15 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई ने 13 दिन बाद वापस लिया सत्याग्रह, मंत्रियों से हुई बातचीत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम बाढ़ राहत: अखिल गोगोई ने 13 दिन बाद वापस लिया सत्याग्रह, मंत्रियों से हुई बातचीत

सारांश

असम विधायक अखिल गोगोई का 13 दिवसीय सत्याग्रह मंत्रियों की दखलअंदाजी के बाद समाप्त हुआ — लेकिन 2 लाख बाढ़ पीड़ित परिवारों की माँग और सरकारी आँकड़ों का विवाद अभी भी जारी है। ₹1,200 करोड़ की केंद्रीय सहायता को नाकाफी बताने वाले गोगोई का आंदोलन खत्म हुआ, असली जंग अभी बाकी है।

मुख्य बातें

अखिल गोगोई ने 15 अक्टूबर 2026 को 13 दिन बाद अपना अनिश्चितकालीन सत्याग्रह वापस लिया।
मंत्रियों पीयूष हजारिका और केशव महंत के विरोध स्थल दौरे व बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
गोगोई ने 2 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए पूर्ण मुआवजे की माँग की थी, जबकि सरकारी सर्वे में केवल 55,000 परिवार प्रभावित बताए गए।
केंद्र द्वारा घोषित ₹1,200 करोड़ की सहायता राशि को गोगोई ने अपर्याप्त बताया।
ओएनजीसी के ₹20 करोड़ मुख्यमंत्री राहत कोष से जारी न होने का भी आरोप लगाया गया।
बातचीत में दिए गए आश्वासनों का ब्यौरा तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया; माँगें अभी भी अनसुलझी।

रायजोर दल के प्रमुख और असम विधायक अखिल गोगोई ने 15 अक्टूबर 2026 को अपना अनिश्चितकालीन सत्याग्रह समाप्त कर दिया। राज्य सरकार के मंत्रियों पीयूष हजारिका और केशव महंत द्वारा विरोध स्थल का दौरा किए जाने और बातचीत के बाद गोगोई ने यह फैसला लिया। वे 2 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त राहत और मुआवजे की माँग को लेकर 2 अक्टूबर से आंदोलन पर थे।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गोगोई ने गांधी जयंती, 2 अक्टूबर को यह सत्याग्रह शुरू किया था। उनकी प्रमुख माँग थी कि असम में बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को पूर्ण मुआवजा दिया जाए और राहत वितरण में पारदर्शिता बरती जाए। रायजोर दल नेता का स्पष्ट कहना था कि जब तक सरकार 2 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ठोस आश्वासन नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा।

आँकड़ों का विवाद

इस पूरे विवाद के केंद्र में प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर सरकार और गोगोई के बीच गहरा मतभेद था। गोगोई के अनुसार सरकारी सर्वे में केवल 55,000 परिवारों को प्रभावित माना गया, जबकि उनका दावा था कि वास्तविक संख्या 2 लाख से अधिक है। उन्होंने सरकारी आँकड़ों को गुमराह करने वाला बताते हुए कहा, "सरकार का कहना है कि केवल 55,000 परिवार प्रभावित हुए हैं, जबकि असल संख्या दो लाख से ज्यादा है। यह आंकड़ा गुमराह करने वाला है।"

गोगोई ने नुकसान के आकलन की पद्धति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी गणना तबाही के असली पैमाने को नहीं दर्शाती। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर साल बाढ़ से भारी नुकसान उठाता है और राहत वितरण में विसंगतियाँ एक बारंबार उठने वाला मुद्दा रहा है।

केंद्रीय सहायता और मंत्रियों पर आरोप

गोगोई ने केंद्र सरकार द्वारा असम के लिए घोषित ₹1,200 करोड़ की राशि को बाढ़ से हुई क्षति की तुलना में नाकाफी बताया। उनका यह भी आरोप था कि राज्य सरकार केंद्र को आपदा की गंभीरता के बारे में पर्याप्त रूप से नहीं बता सकी। उन्होंने मंत्रियों सुशांत बोरगोहेन, मयूर बोरगोहेन और धर्मेश्वर कोंवर की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने स्थिति को ठीक से नहीं सँभाला। इसके अलावा, गोगोई ने दावा किया कि ओएनजीसी द्वारा दिए गए ₹20 करोड़ मुख्यमंत्री राहत कोष से अब तक जारी नहीं किए गए हैं।

बातचीत और आंदोलन की वापसी

मंत्री पीयूष हजारिका और केशव महंत ने विरोध स्थल पर पहुँचकर गोगोई से मुलाकात की। इस बैठक के बाद गोगोई ने सत्याग्रह वापस लेने की घोषणा की। हालाँकि, बातचीत में क्या ठोस आश्वासन दिए गए, इसका विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। गोगोई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनौती दी थी कि वह भी बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए एक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करे और वादा किया था कि वे ऐसे किसी कदम का समर्थन करेंगे।

आगे की राह

आंदोलन की वापसी के बावजूद बाढ़ राहत की माँगें अनसुलझी बनी हुई हैं। मुआवजे के क्रियान्वयन और प्रभावित परिवारों की सटीक पहचान का मुद्दा अभी भी विवाद के केंद्र में है। गौरतलब है कि असम में बाढ़ राहत की राजनीति हर वर्ष चुनावी और सामाजिक आंदोलनों को नई धार देती है — इस बार भी देखना होगा कि सरकार के आश्वासन ज़मीन पर कितने उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट नहीं। असम में बाढ़ राहत के आँकड़ों में हेरफेर का आरोप नया नहीं — हर साल सरकारी और ज़मीनी अनुमानों के बीच यही खाई दिखती है। ₹1,200 करोड़ की केंद्रीय सहायता और 2 लाख से अधिक दावेदार परिवारों के बीच जो गणित है, वह राहत की सीमाएँ खुद बयान करता है। असली कसौटी यह होगी कि आने वाले हफ्तों में मुआवजे का वितरण किस हद तक होता है — वरना यह आंदोलन अगले बाढ़ सीज़न में और बड़ा रूप लेगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिल गोगोई ने सत्याग्रह क्यों शुरू किया था?
अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के दिन अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया था। उनकी माँग थी कि असम में बाढ़ से प्रभावित 2 लाख से अधिक परिवारों को पूर्ण मुआवजा दिया जाए और राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सरकार और गोगोई के बीच बाढ़ पीड़ितों की संख्या को लेकर क्या विवाद था?
सरकारी सर्वे में केवल 55,000 परिवारों को बाढ़ प्रभावित माना गया, जबकि गोगोई का दावा था कि 2 लाख से अधिक परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने आकलन की पद्धति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी आँकड़े तबाही के असली पैमाने को नहीं दर्शाते।
आंदोलन वापस लेने का फैसला किसके हस्तक्षेप के बाद हुआ?
राज्य सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका और केशव महंत ने विरोध स्थल का दौरा किया और गोगोई से बातचीत की। इस बैठक के बाद गोगोई ने सत्याग्रह वापस लेने का निर्णय लिया, हालाँकि बातचीत में दिए गए ठोस आश्वासनों का विवरण तत्काल सामने नहीं आया।
असम के लिए केंद्र की ₹1,200 करोड़ की सहायता पर गोगोई का क्या कहना था?
गोगोई ने केंद्र सरकार द्वारा असम के लिए घोषित ₹1,200 करोड़ की राशि को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी बताया। उनका यह भी आरोप था कि राज्य सरकार केंद्र को आपदा की गंभीरता के बारे में पर्याप्त रूप से नहीं समझा सकी।
क्या ओएनजीसी की राशि बाढ़ पीड़ितों तक पहुँची?
गोगोई ने दावा किया कि ओएनजीसी द्वारा दिए गए ₹20 करोड़ मुख्यमंत्री राहत कोष से अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। यह राशि बाढ़ राहत के लिए आवंटित बताई गई थी, लेकिन वितरण की पुष्टि नहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले