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चक्रवात 'मुरासु' का आंध्र प्रदेश तट पर कहर, 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएँ; CM नायडू ने संभाला मोर्चा

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चक्रवात 'मुरासु' का आंध्र प्रदेश तट पर कहर, 100-120 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएँ; CM नायडू ने संभाला मोर्चा

सारांश

भीषण चक्रवात 'मुरासु' ने तड़के आंध्र तट पर दस्तक दी — 120 किमी/घंटा की हवाएँ, 6 जिलों में बारिश, सूर्यलंका बीच पर समुद्र 50 मीटर अंदर तक। कोई जनहानि नहीं, लेकिन फसलें बर्बाद। CM नायडू RTGS केंद्र से स्थिति पर नज़र रख रहे हैं।

मुख्य बातें

चक्रवात 'मुरासु' ने मंगलवार तड़के 3:30-5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र तट से टकराया।
हवाओं की रफ्तार 100-110 किमी/घंटा , झोंकों में 120 किमी/घंटा तक दर्ज की गई।
बापटला में 21 सेमी और प्रकाशम में 20 सेमी वर्षा; राज्य का औसत 20.38 सेमी ।
प्रभावित जिलों में फसलें बर्बाद, बिजली बाधित — किसी के हताहत होने की सूचना नहीं ।
राज्य में बारिश की कमी 53% से घटकर 28.9% हुई; जलाशयों में 7-8 टीएमसी पानी पहुँचा।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने RTGS केंद्र से स्थिति की निगरानी की, तमिलनाडु-कर्नाटक से सहयोग माँगा।

भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने मंगलवार, 4 नवंबर की तड़के 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराकर व्यापक तबाही मचाई। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100-110 किमी प्रति घंटा रही, जो झोंकों में 120 किमी प्रति घंटा तक पहुँच गई। तूफान के प्रभाव से राज्य के दक्षिणी तटीय जिलों में भारी बारिश, जलभराव और बिजली बाधित होने की घटनाएँ सामने आई हैं, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रकाशम, बापटला, पलनाडु, कृष्णा, एलुरु और पश्चिम गोदावरी जिलों में व्यापक वर्षा दर्ज की गई। बापटला जिले में 21 सेमी और प्रकाशम जिले में 20 सेमी बारिश हुई, जबकि सोमवार से राज्य में औसतन 20.38 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है।

तेज हवाओं से कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। निचले इलाकों में जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और प्रभावित जिलों में फसलों को नुकसान पहुँचा। बापटला जिले के सूर्यलंका बीच पर समुद्र की ऊँची लहरें तट से लगभग 50 मीटर अंदर तक आ गईं।

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 'मुरासु' के उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और मंगलवार आधी रात तक धीरे-धीरे कमज़ोर होकर एक 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होने की संभावना है। मंगलवार को तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और सटे हुए तेलंगाना में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

बुधवार को भी तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के मुताबिक, आने वाले घंटों में पोलावरम, काकीनाडा, एनटीआर, कृष्णा, बापटला और पलनाडु जिलों में भारी वर्षा की आशंका है, जबकि मान्यम, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कोनासीमा और एलुरु जिलों में मध्यम बारिश के आसार हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सचिवालय स्थित 'रियल-टाइम गवर्नेंस सोसाइटी' (RTGS) केंद्र से चक्रवात की स्थिति पर नज़र रखी और अधिकारियों से विभिन्न जिलों में हुई बारिश और हवा की गति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि लोगों को सतर्क रखकर कई कीमती जानें बचाई जा सकीं।

नायडू ने तमिलनाडु और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से भी बात की और राहत व पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग माँगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डेटा का विश्लेषण किया जाए और 'डेटा-आधारित निर्णय लेने' की प्रक्रिया को हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।

आम जनता पर असर

प्रभावित जिलों में किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं और बिजली आपूर्ति बाधित है। गौरतलब है कि 'अरनाब' और 'मुरासु' — इन दो चक्रवातों के कारण हुई बारिश से राज्य में औसत बारिश की कमी 53 प्रतिशत से घटकर 28.9 प्रतिशत रह गई है, जो जल संकट के लिहाज़ से एक राहत की बात है।

अधिकारियों के अनुसार, एक ही दिन में भूजल स्तर 0.45 मीटर ऊपर आ गया है और भूजल भंडार में 20 से 30 टीएमसी पानी जमा होने का अनुमान है। जलाशयों में पहले ही 7 से 8 टीएमसी पानी पहुँच चुका है और तालाबों व छोटे सिंचाई टैंकों में 10 टीएमसी तक पानी पहुँचने की उम्मीद है।

क्या होगा आगे

IMD के अनुमान के अनुसार, 'मुरासु' अगले 24 घंटों में कमज़ोर होकर 'डीप डिप्रेशन' में बदल जाएगा, लेकिन बारिश का असर बुधवार तक बना रहेगा। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के अपडेट तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले पाँच दिनों में बारिश की कमी में 2 प्रतिशत की और गिरावट आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन किसानों की फसलों का नुकसान एक ऐसा पहलू है जिसे 'डेटा-आधारित गवर्नेंस' का कोई भी केंद्र वास्तविक समय में नहीं रोक सकता। यह भी उल्लेखनीय है कि 'मुरासु' से पहले 'अरनाब' जैसे चक्रवात भी इसी मौसम में आए — यह बंगाल की खाड़ी में बढ़ती चक्रवाती गतिविधि की प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिस पर दीर्घकालिक नीतिगत ध्यान माँगती है। बारिश की कमी में आई कमी राहत देती है, पर स्थायी कृषि-सुरक्षा ढाँचे के बिना हर चक्रवात एक नई आपदा बनकर आएगा।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रवात 'मुरासु' आंध्र प्रदेश में कहाँ और कब टकराया?
'मुरासु' मंगलवार तड़के 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराया। इस दौरान हवा की रफ्तार 100-110 किमी प्रति घंटा थी, जो झोंकों में 120 किमी प्रति घंटा तक पहुँची।
चक्रवात 'मुरासु' से आंध्र प्रदेश के किन जिलों में सबसे ज्यादा असर पड़ा?
प्रकाशम, बापटला, पलनाडु, कृष्णा, एलुरु और पश्चिम गोदावरी जिलों में व्यापक बारिश दर्ज की गई। बापटला में 21 सेमी और प्रकाशम में 20 सेमी वर्षा हुई, जबकि बापटला के सूर्यलंका बीच पर समुद्र का पानी 50 मीटर अंदर तक आ गया।
क्या चक्रवात 'मुरासु' में कोई जनहानि हुई?
अधिकारियों के अनुसार, किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि लोगों को लगातार सतर्क रखकर कई कीमती जानें बचाई जा सकीं।
चक्रवात 'मुरासु' अब कमज़ोर होगा या और तेज़?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 'मुरासु' के मंगलवार आधी रात तक धीरे-धीरे कमज़ोर होकर 'डीप डिप्रेशन' में बदलने की संभावना है। हालाँकि, बुधवार तक तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है।
चक्रवात 'मुरासु' का आंध्र प्रदेश के जल संसाधनों पर क्या असर पड़ा?
अधिकारियों के अनुसार, 'अरनाब' और 'मुरासु' चक्रवातों की बारिश से राज्य में बारिश की कमी 53 प्रतिशत से घटकर 28.9 प्रतिशत रह गई है। जलाशयों में 7-8 टीएमसी पानी पहुँच चुका है और भूजल स्तर एक दिन में 0.45 मीटर ऊपर आया है।
राष्ट्र प्रेस
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