सीयूईटी 2026 में तकनीकी गड़बड़ी: AAP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को घेरा, दर्जनों शहरों में देरी
सारांश
मुख्य बातें
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) में 30 मई 2026 को व्यापक तकनीकी खराबी सामने आई, जिसके कारण नई दिल्ली, नोएडा, अंबाला, वाराणसी, बेंगलुरु, कानपुर और जोधपुर सहित देशभर के दर्जनों परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है।
मुख्य घटनाक्रम
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और रिपोर्टें साझा करते हुए बताया कि कई केंद्रों पर सर्वर काम नहीं कर रहे थे, जिससे परीक्षा प्रक्रिया बाधित हुई।
भारद्वाज ने कहा कि यदि कुछ छात्रों को निर्धारित समय पर प्रश्नपत्र उपलब्ध हो जाए और अन्य को घंटों बाद परीक्षा देनी पड़े, तो यह परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनके अनुसार पहले नीट, फिर सीबीएसई और अब सीयूईटी में अव्यवस्था देखने को मिली है — यह एक लगातार चलती आ रही विफलता की कड़ी है।
आतिशी ने कहा कि दिल्ली, अंबाला, वाराणसी और जोधपुर समेत कई शहरों के परीक्षा केंद्रों से छात्रों की परेशानी की तस्वीरें सामने आई हैं। उनके अनुसार यह स्थिति केंद्रीय शिक्षा मंत्री की प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
AAP का व्यापक आरोप
AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि लाखों छात्रों को सुबह से ही परीक्षा केंद्रों पर बुला लिया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने में विफल रही है और इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी और सीबीएसई परीक्षाओं को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। आलोचकों का कहना है कि केंद्रीय परीक्षा एजेंसियों की तकनीकी तैयारी पर बार-बार सवाल उठना एक प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करता है।
आम जनता और अभिभावकों पर असर
देशभर में लाखों अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुँचे थे, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते उन्हें घंटों तक परीक्षा केंद्रों के बाहर इंतजार करना पड़ा। अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने परीक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गौरतलब है कि सीयूईटी देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश का एकमात्र माध्यम है, इसलिए इसमें किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर लाखों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ता है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जाँच और छात्रों को हुई असुविधा के लिए जवाबदेही तय करने की माँग की है। शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और तकनीकी तैयारी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्र सरकार और संबंधित परीक्षा एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।