चिराग पासवान ने पटना में किया ध्वजारोहण, 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पटना स्थित पार्टी के बिहार प्रदेश कार्यालय में तिरंगा फहराया। इस मौके पर उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
शहीदों को नमन, देशवासियों को संदेश
ध्वजारोहण के बाद पासवान ने कहा कि आज के दिन सबसे पहला कर्तव्य उन स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों को याद करना है, जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने अपना सब कुछ देश को समर्पित कर दिया, उन्हें नमन करना हमारा कर्तव्य है।'
आने वाले दो दशक होंगे निर्णायक
पासवान ने कहा कि पिछले आठ दशकों में देश ने विकास की लंबी यात्रा तय की है, लेकिन आने वाले दो दशक भारत के लिए एक नए और निर्णायक पड़ाव के रूप में सामने आएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1947 में पहली बार तिरंगा लहराने से लेकर 2047 में आजादी की सौवीं वर्षगांठ तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लेना होगा। उनके अनुसार इसके लिए पिछली उपलब्धियों पर संतोष करने के बजाय भविष्य की दिशा तय करनी होगी।
युवा और महिलाएं बनेंगी विकास की धुरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के युवा और महिलाएं भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने देशवासियों से जाति, धर्म और मजहब से ऊपर उठकर समावेश की भावना के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की। उनका कहना था कि अगले पाँच, दस और पंद्रह वर्षों में भारत को किस ऊँचाई पर देखना है, यह सकारात्मक सोच ही विकास का आधार बनेगी।
मोदी की 'बड़े सपने' वाली सोच का समर्थन
पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का समर्थन किया जिसमें देश के लिए छोटे नहीं बल्कि बड़े लक्ष्य तय करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए 'आउट ऑफ बॉक्स' सोच अपनानी होगी, क्योंकि छोटी सोच से भारत जैसे विशाल देश को विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता।
अराजक ताकतों से सतर्क रहने की अपील
पासवान ने देशवासियों को सचेत करते हुए कहा कि कुछ ऐसी ताकतें हैं जो देश में अराजकता फैलाकर विकास की राह में बाधा डालना चाहती हैं। उन्होंने ऐसी प्रवृत्तियों को पहचानने और उन्हें रोकने की जरूरत पर बल दिया। अंत में उन्होंने एक बार फिर देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए विकसित और एकजुट भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।