दुर्गा पूजा में CPI(M) के पुस्तक स्टॉल तोड़फोड़ मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा, 20 अक्टूबर को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के पुस्तक स्टॉलों में हुई तोड़फोड़ से जुड़ी एक याचिका पर तत्काल सुनवाई की अपील स्वीकार कर ली। यह मामला अब मंगलवार, 20 अक्टूबर को न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुना जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिका दक्षिण कोलकाता के जादवपुर क्षेत्र में CPI(M) की स्थानीय क्षेत्रीय समिति ने दायर की है। इसमें मुआवज़े की माँग भी शामिल है। सप्तमी की रात जादवपुर इलाके में पार्टी के दो पुस्तक स्टॉल तोड़े गए। उसके बाद से कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की कई और घटनाएँ सामने आईं।
सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम रॉय की अवकाशकालीन पीठ द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस बार CPI(M) ने राजनीतिक बयानबाज़ी की जगह कानूनी रास्ता चुना है — जो दल की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इन घटनाओं की निंदा केवल वामपंथी खेमे तक सीमित नहीं रही। पत्रकार से राजनेता बने और राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने भी इन घटनाओं को 'दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक' करार दिया।
दासगुप्ता ने कहा, 'अगर यह घटना एक अलग-थलग मामला होता तो मैं समझ सकता था, लेकिन यह तीन-चार जगहों पर हुई। मैं इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं कर सकता। वामपंथी दलों से हमारे वैचारिक मतभेद हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें किताबें क्यों नहीं बेचने देते? वे कौन होते हैं? उन्हें यह अधिकार किसने दिया? ऐसे मामले निंदनीय हैं। मुझे शर्म आती है।' कई बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने भी तोड़फोड़ की इन घटनाओं की कड़ी आलोचना की है।
CPI(M) की दुर्गा पूजा में पुस्तक स्टॉल की परंपरा
CPI(M) के नेता और कार्यकर्ता परंपरागत रूप से दुर्गा पूजा की धार्मिक गतिविधियों में भाग नहीं लेते। हालाँकि, वर्षों से पार्टी कार्यकर्ता सामुदायिक पूजा पंडालों के निकट कम्युनिस्ट और मार्क्सवादी साहित्य बेचने वाले पुस्तक स्टॉल लगाते आए हैं। इसे एक प्रभावी जनसंपर्क रणनीति माना जाता है, क्योंकि इन दिनों पंडालों में भारी भीड़ उमड़ती है।
इस वर्ष इन स्टॉलों में केवल राजनीतिक साहित्य ही नहीं, बल्कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और शरत चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे लोकप्रिय बंगाली साहित्यकारों की रचनाएँ भी प्रदर्शित की गई थीं। इस संदर्भ में तोड़फोड़ की घटनाओं को और अधिक उकसावे वाला माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और असहमति दबाने के आरोपों को लेकर सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहले से ही सवालों के घेरे में है। 20 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि न्यायालय इस मामले में कोई अंतरिम राहत देता है या नहीं। इस फैसले का असर राज्य में राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक उत्सवों के दौरान सभी दलों के अधिकारों पर भी पड़ सकता है।