29 जुलाई 2026
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एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026: शनचन में संयुक्त वक्तव्य पारित, जैव विविधता और सतत वन प्रबंधन पर सहमति

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एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026: शनचन में संयुक्त वक्तव्य पारित, जैव विविधता और सतत वन प्रबंधन पर सहमति

सारांश

शनचन में 15 साल बाद चीन की मेज़बानी में हुए एपेक के पहले पारिस्थितिकी-केंद्रित वन सम्मेलन ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त वक्तव्य पारित किया। 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं ने जैव विविधता, अवैध वन व्यापार पर रोक और सतत वन प्रबंधन को राष्ट्रीय नीतियों से जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026 का आयोजन 26-28 जुलाई को चीन के शनचन में हुआ।
'2026 एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य' सर्वसम्मति से पारित किया गया।
21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जैव विविधता संरक्षण, वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर अंकुश और सतत वन प्रबंधन को राष्ट्रीय नीतियों से जोड़ने पर सहमति बनी।
चीन ने विश्व के नए हरित क्षेत्र में 25% योगदान दिया और 2030 का वन संचयन लक्ष्य समय से पहले हासिल किया।
यह 15 वर्षों के बाद चीन में आयोजित एपेक का पहला पारिस्थितिकी-केंद्रित विशेष सम्मेलन था।

एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) का वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 से 28 जुलाई 2026 के बीच चीन के शनचन शहर में आयोजित हुआ, जिसमें '2026 एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य' सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस वक्तव्य में सभी 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं से जैव विविधता संरक्षण, वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर अंकुश और सतत वन प्रबंधन को राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की गई।

संयुक्त वक्तव्य में क्या है

संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, प्रत्येक सदस्य अर्थव्यवस्था अपनी परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप वन विकास तथा वैध वन उत्पादों के व्यापार के लिए निवेश एवं वित्तपोषण के अवसर बढ़ाएगी। इसके साथ ही वन उत्पादों के प्रसंस्करण को आधुनिक बनाने और उनकी मूल्य श्रृंखला का विस्तार करने पर भी सहमति बनी।

वक्तव्य में एशिया प्रशांत क्षेत्र में शहरी वानिकी और जल संसाधन प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने, तकनीकी नवाचार के ज़रिए पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करने तथा सतत वन प्रबंधन के सिद्धांतों के अनुरूप नए वन उद्योगों, उत्पादों और सेवाओं के विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी शामिल है।

सम्मेलन का महत्व और विषय

यह सम्मेलन एपेक के 'चीन वर्ष' के अंतर्गत आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में से एक था। गौरतलब है कि यह 15 वर्षों के अंतराल के बाद चीन में आयोजित एपेक का पहला पारिस्थितिकी-केंद्रित विशेष सम्मेलन भी रहा। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था — 'एशिया प्रशांत के वनों की सहनशक्ति को मजबूत करना और सार्वजनिक पारिस्थितिक कल्याण को साझा करना।'

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर वनों की कटाई और जैव विविधता के क्षरण को लेकर चिंताएँ गहराती जा रही हैं, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय 2030 के जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में प्रयासरत है।

प्रतिभागी और चर्चा के मुद्दे

सम्मेलन में एपेक की 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और विद्वानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने वैश्विक वन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और हरित उद्योगों के विकास जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिसमें व्यापक सहमति भी बनी।

चीन की वानिकी उपलब्धियाँ

एशिया प्रशांत क्षेत्र के एक प्रमुख सदस्य के रूप में चीन ने वानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आँकड़ों के अनुसार, चीन ने दुनिया के नए हरित क्षेत्र में 25 प्रतिशत का योगदान दिया है और वर्ष 2030 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय वन संचयन लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर लिया है।

इसके अतिरिक्त, चीन ने राष्ट्रीय उद्यानों को केंद्र में रखकर संरक्षित क्षेत्रों की एक व्यापक व्यवस्था विकसित की है। वर्तमान में चीन के लगभग 18 प्रतिशत स्थलीय क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया जा चुका है और देश में पाँच राष्ट्रीय उद्यान आधिकारिक रूप से स्थापित हो चुके हैं।

आगे की राह

संयुक्त वक्तव्य के पारित होने के साथ अब यह देखना होगा कि सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ इन प्रतिबद्धताओं को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में किस प्रकार और किस गति से समाहित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर प्रभावी अंकुश और सतत वन प्रबंधन के लिए ठोस क्रियान्वयन तंत्र की आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें बाध्यकारी लक्ष्यों का अभाव एक पुरानी कमज़ोरी को दोहराता है — अंतरराष्ट्रीय वन समझौते अक्सर प्रतिबद्धताओं में मज़बूत और क्रियान्वयन में कमज़ोर साबित होते हैं। चीन की वानिकी उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं, किंतु आलोचकों का कहना है कि 'हरित क्षेत्र' के आँकड़ों में वृक्षारोपण और प्राकृतिक वनों को एक साथ गिनना भ्रामक हो सकता है। असली कसौटी यह होगी कि क्या सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ अवैध लकड़ी व्यापार पर साझा निगरानी तंत्र स्थापित करती हैं — जो अभी तक नहीं हो पाया है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एपेक वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 2026 क्या था?
यह 26 से 28 जुलाई 2026 को चीन के शनचन शहर में आयोजित एपेक का विशेष वन मंत्रिस्तरीय सम्मेलन था, जिसमें 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाओं और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह 15 वर्षों के अंतराल के बाद चीन में आयोजित एपेक का पहला पारिस्थितिकी-केंद्रित सम्मेलन था।
संयुक्त वक्तव्य में किन मुद्दों पर सहमति बनी?
संयुक्त वक्तव्य में जैव विविधता संरक्षण, वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर कार्रवाई, सतत वन प्रबंधन को राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों से जोड़ने, शहरी वानिकी में सहयोग और तकनीकी नवाचार के ज़रिए पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन पर सहमति बनी। प्रत्येक सदस्य अर्थव्यवस्था अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार वन विकास में निवेश बढ़ाने पर भी राज़ी हुई।
इस सम्मेलन का एपेक के लिए क्या महत्व है?
यह सम्मेलन एपेक के 'चीन वर्ष' के तहत आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में से एक था और 15 साल में पहली बार चीन में हुआ पारिस्थितिकी-केंद्रित एपेक आयोजन था। इसने एशिया प्रशांत क्षेत्र में वन संरक्षण को आर्थिक विकास नीतियों के साथ जोड़ने की दिशा में एक साझा ढाँचा तैयार किया।
चीन ने वानिकी क्षेत्र में क्या उपलब्धियाँ हासिल की हैं?
आँकड़ों के अनुसार, चीन ने विश्व के नए हरित क्षेत्र में 25 प्रतिशत का योगदान दिया है और 2030 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय वन संचयन लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। इसके अलावा चीन के लगभग 18 प्रतिशत स्थलीय क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया जा चुका है और पाँच राष्ट्रीय उद्यान आधिकारिक रूप से स्थापित हो चुके हैं।
एपेक सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ वन उत्पादों के अवैध व्यापार पर कैसे अंकुश लगाएँगी?
संयुक्त वक्तव्य में सभी सदस्य अर्थव्यवस्थाओं से वन उत्पादों के अवैध व्यापार के विरुद्ध कार्रवाई मज़बूत करने की अपील की गई है। हालाँकि, इसके लिए कोई विशिष्ट बाध्यकारी तंत्र वक्तव्य में नहीं बताया गया है और क्रियान्वयन प्रत्येक देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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