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असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई का 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान, ₹15,000 सहायता न मिलने पर सरकार घिरी

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असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई का 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान, ₹15,000 सहायता न मिलने पर सरकार घिरी

सारांश

गांधी जयंती पर अखिल गोगोई ने असम सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है — 4 जिलों के 30-40% बाढ़ पीड़ित अभी भी ₹15,000 की वादा की गई सहायता से वंचित हैं और सरकार की खुद तय की गई समय-सीमा बीत चुकी है।

मुख्य बातें

रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) से असम में अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया।
शिवसागर , चराइदेव , जोरहाट और गोलाघाट में बाढ़ पीड़ितों के 30 से 40 प्रतिशत परिवारों को ₹15,000 की अंतरिम सहायता अभी तक नहीं मिली।
गोगोई के अनुसार शिवसागर और चराइदेव में ₹10,000 की विशेष अतिरिक्त सहायता भी बकाया है।
रायजोर दल भारी नुकसान झेलने वाले प्रत्येक परिवार के लिए ₹10 लाख के मुआवजे की माँग कर रहा है।
गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को पत्र लिखा; असम सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर 2026 से असम में अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। उन्होंने असम सरकार पर बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता वितरित करने की 1 अक्टूबर की समय-सीमा पूरी न करने का आरोप लगाया है। गोगोई के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में बाढ़ पीड़ितों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी वादा की गई राहत से वंचित है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

23 सितंबर 2026 को गुवाहाटी के चाचल धरना मैदान में एक जनसभा के दौरान रायजोर दल ने सरकार को 1 अक्टूबर तक बाढ़ राहत वितरित करने की अंतिम चेतावनी दी थी। उस सभा में प्रदर्शनकारियों ने तत्काल अंतरिम सहायता के साथ-साथ भारी नुकसान झेलने वाले परिवारों के लिए दीर्घकालिक मुआवजे की माँग उठाई थी। गोगोई का कहना है कि सरकार ने वह समय-सीमा पार कर ली, लेकिन राहत का काम अधूरा रहा।

राहत में क्या चूका सरकार से

गोगोई के दावे के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट में बाढ़ प्रभावित 30 से 40 प्रतिशत परिवारों को सरकार द्वारा घोषित ₹15,000 की अंतरिम सहायता अभी तक नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसागर और चराइदेव के बुरी तरह प्रभावित इलाकों के लिए घोषित ₹10,000 की विशेष अतिरिक्त सहायता भी वितरित नहीं की गई। रायजोर दल इन चारों जिलों में भारी क्षति झेलने वाले प्रत्येक परिवार के लिए ₹10 लाख के मुआवजे की माँग कर रहा है।

मुख्यमंत्री को पत्र

गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक पत्र लिखकर बाढ़ प्रभावित परिवारों की बनी हुई मुश्किलों का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पत्र में उन परिवारों की दुर्दशा का उल्लेख है जो अभी भी बेघर हैं और जिन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली है। गौरतलब है कि असम सरकार ने गोगोई के इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आंदोलन की प्रकृति और माँगें

गोगोई ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन गांधी जयंती — 2 अक्टूबर — से लोकतांत्रिक तरीके से शुरू होगा और तब तक जारी रहेगा जब तक बाढ़ पीड़ितों की सभी माँगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने कहा, “सरकार की समय-सीमा खत्म हो चुकी है और बाढ़ पीड़ितों में से लगभग आधे लोग अभी भी खाली हाथ हैं।” रायजोर दल की माँग है कि पात्र सभी परिवारों को वादा की गई राहत मिले — उसके बाद ही यह आंदोलन वापस लिया जाएगा।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब असम में बाढ़ प्रबंधन, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। असम हर वर्ष भीषण बाढ़ की चपेट में आता है, और राहत वितरण में देरी एक आवर्ती विवाद का विषय बनी रहती है। यह आंदोलन असम में विपक्षी दलों द्वारा सरकार की बाढ़ राहत नीतियों पर दबाव बनाने की एक और कड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार गोगोई के आरोपों और आंदोलन की घोषणा पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमल धीमा रहता है। सरकार ने खुद 1 अक्टूबर की समय-सीमा तय की थी, और उसी का उल्लंघन अब विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया है। यह वह क्षण है जब प्रशासनिक विफलता सीधे राजनीतिक संकट में बदलती है। मुख्यमंत्री सरमा की चुप्पी — कम से कम इस रिपोर्टिंग तक — खुद एक संकेत है कि सरकार के पास फिलहाल कोई ठोस जवाब नहीं है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल गोगोई का असम में अनिश्चितकालीन आंदोलन क्यों शुरू हो रहा है?
रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने असम सरकार पर बाढ़ राहत वितरण की 1 अक्टूबर 2026 की खुद तय की गई समय-सीमा पूरी न करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार 4 जिलों में बाढ़ पीड़ितों के 30-40% परिवारों को अभी तक ₹15,000 की अंतरिम सहायता नहीं मिली, इसलिए 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया जा रहा है।
रायजोर दल की बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या माँगें हैं?
रायजोर दल तीन प्रमुख माँगें कर रहा है — पहली, सभी पात्र परिवारों को ₹15,000 की वादा की गई अंतरिम सहायता तत्काल दी जाए; दूसरी, शिवसागर और चराइदेव में बकाया ₹10,000 की विशेष सहायता मिले; तीसरी, चारों जिलों में भारी नुकसान झेलने वाले प्रत्येक परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा दिया जाए।
यह आंदोलन किन जिलों के बाढ़ पीड़ितों की बात कर रहा है?
यह आंदोलन मुख्य रूप से असम के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के बाढ़ प्रभावित परिवारों के हक में है। गोगोई के दावे के अनुसार इन चारों जिलों में 30 से 40 प्रतिशत पात्र परिवारों को सरकारी सहायता अभी तक नहीं मिली है।
असम सरकार ने गोगोई के आरोपों पर क्या कहा?
1 अक्टूबर 2026 तक असम सरकार ने रायजोर दल के इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को गोगोई का पत्र मिला है, लेकिन सरकारी पक्ष से बकाया भुगतान या दावों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
2 अक्टूबर को ही आंदोलन शुरू करने का क्या महत्व है?
गोगोई ने जानबूझकर गांधी जयंती — 2 अक्टूबर — को आंदोलन की शुरुआत के लिए चुना है, जो शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध की प्रतीकात्मक तारीख है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा और माँगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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