11वां एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन हांगचो में संपन्न, 21 अर्थव्यवस्थाओं के 200 प्रतिनिधि शामिल
सारांश
मुख्य बातें
एपेक खाद्य सुरक्षा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का 11वां संस्करण मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर में आयोजित हुआ। एपेक 'चीन वर्ष' श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित इस सम्मेलन को इस वर्ष एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कृषि से जुड़े सबसे व्यापक बहुपक्षीय मंत्रिस्तरीय मंचों में से एक माना जा रहा है।
सम्मेलन में किसने लिया हिस्सा
इस उच्चस्तरीय बैठक में एपेक की 21 अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ-साथ एपेक सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के करीब 200 प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी प्रतिनिधियों ने हांगचो में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय नीतिगत विचार-विमर्श किया।
मुख्य चुनौतियाँ और क्षेत्रीय संदर्भ
वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव जैसी परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा के सामने गंभीर संकट उत्पन्न कर रही हैं। गौरतलब है कि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं भूमि और समुद्र दोनों मार्गों से आपस में जुड़ी हैं। उनकी कृषि परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न हैं, लेकिन उनके हित एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं — जिससे कृषि क्षेत्र में पूरक ताकत का लाभ उठाने और सहयोग की व्यापक संभावनाएं बनती हैं।
खाद्य सुरक्षा में चीन की भूमिका
एपेक के एक प्रमुख सदस्य के रूप में चीन खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को विशेष महत्व देता है। आँकड़ों के अनुसार, चीन का वार्षिक खाद्य उत्पादन 7 खरब किलोग्राम के स्तर को पार कर चुका है। वर्ष 2025 में चीन का अनाज उत्पादन 7.15 खरब किलोग्राम तक पहुँच गया, जबकि प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 500 किलोग्राम से अधिक रही। चीन ने कहा है कि वह व्यावहारिक कदम उठाते हुए सभी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर क्षेत्रीय और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक योगदान देगा।
आगे की दिशा
यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खाद्य असुरक्षा की चिंताएँ गहरी हो रही हैं और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बहुपक्षीय कृषि सहयोग की माँग तेज़ हो रही है। सम्मेलन में हुए नीतिगत विमर्श से क्षेत्रीय खाद्य प्रणालियों को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस कदमों की उम्मीद जताई जा रही है।