असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई ने 13 दिन बाद वापस लिया सत्याग्रह, मंत्रियों से हुई बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
रायजोर दल के प्रमुख और असम विधायक अखिल गोगोई ने 15 अक्टूबर 2026 को अपना अनिश्चितकालीन सत्याग्रह समाप्त कर दिया। राज्य सरकार के मंत्रियों पीयूष हजारिका और केशव महंत द्वारा विरोध स्थल का दौरा किए जाने और बातचीत के बाद गोगोई ने यह फैसला लिया। वे 2 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त राहत और मुआवजे की माँग को लेकर 2 अक्टूबर से आंदोलन पर थे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
गोगोई ने गांधी जयंती, 2 अक्टूबर को यह सत्याग्रह शुरू किया था। उनकी प्रमुख माँग थी कि असम में बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को पूर्ण मुआवजा दिया जाए और राहत वितरण में पारदर्शिता बरती जाए। रायजोर दल नेता का स्पष्ट कहना था कि जब तक सरकार 2 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ठोस आश्वासन नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा।
आँकड़ों का विवाद
इस पूरे विवाद के केंद्र में प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर सरकार और गोगोई के बीच गहरा मतभेद था। गोगोई के अनुसार सरकारी सर्वे में केवल 55,000 परिवारों को प्रभावित माना गया, जबकि उनका दावा था कि वास्तविक संख्या 2 लाख से अधिक है। उन्होंने सरकारी आँकड़ों को गुमराह करने वाला बताते हुए कहा, "सरकार का कहना है कि केवल 55,000 परिवार प्रभावित हुए हैं, जबकि असल संख्या दो लाख से ज्यादा है। यह आंकड़ा गुमराह करने वाला है।"
गोगोई ने नुकसान के आकलन की पद्धति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी गणना तबाही के असली पैमाने को नहीं दर्शाती। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर साल बाढ़ से भारी नुकसान उठाता है और राहत वितरण में विसंगतियाँ एक बारंबार उठने वाला मुद्दा रहा है।
केंद्रीय सहायता और मंत्रियों पर आरोप
गोगोई ने केंद्र सरकार द्वारा असम के लिए घोषित ₹1,200 करोड़ की राशि को बाढ़ से हुई क्षति की तुलना में नाकाफी बताया। उनका यह भी आरोप था कि राज्य सरकार केंद्र को आपदा की गंभीरता के बारे में पर्याप्त रूप से नहीं बता सकी। उन्होंने मंत्रियों सुशांत बोरगोहेन, मयूर बोरगोहेन और धर्मेश्वर कोंवर की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने स्थिति को ठीक से नहीं सँभाला। इसके अलावा, गोगोई ने दावा किया कि ओएनजीसी द्वारा दिए गए ₹20 करोड़ मुख्यमंत्री राहत कोष से अब तक जारी नहीं किए गए हैं।
बातचीत और आंदोलन की वापसी
मंत्री पीयूष हजारिका और केशव महंत ने विरोध स्थल पर पहुँचकर गोगोई से मुलाकात की। इस बैठक के बाद गोगोई ने सत्याग्रह वापस लेने की घोषणा की। हालाँकि, बातचीत में क्या ठोस आश्वासन दिए गए, इसका विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। गोगोई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनौती दी थी कि वह भी बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए एक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करे और वादा किया था कि वे ऐसे किसी कदम का समर्थन करेंगे।
आगे की राह
आंदोलन की वापसी के बावजूद बाढ़ राहत की माँगें अनसुलझी बनी हुई हैं। मुआवजे के क्रियान्वयन और प्रभावित परिवारों की सटीक पहचान का मुद्दा अभी भी विवाद के केंद्र में है। गौरतलब है कि असम में बाढ़ राहत की राजनीति हर वर्ष चुनावी और सामाजिक आंदोलनों को नई धार देती है — इस बार भी देखना होगा कि सरकार के आश्वासन ज़मीन पर कितने उतरते हैं।