एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026: शनचन में संयुक्त वक्तव्य पारित, जैव विविधता और सतत वन प्रबंधन पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) का वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 से 28 जुलाई 2026 के बीच चीन के शनचन शहर में आयोजित हुआ, जिसमें '2026 एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य' सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस वक्तव्य में सभी 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं से जैव विविधता संरक्षण, वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर अंकुश और सतत वन प्रबंधन को राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की गई।
संयुक्त वक्तव्य में क्या है
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, प्रत्येक सदस्य अर्थव्यवस्था अपनी परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप वन विकास तथा वैध वन उत्पादों के व्यापार के लिए निवेश एवं वित्तपोषण के अवसर बढ़ाएगी। इसके साथ ही वन उत्पादों के प्रसंस्करण को आधुनिक बनाने और उनकी मूल्य श्रृंखला का विस्तार करने पर भी सहमति बनी।
वक्तव्य में एशिया प्रशांत क्षेत्र में शहरी वानिकी और जल संसाधन प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने, तकनीकी नवाचार के ज़रिए पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करने तथा सतत वन प्रबंधन के सिद्धांतों के अनुरूप नए वन उद्योगों, उत्पादों और सेवाओं के विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी शामिल है।
सम्मेलन का महत्व और विषय
यह सम्मेलन एपेक के 'चीन वर्ष' के अंतर्गत आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में से एक था। गौरतलब है कि यह 15 वर्षों के अंतराल के बाद चीन में आयोजित एपेक का पहला पारिस्थितिकी-केंद्रित विशेष सम्मेलन भी रहा। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था — 'एशिया प्रशांत के वनों की सहनशक्ति को मजबूत करना और सार्वजनिक पारिस्थितिक कल्याण को साझा करना।'
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर वनों की कटाई और जैव विविधता के क्षरण को लेकर चिंताएँ गहराती जा रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय 2030 के जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में प्रयासरत है।
प्रतिभागी और चर्चा के मुद्दे
सम्मेलन में एपेक की 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और विद्वानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने वैश्विक वन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और हरित उद्योगों के विकास जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिसमें व्यापक सहमति भी बनी।
चीन की वानिकी उपलब्धियाँ
एशिया प्रशांत क्षेत्र के एक प्रमुख सदस्य के रूप में चीन ने वानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आँकड़ों के अनुसार, चीन ने दुनिया के नए हरित क्षेत्र में 25 प्रतिशत का योगदान दिया है और वर्ष 2030 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय वन संचयन लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर लिया है।
इसके अतिरिक्त, चीन ने राष्ट्रीय उद्यानों को केंद्र में रखकर संरक्षित क्षेत्रों की एक व्यापक व्यवस्था विकसित की है। वर्तमान में चीन के लगभग 18 प्रतिशत स्थलीय क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया जा चुका है और देश में पाँच राष्ट्रीय उद्यान आधिकारिक रूप से स्थापित हो चुके हैं।
आगे की राह
संयुक्त वक्तव्य के पारित होने के साथ अब यह देखना होगा कि सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ इन प्रतिबद्धताओं को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में किस प्रकार और किस गति से समाहित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर प्रभावी अंकुश और सतत वन प्रबंधन के लिए ठोस क्रियान्वयन तंत्र की आवश्यकता होगी।