाटून' और CRPF की 195वीं बटालियन शामिल थीं।
ऑपरेशन सुबह 5 बजे शुरू हुआ; सुबह 8:20 बजे संदिग्ध वस्तु मिली।
BDDS ने मौके पर ही विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया; कोई हताहत नहीं।
पुलिस के अनुसार माओवादियों ने यह आईईडी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए छिपाया था।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने 23 मई को एक बड़ी माओवादी साजिश को विफल कर दिया। बारसूर थाना क्षेत्र के हिडपाल गाँव के घने जंगलों में संयुक्त दल ने करीब 5 किलो वजनी प्रेशर कुकर आईईडी बरामद कर उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समय रहते इस विस्फोटक को नष्ट किए जाने से सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों की जान पर मँडरा रहा एक बड़ा खतरा टल गया।

अभियान की शुरुआत कैसे हुई

शनिवार को मिली खुफिया सूचना के आधार पर जिला पुलिस, 'यंग प्लाटून' और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की 195वीं बटालियन की बम निरोधक टीम ने एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। यह ऑपरेशन सुबह करीब 5 बजे सेकंड-इन-कमांड विक्रांत वर्मा और असिस्टेंट कमांडेंट संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में आरंभ हुआ।

गौरतलब है कि दंतेवाड़ा का यह इलाका पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा है, जहाँ नक्सली गतिविधियाँ ऐतिहासिक रूप से सक्रिय रही हैं। जवानों ने उन संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रूप से तलाशी ली जहाँ विस्फोटक छिपाए जाने की आशंका थी।

आईईडी की खोज और निष्क्रियकरण

सुबह 8:20 बजे तलाशी के दौरान जवानों को जंगल में एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। सतर्क जवानों ने तत्काल पूरे इलाके को घेर लिया और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) को मौके पर बुलाया। जाँच में पुष्टि हुई कि वह एक प्रेशर कुकर आईईडी था। इसके बाद BDDS ने निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया का पालन करते हुए विस्फोटक को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। इस पूरी कार्रवाई में कोई हताहत नहीं हुआ।

माओवादियों का कथित मकसद

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, माओवादियों ने यह आईईडी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और क्षेत्र में भय का वातावरण बनाने के उद्देश्य से जंगल में छिपाया था। यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान तेज़ हो रहे हैं और सुरक्षा बल लगातार माओवादी ठिकानों पर दबाव बना रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

आईईडी निष्क्रिय करने के बाद सुरक्षा दल ने आसपास के संवेदनशील इलाकों में सघन तलाशी अभियान जारी रखा, ताकि किसी अन्य विस्फोटक की मौजूदगी को पूरी तरह नकारा जा सके। यह अभियान छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बढ़ते समन्वय का उदाहरण है, और आने वाले दिनों में ऐसे संयुक्त ऑपरेशन और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो माओवादियों की बदलती रणनीति को दर्शाते हैं। जब सीधे मुठभेड़ में नुकसान बढ़ता है, तो आईईडी उनका 'असममित हथियार' बन जाता है। असली सवाल यह है कि खुफिया तंत्र कितनी तेज़ी से इन उपकरणों की जानकारी जुटा पाता है — इस बार सूचना समय पर मिली, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। सुरक्षा बलों की सफलता सराहनीय है, पर ग्रामीण इलाकों में नागरिक सुरक्षा तंत्र को और मज़बूत करने की ज़रूरत बनी हुई है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दंतेवाड़ा में बरामद आईईडी क्या था?
यह करीब 5 किलो वजनी प्रेशर कुकर आईईडी था, जो छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हिडपाल गाँव के जंगल में छिपाया गया था। पुलिस के अनुसार इसे माओवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के इरादे से रखा था।
इस अभियान में कौन-कौन से सुरक्षा बल शामिल थे?
इस संयुक्त अभियान में जिला पुलिस, 'यंग प्लाटून' और CRPF की 195वीं बटालियन की बम निरोधक टीम शामिल थी। ऑपरेशन का नेतृत्व सेकंड-इन-कमांड विक्रांत वर्मा और असिस्टेंट कमांडेंट संजीव कुमार यादव ने किया।
आईईडी को कैसे निष्क्रिय किया गया?
बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) ने तकनीकी प्रक्रिया अपनाते हुए मौके पर ही विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। पूरी कार्रवाई में कोई हताहत नहीं हुआ।
क्या इस घटना में कोई घायल हुआ?
नहीं, इस पूरे अभियान में किसी के घायल या हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। विस्फोटक को समय पर पहचान कर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया।
दंतेवाड़ा में माओवादी आईईडी का खतरा कितना गंभीर है?
दंतेवाड़ा सहित बस्तर संभाग में माओवादी सड़क किनारे और जंगलों में आईईडी छिपाने की रणनीति अपनाते रहे हैं, जिससे सुरक्षाकर्मियों और ग्रामीणों दोनों को खतरा रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में नक्सल विरोधी अभियान तेज़ हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले