एपेक 'चीनी वर्ष' में बड़ी उपलब्धि: 180 से अधिक बैठकें, डिजिटल व वन सहयोग पर समझौते
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 31 जुलाई 2026 को नियमित प्रेस वार्ता में बताया कि एपेक (APEC) के 'चीनी वर्ष' के अंतर्गत अब तक तीन उच्च स्तरीय अधिकारियों की बैठकें, पाँच मंत्रिस्तरीय बैठकें और 180 से अधिक विभिन्न तंत्रों व क्षेत्रों की बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। इन बैठकों के ज़रिए कई प्रारंभिक उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं, जो नवंबर में होने वाले अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की नींव रखती हैं।
मुख्य घटनाक्रम
16 से 29 जुलाई 2026 के बीच एपेक डिजिटल सप्ताह के अंतर्गत श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रम सिचुआन प्रांत के चेंगदू शहर में आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विभिन्न पक्षों ने डिजिटल व स्मार्ट तकनीक के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास और उपयोग पर महत्वपूर्ण सहमतियाँ बनाईं।
इसके अतिरिक्त, एपेक वन मंत्रियों की बैठक हाल ही में शेन्ज़ेन में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न पक्षों ने वैश्विक वन संरक्षण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनाते हुए एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया।
चीन की अध्यक्षता में प्राथमिकताएँ
माओ निंग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में एपेक की अध्यक्षता कर रहा चीन, एपेक सहयोग की मूल भावना के अनुरूप खुलेपन, सृजन और सहयोग — इन तीन प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित रहकर गतिविधियाँ संचालित करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और बहुपक्षीय सहयोग की चुनौतियाँ एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए निर्णायक मोड़ पर हैं।
नवंबर शिखर सम्मेलन की तैयारी
चीन का लक्ष्य है कि नवंबर 2026 में होने वाले एपेक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन को एपेक सहयोग का एक ऐतिहासिक क्षण बनाया जाए। इसके लिए निरंतर सहमतियाँ और सामूहिक शक्तियाँ एकत्र की जा रही हैं, ताकि एपेक समुदाय निर्माण में ठोस योगदान दिया जा सके। गौरतलब है कि एपेक में 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, जो वैश्विक GDP का लगभग 60% और वैश्विक व्यापार का करीब 47% प्रतिनिधित्व करती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों के अनुसार, चेंगदू में आयोजित डिजिटल सप्ताह और शेन्ज़ेन की वन मंत्रिस्तरीय बैठक — दोनों ही यह संकेत देते हैं कि चीन इस वर्ष एपेक की अध्यक्षता के ज़रिए प्रौद्योगिकी और पर्यावरण जैसे गैर-विवादास्पद क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की छवि बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिखर सम्मेलन तक और कितनी ठोस प्रतिबद्धताएँ सामने आती हैं।