सीजेपी में कोर कमेटी विवाद: अभिजीत दिपके के घर के बाहर धरने पर बैठे युवा कार्यकर्ता, परिवारवाद का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। 6 अगस्त 2026 को पार्टी नेता अभिजीत दिपके के आवास के बाहर कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद तथा पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँग है कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े सभी 450 कोऑर्डिनेटर्स को पार्टी की कोर कमेटी में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
विवाद की जड़: कोर कमेटी की बैठक
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दिपके के करीबी और परिचित लोगों को ही आमंत्रित किया गया। उनके अनुसार जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े करीब 450 कोऑर्डिनेटर्स को इस बैठक से पूरी तरह बाहर रखा गया, जबकि ये सभी आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी अभी अपनी संगठनात्मक नींव रख रही है।
कार्यकर्ताओं की माँगें और चेतावनी
धरने पर बैठे युवाओं ने स्पष्ट किया कि जब तक आंदोलन से जुड़े सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल कर लोकतांत्रिक तरीके से फैसले नहीं लिए जाते, तब तक उनका अनशन और धरना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देर रात पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से लंबी बातचीत हुई, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट का बयान
सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'एक ग्रुप बनाया गया है और सभी इस बात से सहमत हैं कि अगर चीजें लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें, तो इससे देश का भला होगा। जब तक हम आवाज नहीं उठाते, हमारी बात सुनी नहीं जाती। आज से हम तब तक अन्न-जल त्याग रहे हैं जब तक कि लोकतांत्रिक तरीके से टीम बनाकर सभी फैसले पारदर्शी रूप से नहीं लिए जाते।'
ब्रह्मभट्ट ने आगे कहा, 'हर कोई पूछ रहा है कि फैसले सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग ही क्यों ले रहे हैं? बैठकों में अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को बिठाना और दूसरों को अंदर आने से रोकना मंजूर नहीं है। इस आंदोलन में शुरू से ही भाई-भतीजावाद और पक्षपात की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।'
राहुल गांधी की बैठक का संदर्भ
ब्रह्मभट्ट ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी ने हाल ही में आंदोलन से जुड़े पाँच प्रमुख चेहरों को बुलाया था। उनका कहना था कि यदि इन्हीं चेहरों को पार्टी की आंतरिक बैठकों में भी शामिल किया जाता और उनसे सलाह ली जाती, तो बहुत से कार्यकर्ता आहत नहीं होते। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह के एकतरफा फैसलों से आंदोलन कितने समय तक टिक पाएगा।
आगे की राह
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि वे पारदर्शी और जवाबदेह नेतृत्व चाहते हैं, ताकि भविष्य में देश को फिर से 'धोखा' न मिले। सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि पार्टी इस आंतरिक दबाव को किस तरह संभालती है और क्या कोर कमेटी के ढाँचे में बदलाव किया जाता है।