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सीयूईटी देरी पर पूर्व डीजीपी एसपी वैद बोले — परीक्षा से पहले अनिवार्य हो तकनीकी रिहर्सल

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सीयूईटी देरी पर पूर्व डीजीपी एसपी वैद बोले — परीक्षा से पहले अनिवार्य हो तकनीकी रिहर्सल

सारांश

सीयूईटी में तकनीकी देरी ने एक बार फिर एनटीए की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने परीक्षा-पूर्व रिहर्सल की माँग की और एनटीए को यूपीएससी के भरोसेमंद मॉडल से सीखने की सलाह दी — यह आवाज़ अब सिर्फ विपक्ष की नहीं रही।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने सीयूईटी में तकनीकी गड़बड़ी से हुई देरी को अस्वीकार्य बताया।
वैद ने एनटीए को यूपीएससी की सुरक्षा प्रक्रियाओं का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की सलाह दी।
पेपर लीक मामलों में सीबीआई जाँच जारी है और कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
वैद परीक्षा संचालन में सेना की भागीदारी के पक्ष में नहीं, लेकिन सरकारी निर्णय को सुविचारित मानते हैं।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कोई बड़ी परीक्षा विवाद से अछूती नहीं रही।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने 30 मई को सीयूईटी परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई देरी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परीक्षा से पहले पूर्ण तकनीकी रिहर्सल अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि लाखों युवाओं का भविष्य इस तरह की लापरवाही की भेंट न चढ़े। उनके अनुसार, जहाँ तकनीक का उपयोग होता है वहाँ खामियाँ आ सकती हैं, परंतु पूर्व-तैयारी से इन्हें टाला जा सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

वैद ने स्पष्ट किया कि आदर्श स्थिति यही होती कि सीयूईटी बिना किसी व्यवधान के समय पर आरंभ होती। उन्होंने कहा कि अंतिम समय में तकनीकी दिक्कतें तभी सामने आती हैं जब पूर्व-परीक्षण अपर्याप्त हो। परीक्षा आयोजन में इस स्तर की चूक देश की युवा पीढ़ी के भविष्य पर सीधा असर डालती है।

पेपर लीक पर वैद का रुख

पेपर लीक के मामलों पर वैद ने कहा कि इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) पहले से कर रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। परीक्षा एजेंसियाँ और सरकार इस मुद्दे की गंभीरता से भली-भाँति परिचित हैं, क्योंकि यह सीधे लाखों अभ्यर्थियों की आजीविका से जुड़ा है।

यूपीएससी मॉडल अपनाने की सलाह

वैद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कार्यप्रणाली से सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा, एनडीए और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षाएँ वर्षों से बिना किसी पेपर लीक विवाद के सफलतापूर्वक आयोजित करता आया है। एनटीए को यूपीएससी की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कर उन्हें अपनाना चाहिए।

परीक्षा में सेना की भूमिका पर राय

परीक्षा संचालन में सेना को शामिल किए जाने की चर्चा पर वैद ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से इसके पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, यूपीएससी जैसी संस्थाएँ बिना सैन्य सहयोग के दशकों से निर्बाध परीक्षाएँ आयोजित कर रही हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि केंद्र सरकार ने ऐसा कोई निर्णय लिया है तो वह सुविचारित ही होगा, क्योंकि अब और विवादों की कोई गुंजाइश नहीं बचनी चाहिए। उनके मुताबिक सेना अंतिम विकल्प हो सकती है, प्राथमिकता एक मज़बूत और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली विकसित करने पर होनी चाहिए।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी परीक्षा प्रणाली को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में उत्तर प्रदेश में आयोजित लगभग हर बड़ी परीक्षा किसी न किसी विवाद या पेपर लीक के आरोपों की चपेट में रही है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार प्रदेश में ऐसी कोई बड़ी परीक्षा नहीं बची जिस पर सवाल न उठे हों।

प्रसाद ने नीट और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में हुए हालिया विवादों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन घटनाओं से युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमज़ोर हो रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और बेहतर परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासरत रहेगी।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एनटीए की विश्वसनीयता पहले से ही नीट-यूजी 2024 विवाद के कारण सवालों के घेरे में है। सुधार की माँग अब केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रही — परीक्षा सुरक्षा पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली संकट केवल रिहर्सल की कमी नहीं है — यह संस्थागत जवाबदेही का अभाव है। यूपीएससी और एनटीए के बीच का फर्क सिर्फ प्रक्रिया का नहीं, स्वायत्तता और राजनीतिक दबाव से मुक्ति का भी है। नीट-यूजी विवाद के बाद भी यदि सीयूईटी में तकनीकी चूक हो रही है, तो यह संकेत है कि सुधार सतह पर हो रहे हैं, जड़ तक नहीं। परीक्षा में सेना की भूमिका की चर्चा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि नागरिक संस्थाओं पर भरोसा किस हद तक टूट चुका है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीयूईटी परीक्षा में देरी क्यों हुई?
सीयूईटी परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण देरी हुई। पूर्व डीजीपी एसपी वैद के अनुसार, परीक्षा से पहले पर्याप्त तकनीकी परीक्षण न होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई।
एसपी वैद ने एनटीए को क्या सुझाव दिया?
वैद ने एनटीए को यूपीएससी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रक्रियाओं का अध्ययन कर उन्हें अपनाने की सलाह दी। उनके अनुसार यूपीएससी दशकों से बिना किसी पेपर लीक विवाद के सफलतापूर्वक परीक्षाएँ आयोजित करता आया है।
सीयूईटी पेपर लीक मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
पेपर लीक मामलों की जाँच सीबीआई कर रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
क्या परीक्षा संचालन में सेना को शामिल किया जाना चाहिए?
एसपी वैद व्यक्तिगत रूप से परीक्षा में सेना की भागीदारी के पक्ष में नहीं हैं और मानते हैं कि प्राथमिकता एक मज़बूत नागरिक परीक्षा प्रणाली विकसित करने पर होनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने ऐसा निर्णय लिया है तो वह सुविचारित होगा।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने परीक्षा प्रणाली पर क्या कहा?
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में उत्तर प्रदेश में आयोजित लगभग हर बड़ी परीक्षा किसी न किसी विवाद या पेपर लीक के आरोपों से घिरी रही है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमज़ोर हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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