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भंजनगर भूस्खलन: मंत्री सुरेश पुजारी ने जताई उम्मीद, 250 बचावकर्मी मलबे में तलाश जारी रखे

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भंजनगर भूस्खलन: मंत्री सुरेश पुजारी ने जताई उम्मीद, 250 बचावकर्मी मलबे में तलाश जारी रखे

सारांश

चक्रवात 'अर्नब' के बाद गंजाम के भंजनगर में आए भीषण भूस्खलन में 13 लोग लापता हैं। 250 बचावकर्मी मलबे में दबे जीवित लोगों को खोज रहे हैं। विशाल चट्टानें और संकरा रास्ता अभियान को कठिन बना रहे हैं, लेकिन मंत्री पुजारी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।

मुख्य बातें

28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात 'अर्नब' की असाधारण बारिश से गंजाम जिले के गिदिपाबली गांव में भीषण भूस्खलन आया।
करीब 13 लोग लापता बताए गए थे; अब तक 1 शव बरामद हो चुका है, दूसरा शव मलबे में दबा है।
घटनास्थल पर NDRF, ODRAF, ओडिशा पुलिस, अग्निशमन सेवा सहित करीब 250 बचावकर्मी और 100 मजदूर तैनात हैं।
मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा — 'हमें उम्मीद है कि लापता व्यक्ति जीवित हैं।' डीजीपी सुधांशु सारंगी ने बताया कि घर जितनी बड़ी चट्टानें और कीचड़ भरे रास्ते अभियान में बड़ी बाधा हैं।
बचाव अभियान कंधमाल जिले की ओर से संचालित किया जा रहा है।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को कहा कि गंजाम जिले के भंजनगर में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में बचाव अभियान पूरी तत्परता से जारी है। उन्होंने बताया कि मलबे में दबे संभावित जीवित व्यक्तियों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक और परिष्कृत उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भूस्खलन 28 अक्टूबर को चक्रवात 'अर्नब' की असाधारण बारिश के कारण गिदिपाबली गांव में आया था, जिसमें करीब 13 लोग लापता हो गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री पुजारी ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद बचाव दल ने पूरे दिन काम किया और देर शाम तक अभियान जारी रखा। अगले दिन सुबह अभियान फिर से शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि बचावकर्मी हर संभव प्रयास कर रहे हैं और टीमें हार नहीं मानी हैं।

पुजारी ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि लापता व्यक्ति जीवित हैं। हम महाप्रभु जगन्नाथ से उनकी सुरक्षा, शीघ्र पता लगाने और सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं।'

बचाव अभियान की चुनौतियाँ

ओडिशा अग्निशमन सेवा एवं होम गार्ड के डीजीपी सुधांशु सारंगी ने बताया कि बचाव अभियान भंजनगर उपमंडल में चल रहा है, लेकिन आवागमन कंधमाल जिले की ओर से हो रहा है। घटनास्थल तक पहुँचने का रास्ता संकरा, कीचड़ भरा और पैदल चलने में अत्यंत कठिन है।

सारंगी ने बताया कि भूस्खलन में पहाड़ी से लुढ़की विशाल चट्टानें और मिट्टी की मोटी परतें घरों पर आ गिरी हैं — इनमें से कुछ चट्टानें घरों जितनी बड़ी हैं। इन्हें सीधे हटाना संभव नहीं, और चट्टानें हटाए बिना मिट्टी की सफाई भी नहीं हो सकती। टीमों के ठहरने की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे बचावकर्मियों को सीमित समय काम कर वापस लौटना पड़ रहा है।

बचाव दल और संसाधन

घटनास्थल पर अग्निशमन सेवा, रेलवे कर्मियों, ओडीआरएएफ, ओडिशा पुलिस और एनडीआरएफ टीम सहित विभिन्न एजेंसियों के करीब 250 बचावकर्मी तैनात हैं। इनके साथ लगभग 100 मजदूर भी काम कर रहे हैं। सारंगी ने बताया कि अब तक एक शव बरामद किया गया है जिसकी परिजनों ने पहचान कर ली है और परिवार के अनुरोध पर अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। एक अन्य शव मिला है, लेकिन उस पर मिट्टी का भारी जमाव होने के कारण उसे अभी तक निकाला नहीं जा सका।

पृष्ठभूमि: चक्रवात 'अर्नब' की तबाही

यह आपदा 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात 'अर्नब' के कारण हुई असामान्य भारी बारिश के बाद गंजाम जिले के गिदिपाबली गांव में आई। भूस्खलन इतना भीषण था कि पहाड़ी से उखड़े मलबे ने कई घरों को ढक दिया। गौरतलब है कि ओडिशा तट चक्रवातों के लिए अत्यंत संवेदनशील रहा है और राज्य में आपदा प्रबंधन की परीक्षाएँ बार-बार होती रहती हैं।

क्या होगा आगे

डीजीपी सारंगी ने कहा कि टीमें अभी भी उम्मीद बनाए हुए हैं कि कुछ लोग जीवित मिल सकते हैं। अभियान में कोई भी प्रगति होने पर सरकार तुरंत जानकारी साझा करेगी। परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन बचाव अभियान रुका नहीं है — अगले कुछ घंटे निर्णायक हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस तरह के दूरस्थ पहाड़ी भूस्खलनों के लिए नहीं। 250 बचावकर्मी तैनात हैं, फिर भी टीमों को ठहरने की जगह न होने से सीमित समय में वापस लौटना पड़ रहा है — यह लॉजिस्टिक विफलता है, न केवल भाग्य की बात। चक्रवात 'अर्नब' के बाद बचाव में छह दिन बीत जाना और अब भी मलबे में दबे एक शव को न निकाल पाना, पहाड़ी आपदा-प्रतिक्रिया में निवेश की जरूरत को रेखांकित करता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भंजनगर भूस्खलन कब और क्यों हुआ?
यह भूस्खलन 28 अक्टूबर 2026 को गंजाम जिले के गिदिपाबली गांव में आया, जिसका कारण चक्रवात 'अर्नब' की असाधारण भारी बारिश थी। पहाड़ी से विशाल चट्टानें और मिट्टी की मोटी परतें लुढ़ककर घरों पर आ गिरीं।
भंजनगर भूस्खलन में कितने लोग लापता हैं?
भूस्खलन के बाद करीब 13 लोग लापता बताए गए थे। अब तक 1 शव बरामद कर लिया गया है और उसका अंतिम संस्कार भी हो चुका है; एक अन्य शव मलबे में दबा है।
बचाव अभियान में कौन-सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
घटनास्थल पर NDRF, ODRAF, ओडिशा पुलिस, अग्निशमन सेवा और रेलवे कर्मियों सहित करीब 250 बचावकर्मी तैनात हैं। इनके साथ लगभग 100 मजदूर भी काम कर रहे हैं।
बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
डीजीपी सुधांशु सारंगी के अनुसार घरों जितनी बड़ी विशाल चट्टानें, संकरे कीचड़ भरे रास्ते और टीमों के ठहरने की व्यवस्था का अभाव सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। इन चट्टानों को हटाए बिना मिट्टी की सफाई नहीं हो सकती।
ओडिशा सरकार की इस आपदा पर क्या प्रतिक्रिया है?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि सरकार को उम्मीद है कि लापता लोग जीवित मिलेंगे और अभियान में प्रगति होने पर तुरंत जानकारी साझा की जाएगी। अत्याधुनिक उपकरणों से जीवन के संकेतों की तलाश की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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