3 अक्टूबर 2026
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जमात-ए-इस्लामी हिंद के मलिक मोआतसिम खान का चुनाव आयोग पर हमला, एसआईआर को बताया 'बोगस वर्क'

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जमात-ए-इस्लामी हिंद के मलिक मोआतसिम खान का चुनाव आयोग पर हमला, एसआईआर को बताया 'बोगस वर्क'

सारांश

जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता मलिक मोआतसिम खान ने एसआईआर को 'बोगस वर्क' बताते हुए 13 करोड़ से अधिक नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रक्रिया को तत्काल रोकने की माँग की — एसआईआर पर सियासी घमासान अब एक नए मोर्चे से और तेज़ हो गया है।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता मलिक मोआतसिम खान ने 3 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को 'बोगस वर्क' करार दिया।
खान ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत 13 करोड़ से अधिक वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
कर्नाटक में फॉर्म-7 के दुरुपयोग और युवा मतदाताओं से अनावश्यक जानकारी माँगने पर विशेष आपत्ति जताई गई।
खान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर की जाँच या पुनः प्रारंभ करने की माँग की।
एसआईआर को सर्वोच्च न्यायालय का समर्थन मिलने पर भी खान ने अफसोस जताया और संवैधानिक ढाँचे पर सवाल उठाए।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता मलिक मोआतसिम खान ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को 'बोगस वर्क' करार देते हुए इसे देशभर के मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की 'सोची-समझी साजिश' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की माँग की।

मुख्य आरोप और बयान

मलिक मोआतसिम खान ने कहा, 'एसआईआर का जो मुद्दा है, उससे ये साफ ज़ाहिर है कि ये देशभर में वोटरों को वोटिंग लिस्ट से निकालने की साजिश है। हमारा चुनाव आयोग देश के वोटरों को लिस्ट से बाहर कर रहा है। 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों को वोटिंग लिस्ट से निकाल दिया गया है।' उनके ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों में पहले से ही तीखी बहस जारी है।

कर्नाटक और फॉर्म-7 का मुद्दा

खान ने विशेष रूप से कर्नाटक का ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि वहाँ फॉर्म नंबर-7 के ज़रिए ऐसे आवेदन लिए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से वैध मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश हो रही है। दूसरी ओर, उनका यह भी कहना था कि कुछ स्थानों पर अपात्र व्यक्तियों को सूची में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने युवा मतदाताओं, विशेषकर 'जेन-जी' पीढ़ी के मामले में भी चिंता जताई और कहा कि फॉर्म-6 में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से उनके माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी माँगी जा रही है, जो अनावश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर सवाल

मलिक खान ने यह भी कहा कि अफसोस की बात है कि एसआईआर प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय ने भी समर्थन दिया। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग संवैधानिक ढाँचे के भीतर काम कर रहा है या संविधान के विरुद्ध। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के भीतर अन्य आयुक्तों का भरोसा भी दाँव पर है।

माँगें और आगे का रास्ता

खान ने तीन स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त स्वेच्छा से इस्तीफा दें या सरकार उन्हें पद से हटाए; दूसरी, एसआईआर की पूरी प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और नए सिरे से जाँच हो; तीसरी, एसआईआर के आधार पर कोई चुनाव न कराया जाए — या तो पुरानी पद्धति अपनाई जाए या एक नया पारदर्शी ढाँचा तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, 'हम देश की जनता के साथ हैं।' गौरतलब है कि एसआईआर विवाद को लेकर विपक्ष पहले ही विरोध-प्रदर्शन कर रहा है, और जमात-ए-इस्लामी हिंद का यह बयान उस राजनीतिक दबाव को और तेज़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '13 करोड़ नाम हटाए गए' का दावा स्वतंत्र सत्यापन की माँग करता है — क्योंकि यह संख्या चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़ों से मेल खाती है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। एसआईआर विवाद अब केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं रहा — धार्मिक-सामाजिक संगठनों का इसमें शामिल होना इस मुद्दे को एक व्यापक लोकतांत्रिक सरोकार की शक्ल दे रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के समर्थन के बावजूद यदि सामाजिक संस्थाएँ और विपक्ष एकजुट होकर दबाव बनाते हैं, तो चुनाव आयोग को प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सार्वजनिक जवाबदेही देनी होगी — जो अभी तक नहीं हुई है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) क्या है और इसका विवाद क्यों है?
एसआईआर चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की गहन समीक्षा और अद्यतन किया जाता है। विवाद इसलिए है क्योंकि आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है।
मलिक मोआतसिम खान ने कितने मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया?
मलिक मोआतसिम खान ने दावा किया कि एसआईआर के तहत देशभर में 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह उनका अपना दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने चुनाव आयोग से क्या माँगें रखी हैं?
संगठन ने तीन माँगें रखी हैं — मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा या पद से हटाया जाना, एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोककर उसकी स्वतंत्र जाँच, और एसआईआर के आधार पर कोई चुनाव न कराना।
कर्नाटक में फॉर्म-7 को लेकर क्या आपत्ति उठाई गई है?
मलिक खान ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में फॉर्म नंबर-7 के ज़रिए ऐसे आवेदन लिए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य वैध मतदाताओं को सूची से हटाना है। साथ ही फॉर्म-6 में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से उनके माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी माँगे जाने पर भी आपत्ति जताई गई।
सर्वोच्च न्यायालय का एसआईआर पर क्या रुख है?
मलिक मोआतसिम खान के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को समर्थन दिया है, जिस पर उन्होंने अफसोस जताया। हालाँकि उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग संवैधानिक ढाँचे के भीतर काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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