पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रमोशन पर CMO की मंजूरी अनिवार्य, नया नोटिफिकेशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 अगस्त 2026 को एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि पे-बैंड-5 (₹37,400 से ₹60,000) और ₹8,900 के ग्रेड-पे वाले वरिष्ठ राज्य सरकारी अधिकारियों के प्रमोशन प्रस्तावों को अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व स्वीकृति के बिना अंतिम रूप नहीं दिया जा सकेगा। यह निर्देश राज्य के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी किए गए नए नोटिफिकेशन के माध्यम से लागू किया गया है।
नोटिफिकेशन में क्या है
कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार, पश्चिम बंगाल सेवा (वेतन और भत्ते में संशोधन) नियम के तहत निर्धारित पे-मैट्रिक्स के अनुरूप, पे-बैंड-5 में आने वाले अधिकारियों के प्रमोशन की फाइलें अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएंगी। CMO की लिखित सहमति प्राप्त होने के बाद ही प्रमोशन आदेश जारी किए जा सकेंगे। नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढील स्वीकार्य नहीं होगी।
पुराने आदेशों की याद दिलाई गई
गौरतलब है कि यह निर्देश पूरी तरह नया नहीं है। इसी विभाग ने इससे पहले 7 जुलाई 2014 और 7 फरवरी 2020 को भी इसी आशय के नोटिफिकेशन जारी किए थे। नए आदेश में सभी संबंधित विभागों को उन पुराने नोटिफिकेशनों की याद दिलाई गई है और निर्देश दिया गया है कि गाइडलाइंस का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य प्रशासन में प्रमोशन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस चल रही है।
सात दिनों में सूची देने का निर्देश
प्रमोशन नियमों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विभाग ने राज्य सरकार के सभी विभागों से अगले सात दिनों के भीतर उन अधिकारियों की विस्तृत सूची माँगी है जो पे-बैंड-5 में आते हैं और प्रमोशन के योग्य हैं। संबंधित विभागों के सचिवों, प्रधान सचिवों और अतिरिक्त मुख्य सचिवों से यह भी जानकारी माँगी गई है कि संबंधित अधिकारियों को अंतिम बार प्रमोशन कब दिया गया था और क्या वह CMO की सहमति से दिया गया था।
आम जनता और प्रशासन पर असर
इस नए आदेश का सीधा असर राज्य सरकार के उन वरिष्ठ नौकरशाहों पर पड़ेगा जो उच्च पे-बैंड में प्रमोशन की प्रतीक्षा में हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, CMO-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया एक ओर जहाँ केंद्रीकृत नियंत्रण को बढ़ाती है, वहीं दूसरी ओर प्रमोशन में लगने वाले समय को भी प्रभावित कर सकती है। यह कदम राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक ढाँचे में मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका को और केंद्रीय बनाता है।
आगे क्या होगा
सभी विभागों से योग्य अधिकारियों की सूची प्राप्त होने के बाद CMO उनकी समीक्षा करेगा। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अनुमोदन में लगने वाले समय को कितना सुव्यवस्थित किया जाता है, ताकि प्रशासनिक कार्यकुशलता बाधित न हो।