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अखिल गोगोई का सीजेपी 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन को समर्थन, विपक्षी एकजुटता की अपील

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अखिल गोगोई का सीजेपी 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन को समर्थन, विपक्षी एकजुटता की अपील

सारांश

असम के विधायक अखिल गोगोई का सत्याग्रह दसवें दिन में पहुंच गया है — और अब उन्होंने मोर्चा दोहरा कर दिया है। एक तरफ जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, दूसरी तरफ सीजेपी के 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन को 1975 के आपातकाल के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन बताते हुए विपक्ष से एकजुट होने की अपील।

मुख्य बातें

अखिल गोगोई का आपदा राहत सत्याग्रह नौ दिन पूरे कर दसवें दिन में प्रवेश कर गया है।
सोमवार से पूरे असम के जिला मुख्यालयों में बड़े पैमाने पर जुलूस और प्रदर्शन की घोषणा।
गोगोई ने सीजेपी के 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन को 1975 के आपातकाल के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन बताया।
राहुल गांधी , प्रियंका गांधी , अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव से एकजुटता की अपील।
आपदा से करीब दो लाख लोग प्रभावित, लेकिन सरकारी सर्वे में केवल 55,000 परिवार शामिल — गोगोई का आरोप।
सीजेपी के तीन नेताओं की गिरफ्तारी की कोशिश नाकाम; अदालत ने रिहा किया।

असम के रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने 11 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में घोषणा की कि आपदा प्रभावित परिवारों को प्रभावी राहत दिलाने की मांग को लेकर उनका सत्याग्रह नौ दिन पूरे कर दसवें दिन में प्रवेश कर गया है। इसके साथ ही उन्होंने सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन का समर्थन करते हुए सभी विपक्षी दलों से एकजुटता की अपील की।

सत्याग्रह और जिला स्तरीय आंदोलन की घोषणा

गोगोई ने कहा कि सोमवार से पूरे असम के जिला मुख्यालयों में बड़े पैमाने पर जुलूस और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उनका लक्ष्य राज्य सरकार पर राहत उपायों को लागू करने के लिए दबाव बनाना है। गोगोई ने आरोप लगाया कि नौ दिन के सत्याग्रह के बावजूद न तो मुख्यमंत्री और न ही मुख्य सचिव ने आंदोलनकारियों से मुलाकात की है।

सीजेपी आंदोलन को लेकर दावे

गोगोई के अनुसार, सीजेपी का 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि 1975 के आपातकाल के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद यह लोकतंत्र की रक्षा के लिए सबसे बड़ा जन आंदोलन है। उनका कहना था कि जैसा जन आंदोलन खड़ा हुआ है, वैसा पिछले कई वर्षों में कोई राजनीतिक दल व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से नहीं कर पाया।

गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि यह आंदोलन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आरएसएस की निरंकुश नीतियों के खिलाफ खड़ा हुआ है, इसलिए सभी लोकतांत्रिक संगठनों तथा राजनीतिक दलों को इसका समर्थन करना चाहिए।

विपक्षी नेताओं से एकजुटता की अपील

गोगोई ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे समानांतर आंदोलन खड़े करने की बजाय सीजेपी के आंदोलन को मजबूत करें। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल, योगेंद्र यादव और अन्य विपक्षी नेताओं से एकजुट होकर लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। गौरतलब है कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब देशभर में कई विपक्षी दल अलग-अलग मंचों से सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।

सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और रिहाई

गोगोई ने बताया कि सीजेपी के तीन नेताओं को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी, लेकिन अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। उन्होंने इसके लिए न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने यूट्यूबर एवं सोशल इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी की रिहाई का भी स्वागत किया।

आपदा राहत और सरकार पर आरोप

19 जुलाई को आई आपदा के संदर्भ में गोगोई ने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि जल संसाधन विभाग से जुड़े मामलों और कथित अवैध कोयला खनन गतिविधियों के कारण तीन जिलों में गंभीर स्थिति पैदा हुई, और उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग दोहराई।

रायजोर दल के विधायक के अनुसार, आपदा से करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए थे, लेकिन सरकारी सर्वेक्षण में केवल 55,000 परिवारों को ही शामिल किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित एकमुश्त आर्थिक सहायता और अतिरिक्त राहत राशि अब तक प्रभावित लोगों तक नहीं पहुंची है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में आपदा राहत की प्रक्रिया को लेकर सवाल पहले से उठ रहे हैं।

आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय स्तर पर होने वाले प्रदर्शनों से राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्विरोध भी है। जब कोई विधायक एक गैर-राजनीतिक नागरिक संगठन के आंदोलन को राजनीतिक मंच देता है, तो उस आंदोलन की स्वायत्त साख दांव पर लगती है। दूसरा सवाल यह है कि 55,000 बनाम दो लाख प्रभावितों का आंकड़ा — यदि सही है — तो यह राज्य की आपदा सर्वेक्षण प्रणाली की गंभीर खामी उजागर करता है, जिसे मुख्यधारा की राजनीतिक बहस में उतना स्थान नहीं मिल रहा जितना मिलना चाहिए। सत्याग्रह के नौ दिन बाद भी सरकार की चुप्पी एक राजनीतिक संदेश है, और जिला-स्तरीय प्रदर्शनों से यह देखना होगा कि ज़मीनी समर्थन दावों से मेल खाता है या नहीं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल गोगोई का सत्याग्रह किस मांग को लेकर है?
रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई असम में आपदा प्रभावित परिवारों को प्रभावी राहत और पुनर्वास दिलाने की मांग को लेकर सत्याग्रह पर हैं। उनका आरोप है कि सरकारी सर्वेक्षण में केवल 55,000 परिवारों को शामिल किया गया, जबकि आपदा से करीब दो लाख लोग प्रभावित हुए थे।
सीजेपी का 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन क्या है?
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) का 'सेव डेमोक्रेसी' आंदोलन देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा एक नागरिक अभियान है। अखिल गोगोई ने इसे 1975 के आपातकाल विरोधी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन बताया है।
गोगोई ने किन विपक्षी नेताओं से एकजुटता की अपील की?
गोगोई ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, योगेंद्र यादव और अन्य विपक्षी नेताओं से सीजेपी आंदोलन के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने समानांतर आंदोलन खड़े करने की बजाय इस आंदोलन को मजबूत करने का आग्रह किया।
असम में 19 जुलाई की आपदा को लेकर गोगोई के क्या आरोप हैं?
गोगोई ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग से जुड़े मामलों और कथित अवैध कोयला खनन गतिविधियों के कारण तीन जिलों में गंभीर स्थिति पैदा हुई। उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग दोहराई है।
सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी है?
गोगोई के अनुसार, सीजेपी के तीन नेताओं को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी, लेकिन अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए यूट्यूबर ध्रुव राठी की रिहाई का भी स्वागत किया।
राष्ट्र प्रेस
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