ओडिशा बाढ़: नौसेना के हेलीकॉप्टरों ने गंजाम के गांव तक पहुंचाई 1,800 किलो राहत सामग्री
सारांश
मुख्य बातें
चक्रवात अर्नब के बाद ओडिशा के गंजाम जिले में बाढ़ से घिरे गांवों तक जमीनी रास्ता बंद हो जाने के बाद भारतीय नौसेना ने हवाई मार्ग से राहत अभियान तेज कर दिया है। पूर्वी नौसेना कमान ने लगातार दूसरे दिन हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित करते हुए बाढ़ग्रस्त सारा भीमपुर गांव तक करीब 1,800 किलोग्राम राहत सामग्री पहुंचाई। सड़क संपर्क टूटने और गांवों में जलभराव की स्थिति के चलते यह हवाई अभियान बचाव की एकमात्र कड़ी बन गया है।
हवाई राहत अभियान का विवरण
नौसेना के सी किंग और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ने कई उड़ानें भरकर बाढ़ग्रस्त इलाकों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई। कुल राहत सामग्री में 1,400 किलोग्राम खाद्य सामग्री और 400 लीटर ताज़ा पीने का पानी शामिल था। व्यापक जलभराव के कारण गांव तक जमीनी मार्ग से पहुंचना असंभव हो गया था, जिसके बाद हवाई मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा।
तटरक्षक बल का बचाव अभियान
नौसेना के समानांतर भारतीय तटरक्षक बल भी गंजाम जिले में हवाई बचाव अभियान चला रहा है। 29 अक्टूबर को प्रशासन से संकट की सूचना मिलने पर भुवनेश्वर स्थित तटरक्षक बल के हवाई केंद्र से उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (ALH MK-3) तुरंत रवाना किया गया। खराब मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद चालक दल ने बाढ़ से घिरे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का पता लगाया, जहां कई लोग फंसे हुए थे।
छह लोगों की जान बचाई
इस बचाव अभियान में तटरक्षक बल ने छह लोगों को सुरक्षित निकाला, जिनमें दो महिलाएं, दो बच्चे और एक बुजुर्ग शामिल थे। सभी को बाढ़ से घिरे उसी स्वास्थ्य केंद्र से हेलीकॉप्टर के ज़रिए सुरक्षित बाहर निकाला गया। गौरतलब है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जलमग्न हो जाने से आपदा की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
समन्वित राहत प्रयास जारी
भारतीय नौसेना स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर राहत अभियान निरंतर जारी रखे हुए है। त्वरित कार्रवाई और लगातार हवाई उड़ानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाढ़ में फंसे लोगों तक भोजन और पेयजल पहुंच सके। यह अभियान प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नौसेना और तटरक्षक बल की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) क्षमता को रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे जलस्तर घटेगा, जमीनी राहत दलों के प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।