कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाला
सारांश
Key Takeaways
- मनोज विश्वास ने वोट न देने का निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया।
- राजद ने उम्मीदवार तय करने से पहले चर्चा नहीं की।
- जातीय राजनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
- प्रांत अध्यक्ष ने निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी थी।
- राजनीतिक अनुभव के बिना एक व्यवसायी को उम्मीदवार बनाया गया।
पटना, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के विद्रोही रुख ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने वोट न डालने के अपने निर्णय पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर उठाया है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मनोज विश्वास ने कहा, "हमने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर चुनाव में भाग न लेने का निर्णय लिया। राजद ने उम्मीदवार तय करने से पहले हमारे नेतृत्व से कोई चर्चा नहीं की। जो उम्मीदवार नामित किया गया, वह हमारी विचारधारा के अनुरूप नहीं था।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पूरी ताकत के साथ पार्टी के साथ खड़े हैं।
इसके अलावा, वोट न देने वाले अन्य विधायकों का भी कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार ही यह निर्णय लिया। इस मुद्दे ने कांग्रेस के भीतर जातीय राजनीति पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि पार्टी में अगड़ी और पिछड़ी जातियों के बीच की राजनीति हावी हो गई है, जिसका असर अब स्पष्ट दिख रहा है।
मनोज विश्वास ने आगे कहा, "जब हम बिहार में वोट मांगने जाते हैं, तो हमारा वोट बैंक कौन है? अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग। लेकिन जिस उम्मीदवार को खड़ा किया गया, उस पर हमारी पार्टी के साथ कोई तालमेल नहीं था।"
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पहले दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारने की चर्चा हो रही थी, लेकिन सिर्फ 11 घंटे के भीतर एक ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया, जिसका कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और जो एक व्यवसायी है।
मनोज विश्वास ने बताया, "प्रदेश अध्यक्ष ने हमें स्पष्ट रूप से कहा था कि वोट देना है या नहीं, इसका निर्णय हम स्वयं ले सकते हैं।"
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।