पलक्कड़ सीपीआई-एम नेता पर यौन उत्पीड़न के आरोप, पिनाराई विजयन की चुप्पी पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई-एम के पलक्कड़ जिला सचिव पद से हटाए गए ईएन सुरेश बाबू पर यौन उत्पीड़न के कथित आरोपों को लेकर 6 अक्टूबर 2026 को औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की मांग उठी, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है। शिकायत में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन तथा सीपीआई-एम राज्य सचिव एमवी गोविंदन को भी आरोपी बनाने की माँग की गई है।
शिकायत का विवरण
राज्य कांग्रेस सचिव जॉन डेनियल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को एक औपचारिक शिकायत सौंपी, जिसमें सुरेश बाबू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की माँग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विजयन और गोविंदन गंभीर आरोपों से भलीभाँति परिचित थे, फिर भी उन्होंने मामले को पुलिस के बजाय पार्टी स्तर पर ही दबाए रखा।
डेनियल ने कहा, 'यह मुद्दा इसलिए विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि यह सार्वजनिक जीवन में शामिल महिलाओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।' उन्होंने पुलिस जाँच और सुरेश बाबू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग दोहराई।
पीड़िता के आरोप और डिजिटल साक्ष्य
बताया जा रहा है कि एक युवा महिला वकील ने सुरेश बाबू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सीपीआई-एम नेतृत्व से संपर्क किया था। कथित तौर पर महिला ने अपनी शिकायत के साथ डिजिटल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं।
महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि सुरेश बाबू ने शिकायत के बाद भी उनसे संपर्क करना और उन्हें परेशान करना जारी रखा। कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल ममकुटाथिल — जिन पर स्वयं पिछले वर्ष यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे और उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था — ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि महिला वकील को एक मामले पर चर्चा के बहाने पार्टी कार्यालय बुलाया गया था, जहाँ कथित तौर पर उनके साथ उत्पीड़न किया गया।
पार्टी नेतृत्व की चुप्पी
इस विवाद में सबसे चर्चित पहलू सीपीआई-एम के वरिष्ठ नेताओं की खामोशी रही है। मंगलवार को जब पत्रकारों ने पिनाराई विजयन से इस मामले पर सवाल किए, तो वे चुप रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेता केके शैलजा, ईपी जयराजन, एमवी जयराजन, वीएन वासवन और थॉमस इसहाक ने भी शिकायत के बारे में पूछे जाने पर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
इसहाक ने कहा कि उन्हें पलक्कड़ में क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है और उनका ध्यान फिलहाल पथानामथिट्टा पर केंद्रित है। हालाँकि, ईपी जयराजन ने पार्टी की कार्रवाई को 'संगठनात्मक' करार देते हुए उसका बचाव किया और मीडिया पर सीपीआई-एम को निशाना बनाने के लिए 'कहानियाँ गढ़ने' का आरोप लगाया।
पारदर्शिता पर उठते सवाल
गौरतलब है कि सीपीआई-एम ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि सुरेश बाबू को जिला सचिव पद से हटाने के पीछे इस यौन उत्पीड़न शिकायत की कोई भूमिका थी या नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में महिलाओं की राजनीतिक सुरक्षा का मसला पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।
आलोचकों का कहना है कि पार्टी की आंतरिक कार्रवाई की प्रक्रिया अपारदर्शी रही और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाने में देरी हुई। अब जब मामला सार्वजनिक हो गया है, तो सीपीआई-एम नेतृत्व पर स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को सौंपी गई शिकायत के बाद अब यह देखना होगा कि पुलिस इस मामले में स्वतंत्र जाँच शुरू करती है या नहीं। महिला अधिकार संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग उठाई है। यह मामला केरल की राजनीति में महिलाओं की सुरक्षा और पार्टी संरचनाओं में जवाबदेही के व्यापक प्रश्न को केंद्र में ला रहा है।