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एसआईआर पर विपक्ष के रुख को CM योगी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए हानिकारक

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एसआईआर पर विपक्ष के रुख को CM योगी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए हानिकारक

सारांश

CM योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर विवाद पर विपक्ष को आईना दिखाया — संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतंत्र की नींव को कमज़ोर करता है। ईवीएम से लेकर न्यायपालिका और बालाकोट तक, उन्होंने विपक्ष के रवैये को राजनीति से प्रेरित बताते हुए माफ़ी की माँग की।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में प्रेस वार्ता में विपक्ष पर एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
योगी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सवाल उठाने को गैर-ज़िम्मेदाराना बताया और विपक्षी दलों से जनता से माफ़ी माँगने की अपील की।
उन्होंने कांग्रेस पर ईवीएम , न्यायपालिका और बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाने का इतिहास गिनाया।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को जनता ने कई मौकों पर नकारा है — इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया पर संदेह करना अनुचित बताया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से आग्रह किया कि एसआईआर पर तथ्यों के आधार पर बात रखें, भ्रम न फैलाएँ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री का मुख्य बयान

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एसआईआर को लेकर विपक्ष जिस प्रकार का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, वह 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सवाल उठाए जाने को भी गैर-ज़िम्मेदाराना करार दिया और कहा कि विपक्षी दलों को इस प्रकार की बयानबाज़ी के लिए जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए। योगी के अनुसार, भारत की चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसे लेकर अनावश्यक भ्रम पैदा करना उचित नहीं है।

विपक्ष पर संस्थागत अविश्वास फैलाने का आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी किसी संवैधानिक संस्था या चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते हैं, तो उसका असर किसी एक दल या एक चुनाव तक सीमित नहीं रहता — बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह रवैया नया नहीं है — चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाने से लेकर संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करने तक, ऐसे प्रयास लगातार होते रहे हैं।

योगी ने कहा कि जनता ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को कई बार नकारा है, इसके बावजूद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

राहुल गांधी और बालाकोट एयर स्ट्राइक का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूर्व में बालाकोट एयर स्ट्राइक को लेकर भी सवाल उठाए थे, जिसे उन्होंने देश की सेना के मनोबल और सम्मान से जोड़ते हुए विपक्ष के रवैये की आलोचना की।

लोकतांत्रिक जिम्मेदारी पर योगी का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ हैं। विपक्ष को अपनी राजनीतिक भूमिका निभाने के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी चुनावी प्रक्रिया को मज़बूत बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

योगी ने विपक्ष से अपील की कि वह एसआईआर जैसे विषयों पर जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखे। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दल निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें 'संस्था-विरोधी' क़रार देकर बहस की दिशा बदल दो। एसआईआर को लेकर विपक्ष की वैध प्रक्रियागत आपत्तियों को देशद्रोही रंग देना, असल मुद्दे — यानी मतदाता सूची की सटीकता — को हाशिये पर धकेल देता है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज चूक जाती है वह यह है कि ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाना सत्ता-पक्ष की आलोचना नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है — और इसे 'माफ़ी योग्य' बताना स्वयं उस संवैधानिक भावना के प्रतिकूल है जिसकी दुहाई दी जा रही है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की जाँच और अद्यतन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जिसे CM योगी ने दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है।
CM योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से माफ़ी की माँग क्यों की?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सवाल उठाकर गैर-ज़िम्मेदाराना बयानबाज़ी की है, जो संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के विरुद्ध है। उनके अनुसार ऐसे बयानों से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता के विश्वास को नुकसान पहुँचता है, इसलिए विपक्ष को जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए।
CM योगी ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का ज़िक्र एसआईआर विवाद में क्यों किया?
योगी आदित्यनाथ ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का उल्लेख यह दर्शाने के लिए किया कि कांग्रेस का संवैधानिक और राष्ट्रीय संस्थाओं पर सवाल उठाने का इतिहास पुराना है। उन्होंने इसे सेना के मनोबल से जोड़ते हुए विपक्ष के रवैये को व्यापक रूप से राजनीति से प्रेरित बताया।
CM योगी के अनुसार संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से क्या नुकसान होता है?
योगी के अनुसार, जब किसी संवैधानिक संस्था या चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते हैं तो उसका असर केवल किसी एक दल या चुनाव तक सीमित नहीं रहता। इससे पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और आम नागरिकों में संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ता है।
CM योगी ने विपक्ष से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष से अपील की कि वह एसआईआर जैसे विषयों पर जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखे। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनावी प्रक्रिया को मज़बूत बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
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