26 अगस्त 2026
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11वां एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हांगचो में संपन्न, 21 अर्थव्यवस्थाओं के 200 प्रतिनिधि शामिल

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11वां एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हांगचो में संपन्न, 21 अर्थव्यवस्थाओं के 200 प्रतिनिधि शामिल

सारांश

हांगचो में आयोजित 11वें एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में 21 अर्थव्यवस्थाओं के 200 प्रतिनिधि जुटे। जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला संकट की पृष्ठभूमि में यह बैठक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कृषि सहयोग की नई दिशा तय करने का प्रयास है।

मुख्य बातें

11वां एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 25 अगस्त 2026 को हांगचो, चच्यांग प्रांत, चीन में आयोजित हुआ।
एपेक की 21 अर्थव्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के करीब 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें FAO और एपेक सचिवालय शामिल थे।
जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव को एशिया-प्रशांत खाद्य सुरक्षा के लिए प्रमुख चुनौती बताया गया।
चीन का अनाज उत्पादन 2025 में 7.15 खरब किलोग्राम तक पहुँचा; प्रति व्यक्ति उपलब्धता 500 किलोग्राम से अधिक।
चीन ने सभी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अधिक योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।

एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का 11वां संस्करण मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर में आयोजित हुआ। एपेक 'चीन वर्ष' श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस सम्मेलन को इस वर्ष एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कृषि से जुड़े सबसे व्यापक बहुपक्षीय मंत्रिस्तरीय मंचों में से एक माना जा रहा है।

सम्मेलन में किसने लिया हिस्सा

इस उच्चस्तरीय बैठक में एपेक की 21 अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ एपेक सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के करीब 200 प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी प्रतिनिधियों ने हांगचो में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय नीतिगत विचार-विमर्श किया।

मुख्य चुनौतियाँ और क्षेत्रीय संदर्भ

वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव जैसी परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के सामने गंभीर संकट उत्पन्न कर रही हैं। गौरतलब है कि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं भूमि और समुद्र दोनों मार्गों से आपस में जुड़ी हैं। उनकी कृषि परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न हैं, लेकिन उनके हित एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं — जिससे कृषि क्षेत्र में पूरक ताकत का लाभ उठाने और सहयोग की व्यापक संभावनाएं बनती हैं।

खाद्य सुरक्षा में चीन की भूमिका

एपेक के एक प्रमुख सदस्य के रूप में चीन खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को विशेष महत्व देता है। आँकड़ों के अनुसार, चीन का वार्षिक खाद्य उत्पादन 7 खरब किलोग्राम के स्तर को पार कर चुका है। वर्ष 2025 में चीन का अनाज उत्पादन 7.15 खरब किलोग्राम तक पहुँच गया, जबकि प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 500 किलोग्राम से अधिक रही। चीन ने कहा है कि वह व्यावहारिक कदम उठाते हुए सभी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर क्षेत्रीय और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक योगदान देगा।

आगे की दिशा

यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खाद्य असुरक्षा की चिंताएँ गहरी हो रही हैं और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बहुपक्षीय कृषि सहयोग की माँग तेज़ हो रही है। सम्मेलन में हुए नीतिगत विमर्श से क्षेत्रीय खाद्य प्रणालियों को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस कदमों की उम्मीद जताई जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

11वां एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन कहाँ और कब हुआ?
यह सम्मेलन 25 अगस्त 2026 को चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर में आयोजित हुआ। यह एपेक 'चीन वर्ष' श्रृंखला के अंतर्गत इस वर्ष का सबसे बड़ा कृषि-केंद्रित बहुपक्षीय मंत्रिस्तरीय मंच था।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से देश और संस्थान शामिल हुए?
सम्मेलन में एपेक की 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ एपेक सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कुल करीब 200 प्रतिनिधि शामिल हुए।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव इस क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के सामने प्रमुख परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ हैं। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं की कृषि परिस्थितियाँ भिन्न हैं, लेकिन उनके हित और संभावित सहयोग आपस में गहराई से जुड़े हैं।
खाद्य सुरक्षा के मामले में चीन की क्या स्थिति है?
आँकड़ों के अनुसार, चीन का वार्षिक खाद्य उत्पादन 7 खरब किलोग्राम से अधिक हो चुका है और 2025 में यह 7.15 खरब किलोग्राम तक पहुँच गया। प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 500 किलोग्राम से अधिक रही।
इस सम्मेलन का क्षेत्रीय खाद्य नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
सम्मेलन में हुए उच्चस्तरीय नीतिगत विमर्श से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कृषि सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। हालाँकि ठोस नीतिगत परिणाम आगामी घोषणाओं पर निर्भर करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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