6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'क्या बोलती जनता?' अभियान: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सितंबर से राष्ट्रव्यापी जनसंवाद यात्रा का ऐलान किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'क्या बोलती जनता?' अभियान: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सितंबर से राष्ट्रव्यापी जनसंवाद यात्रा का ऐलान किया

सारांश

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सितंबर से 'क्या बोलती जनता?' अभियान का ऐलान किया — नीट विवाद के बाद पार्टी की राष्ट्रीय सक्रियता का विस्तार। निशाने पर है शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण, जहाँ पहली कक्षा की फीस ₹1–2 लाख तक पहुँच चुकी है।

मुख्य बातें

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 6 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में 'क्या बोलती जनता?' राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की।
अभियान सितंबर 2026 से शुरू होगा और महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में चलाया जाएगा।
मुख्य मुद्दा शिक्षा का व्यवसायीकरण — पहली कक्षा की वार्षिक फीस ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुँचने का आरोप।
सीजेपी ने इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर राष्ट्रीय ध्यान खींचा था।
पार्टी की विचारधारा डॉ.
अंबेडकर , महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित बताई गई।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 6 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए 'क्या बोलती जनता?' नामक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की, जो सितंबर 2026 से शुरू होगा। इस अभियान का उद्देश्य महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों की शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुँचाना है।

बैठक का संदर्भ और पृष्ठभूमि

दिपके ने यह घोषणा पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कोर कमेटी की बैठक के समापन के बाद की। उल्लेखनीय है कि सीजेपी ने इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। यह अभियान उसी सक्रियता की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

शिक्षा व्यवसायीकरण पर तीखा प्रहार

अभियान के केंद्र में देश की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ता व्यावसायीकरण और आसमान छूती फीस का मुद्दा है। दिपके ने आरोप लगाया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग के परिवारों के लिए एक असंभव सपना बन चुकी है।

उन्होंने कहा, 'शिक्षा क्षेत्र में सुधार हमारे अभियान का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा। आज देश में शिक्षा एक अत्यधिक लाभदायक व्यवसाय बन गई है। प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए वार्षिक शुल्क ₹1 लाख से ₹2 लाख तक है, साथ ही अलग से अत्यधिक चंदा भी लिया जाता है। सीमित मासिक आय वाले परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए इतना भारी खर्च कैसे वहन कर सकते हैं?'

उन्होंने उच्च शिक्षा और कोचिंग संस्थानों के नाम पर अभिभावकों के वित्तीय शोषण को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार, महंगे बैंक ऋण लेने की मजबूरी के कारण कई परिवार भारी कर्ज में डूब जाते हैं।

अभियान की कार्यनीति

'क्या बोलती जनता?' अभियान के तहत सीजेपी देश भर का दौरा कर नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित करेगी। दिपके ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य व्यापक जनमत तैयार करना और सरकार पर व्यावसायिक शिक्षा पद्धतियों तथा प्रशासनिक विफलताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने का दबाव बनाना है। उन्होंने सरकारी शिक्षण संस्थानों में सुधार पर अधिक ध्यान देने का भी आग्रह किया।

वैचारिक आधार और व्यापक दृष्टिकोण

दिपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी की विचारधारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर, महात्मा गांधी और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'हम संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ रहे हैं। हमारे लिए किसी आंदोलन की सफलता केवल किसी का इस्तीफा हासिल करना नहीं है; सच्ची सफलता आम नागरिकों के मन से सरकार का भय पूरी तरह मिटाने में निहित है।'

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच को लेकर बहस तेज़ है, और नीट विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सितंबर से शुरू होने वाले इस अभियान की दिशा और व्यापकता आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'जनसंवाद यात्रा' से ठोस नीतिगत दबाव बन सकता है। शिक्षा फीस का मुद्दा वास्तविक और व्यापक है — सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक इस पर बहस होती रही है — लेकिन इसे चुनावी ज़मीन में बदलने के लिए संगठनात्मक विस्तार और विश्वसनीय डेटा दोनों की ज़रूरत होगी। नीट विवाद ने युवा मतदाताओं में जो आक्रोश पैदा किया है, उसे भुनाने की कोशिश कई दल कर रहे हैं; सीजेपी की चुनौती यह साबित करना है कि वह सिर्फ विरोध की आवाज़ नहीं, बल्कि समाधान का मंच भी है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'क्या बोलती जनता?' अभियान क्या है?
यह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का राष्ट्रव्यापी जनसंवाद अभियान है, जो सितंबर 2026 से शुरू होगा। इसका उद्देश्य छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों की शिकायतों — विशेषकर शिक्षा की बढ़ती लागत — को सीधे प्रशासन तक पहुँचाना है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके कौन हैं?
अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक हैं, जो छत्रपति संभाजीनगर स्थित एक राजनीतिक दल है। पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी।
इस अभियान में शिक्षा का मुद्दा क्यों केंद्रीय है?
दिपके के अनुसार, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए वार्षिक फीस ₹1 लाख से ₹2 लाख तक पहुँच गई है, जो मध्यम और श्रमिक वर्ग के परिवारों की पहुँच से बाहर है। उच्च शिक्षा के लिए महंगे बैंक ऋण की मजबूरी भी परिवारों को कर्ज में धकेल रही है।
सीजेपी की वैचारिक नींव क्या है?
दिपके ने स्पष्ट किया कि पार्टी की विचारधारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है। पार्टी का लक्ष्य आम नागरिकों के मन से सरकार का भय मिटाना और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।
यह अभियान नीट विवाद से कैसे जुड़ा है?
सीजेपी ने इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था, जिससे पार्टी को राष्ट्रीय पहचान मिली। 'क्या बोलती जनता?' अभियान उसी सक्रियता का विस्तार है, जो शिक्षा प्रणाली की व्यापक खामियों को निशाना बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 11 महीने पहले