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एपेक में चीन की तीन खाद्य सुरक्षा पहल, एशिया-प्रशांत सहयोग को नई दिशा

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एपेक में चीन की तीन खाद्य सुरक्षा पहल, एशिया-प्रशांत सहयोग को नई दिशा

सारांश

चीन ने ताल्यान में एपेक खाद्य सुरक्षा संवाद के मंच से तीन बड़ी पहल प्रस्तावित कीं — अनाज उत्पादन क्षमता विस्तार, भंडारण आधुनिकीकरण और तकनीकी नवाचार। 15वीं पंचवर्षीय योजना से जुड़ी ये पहलें एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बहुपक्षीय खाद्य सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास हैं।

मुख्य बातें

चीन ने 20 अगस्त को ताल्यान, लियाओनिंग में आयोजित एपेक खाद्य सुरक्षा संवाद में तीन पहल प्रस्तावित कीं।
निदेशक लियू हुआनशिन ने 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत अनाज उत्पादन क्षमता, भंडारण आधुनिकीकरण और तकनीकी नवाचार पर ज़ोर दिया।
पहलों का लक्ष्य एपेक अर्थव्यवस्थाओं के बीच खाद्य सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देना है।
अनाज की स्थिर कीमतों और आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा शासन प्रणाली में सुधार प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
आलोचकों का कहना है कि पहलों की सफलता एपेक सदस्य देशों की सहमति और क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगी।

चीन ने 20 अगस्त 2026 को लियाओनिंग प्रांत के ताल्यान में आयोजित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) के खाद्य सुरक्षा पर उच्च स्तरीय सरकारी-व्यापारिक संवाद में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष तीन महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा पहल प्रस्तावित कीं। इस संवाद में राष्ट्रीय खाद्य और रणनीतिक भंडार प्रशासन के निदेशक लियू हुआनशिन ने चीन का पक्ष रखते हुए इन पहलों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।

तीन पहलों की रूपरेखा

निदेशक लियू हुआनशिन ने स्पष्ट किया कि चीन की ये पहलें खाद्य उत्पादन, भंडारण और तकनीकी नवाचार के तीन स्तंभों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि 15वीं पंचवर्षीय योजना की अवधि में चीन एक साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादन वातावरण में सुधार लाने और किसानों की आय में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करेगा।

इसके तहत अनाज की समग्र उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि, कीमतों और आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करना, तथा अनाज भंडारण और रसद के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य हैं।

तकनीकी नवाचार और शासन सुधार

चीन की योजना के अनुसार, तकनीकी नवाचार के माध्यम से खाद्य उद्योग में परिवर्तन और उन्नयन को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, अनाज सुरक्षा शासन प्रणाली में व्यापक सुधार कर देश की खाद्य सुरक्षा गारंटी क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा समेटे हुए है और इस क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा की चुनौतियाँ जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान और बढ़ती माँग के कारण और जटिल होती जा रही हैं।

एपेक मंच का महत्व

यह संवाद ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ रहा है। एपेक के सदस्य देश वैश्विक व्यापार का लगभग 47% और वैश्विक GDP का करीब 62% प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे यह मंच खाद्य सुरक्षा नीति-निर्माण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

चीन की इन पहलों को एपेक अर्थव्यवस्थाओं के बीच बहुपक्षीय कृषि सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

आगे की राह

आलोचकों का कहना है कि इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एपेक सदस्य देश किस हद तक इन्हें साझा नीति ढाँचे में शामिल करते हैं। 15वीं पंचवर्षीय योजना के क्रियान्वयन की प्रगति और एपेक स्तर पर सहमति बनने की गति आने वाले महीनों में इस पहल की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये सदस्य देशों के बीच बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं में बदलेंगी या केवल घोषणाओं तक सीमित रहेंगी। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में खाद्य असुरक्षा की जड़ें जलवायु परिवर्तन और असमान वितरण में हैं, जिन्हें भंडारण आधुनिकीकरण अकेले नहीं सुलझा सकता। 15वीं पंचवर्षीय योजना की समयसीमा और एपेक की गैर-बाध्यकारी प्रकृति इन पहलों के व्यावहारिक प्रभाव को सीमित कर सकती है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एपेक खाद्य सुरक्षा संवाद में चीन ने कौन-सी तीन पहल प्रस्तावित की हैं?
चीन ने अनाज उत्पादन क्षमता विस्तार, भंडारण एवं रसद आधुनिकीकरण, और तकनीकी नवाचार के माध्यम से औद्योगिक उन्नयन — ये तीन पहलें एपेक अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष रखी हैं। इनका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा सहयोग को संस्थागत आधार देना है।
यह संवाद कहाँ और कब आयोजित हुआ?
यह उच्च स्तरीय सरकारी-व्यापारिक संवाद 20 अगस्त को चीन के लियाओनिंग प्रांत के ताल्यान शहर में आयोजित किया गया। इसमें एपेक सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में खाद्य सुरक्षा को लेकर क्या लक्ष्य हैं?
15वीं पंचवर्षीय योजना में चीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादन वातावरण सुधारने और किसानों की आय वृद्धि पर एक साथ ध्यान देगा। इसके साथ ही अनाज की स्थिर कीमतें और आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा शासन प्रणाली में सुधार प्रमुख लक्ष्य हैं।
एपेक के संदर्भ में यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?
एपेक सदस्य देश वैश्विक व्यापार का लगभग 47% और वैश्विक GDP का करीब 62% प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे इस मंच पर की गई पहलें व्यापक प्रभाव रख सकती हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान से खाद्य सुरक्षा पर बढ़ते दबाव के बीच यह संवाद विशेष रूप से प्रासंगिक है।
इन पहलों की सफलता किन कारकों पर निर्भर करेगी?
आलोचकों का कहना है कि इन पहलों की सफलता एपेक सदस्य देशों की सहमति और साझा नीति ढाँचे में इन्हें शामिल करने की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी। चूँकि एपेक एक गैर-बाध्यकारी मंच है, इसलिए क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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