शिक्षा क्रांति: CM भगवंत मान के फिनलैंड दौरे से 300 पंजाबी शिक्षकों को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण
सारांश
Key Takeaways
- पंजाब सरकार और फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी के बीच शैक्षणिक साझेदारी से राज्य के स्कूलों में सकारात्मक बदलाव शुरू हुआ है।
- CM भगवंत सिंह मान ने फिनलैंड के कुकुलो-मोइकोइनेन अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन सेंटर का दौरा कर वहां की शिक्षण पद्धतियों का अध्ययन किया।
- 'ट्रेन-द-ट्रेनर' मॉडल के तहत SCERT और पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लगभग 300 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- प्रशिक्षण सत्र चंडीगढ़, टुर्कू और राउमा में आयोजित किए जा रहे हैं — मई 2026 तक चार चरणों में कार्यक्रम पूरा होगा।
- पारंपरिक रट्टा-आधारित शिक्षा की जगह अब आनंदमय, सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक शिक्षण पद्धति अपनाई जा रही है।
- सरकार 'मास्टर ट्रेनर्स' और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इस मॉडल को राज्य के हर कोने तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
चंडीगढ़, 23 अप्रैल — पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के फिनलैंड दौरे ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की नींव रख दी है। पंजाब सरकार और फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी के बीच हुई शैक्षणिक साझेदारी के अंतर्गत 'ट्रेन-द-ट्रेनर' मॉडल से लगभग 300 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसका सीधा लाभ राज्य के लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा।
फिनलैंड दौरे में क्या देखा CM मान ने?
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने फिनलैंड दौरे के दौरान टुर्कू स्थित प्रसिद्ध कुकुलो-मोइकोइनेन अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन एंड केयर सेंटर का भ्रमण किया। उन्होंने वहां की शिक्षण पद्धतियों, कक्षा प्रबंधन और बाल-केंद्रित शिक्षा के तरीकों का गहन अध्ययन किया।
सीएम मान ने कहा कि इस वैश्विक साझेदारी के माध्यम से फिनलैंड की विश्वस्तरीय शिक्षण तकनीकों को अब पंजाब के सरकारी स्कूलों के क्लासरूम तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे शिक्षा प्रणाली अधिक प्रभावी, आधुनिक और छात्र-केंद्रित बन रही है।
ट्रेन-द-ट्रेनर मॉडल: कैसे काम करता है यह कार्यक्रम?
इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग और स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के सहयोग से 'ट्रेन-द-ट्रेनर' मॉडल लागू किया गया है। इस मॉडल में पहले चुनिंदा शिक्षकों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जाता है, जो आगे जाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करते हैं।
प्रशिक्षण सत्र चंडीगढ़ के साथ-साथ फिनलैंड के टुर्कू और राउमा शहरों में भी आयोजित किए गए हैं। इन सत्रों में शिक्षकों को कार्यशालाओं, स्कूल विजिट और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के जरिए आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है।
मई 2026 तक चार चरणों में लगभग 300 शिक्षक यह प्रशिक्षण पूरा कर लेंगे। इससे पंजाब भर के लाखों विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलने की उम्मीद है।
रट्टा प्रणाली से मुक्ति — नई शिक्षण पद्धति का असर
CM मान ने जोर देते हुए कहा कि पारंपरिक रट्टा-आधारित शिक्षा प्रणाली से हटकर अब बच्चों को आनंदमय, सहभागितापूर्ण और व्यावहारिक तरीके से पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह बदलाव सीखने के माहौल को अधिक रोचक और जीवंत बना रहा है।
उन्होंने बताया कि अब शिक्षकों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम को अनुकूलित करने में सक्षम हो रहे हैं। इस पहल की विशेषता यह है कि विदेशी शिक्षा मॉडल को सीधे लागू करने के बजाय उसे स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप ढाला जा रहा है।
मास्टर ट्रेनर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म: भविष्य की योजना
पंजाब सरकार इस कार्यक्रम को और विस्तृत करने के लिए 'मास्टर ट्रेनर्स' तैयार करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसका उद्देश्य राज्य के हर कोने तक नई शिक्षण पद्धतियों को पहुंचाना है।
इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म और मिश्रित प्रशिक्षण मॉडल (Blended Learning) भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि शिक्षकों का निरंतर पेशेवर विकास सुनिश्चित हो सके। यह दीर्घकालिक संस्थागत सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है।
गौरतलब है कि फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है — PISA (Programme for International Student Assessment) रैंकिंग में फिनलैंड लगातार शीर्ष स्थानों पर रहता है। ऐसे में पंजाब का यह प्रयास भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
CM भगवंत सिंह मान ने विश्वास जताया कि यह साझेदारी पंजाब के शिक्षा सुधारों की मजबूत नींव साबित होगी और राज्य के विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। मई 2026 तक कार्यक्रम के पूरा होने के बाद इसके व्यापक परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा।