असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई का 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान, ₹15,000 सहायता न मिलने पर सरकार घिरी
सारांश
मुख्य बातें
रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर 2026 से असम में अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। उन्होंने असम सरकार पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता वितरित करने की 1 अक्टूबर की समय-सीमा पूरी न करने का आरोप लगाया है। गोगोई के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ पीड़ितों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी वादा की गई राहत से वंचित है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
23 सितंबर 2026 को गुवाहाटी के चाचल धरना मैदान में एक जनसभा के दौरान रायजोर दल ने सरकार को 1 अक्टूबर तक बाढ़ राहत वितरित करने की अंतिम चेतावनी दी थी। उस सभा में प्रदर्शनकारियों ने तत्काल अंतरिम सहायता के साथ-साथ भारी नुकसान झेलने वाले परिवारों के लिए दीर्घकालिक मुआवजे की माँग उठाई थी। गोगोई का कहना है कि सरकार ने वह समय-सीमा पार कर ली, लेकिन राहत का काम अधूरा रहा।
राहत में क्या चूका सरकार से
गोगोई के दावे के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट में बाढ़ प्रभावित 30 से 40 प्रतिशत परिवारों को सरकार द्वारा घोषित ₹15,000 की अंतरिम सहायता अभी तक नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसागर और चराइदेव के बुरी तरह प्रभावित इलाकों के लिए घोषित ₹10,000 की विशेष अतिरिक्त सहायता भी वितरित नहीं की गई। रायजोर दल इन चारों जिलों में भारी क्षति झेलने वाले प्रत्येक परिवार के लिए ₹10 लाख के मुआवजे की माँग कर रहा है।
मुख्यमंत्री को पत्र
गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक पत्र लिखकर बाढ़ प्रभावित परिवारों की बनी हुई मुश्किलों का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पत्र में उन परिवारों की दुर्दशा का उल्लेख है जो अभी भी बेघर हैं और जिन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली है। गौरतलब है कि असम सरकार ने गोगोई के इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आंदोलन की प्रकृति और माँगें
गोगोई ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन गांधी जयंती — 2 अक्टूबर — से लोकतांत्रिक तरीके से शुरू होगा और तब तक जारी रहेगा जब तक बाढ़ पीड़ितों की सभी माँगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने कहा, “सरकार की समय-सीमा खत्म हो चुकी है और बाढ़ पीड़ितों में से लगभग आधे लोग अभी भी खाली हाथ हैं।” रायजोर दल की माँग है कि पात्र सभी परिवारों को वादा की गई राहत मिले — उसके बाद ही यह आंदोलन वापस लिया जाएगा।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब असम में बाढ़ प्रबंधन, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। असम हर वर्ष भीषण बाढ़ की चपेट में आता है, और राहत वितरण में देरी एक आवर्ती विवाद का विषय बनी रहती है। यह आंदोलन असम में विपक्षी दलों द्वारा सरकार की बाढ़ राहत नीतियों पर दबाव बनाने की एक और कड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार गोगोई के आरोपों और आंदोलन की घोषणा पर क्या रुख अपनाती है।