31 अक्टूबर 2026
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कंधमाल भूस्खलन और गंजाम बाढ़: बीजेडी सांसद सुलता देव ने ओडिशा सरकार की आपदा तैयारी पर उठाए सवाल

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कंधमाल भूस्खलन और गंजाम बाढ़: बीजेडी सांसद सुलता देव ने ओडिशा सरकार की आपदा तैयारी पर उठाए सवाल

सारांश

चक्रवात 'अर्नब' के बाद कंधमाल में भूस्खलन से एक नवजात सहित एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत और गंजाम में बाढ़ के बाद बीजेडी ने BJP सरकार को घेरा — डॉप्लर रडार वर्षभर से बंद होने का गंभीर आरोप और नवीन पटनायक के 'मॉडल' आपदा तंत्र से सीधी तुलना।

मुख्य बातें

चक्रवात 'अर्नब' के कारण कंधमाल में भूस्खलन से एक नवजात शिशु सहित एक ही परिवार के 3 सदस्यों की मौत; कई ग्रामीण अभी लापता।
गंजाम जिले में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर, बचाव अभियान जारी।
बीजेडी सांसद सुलता देव ने BJP नीत ओडिशा सरकार पर आपदा तैयारी में चूक का आरोप लगाया।
डॉप्लर मौसम रडार करीब एक वर्ष से निष्क्रिय होने का आरोप; स्थानीय मौसम पूर्वानुमान प्रभावित।
सुलता देव ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आपदा प्रबंधन मॉडल से वर्तमान व्यवस्था की तुलना की।
बीजेडी ने फंसे नागरिकों तक भोजन, पेयजल, दवाइयाँ और चिकित्सा सहायता तत्काल पहुँचाने की माँग की।

बीजू जनता दल (बीजेडी) की राज्यसभा सांसद सुलता देव ने 31 अक्टूबर 2026 को चक्रवात 'अर्नब' के कारण कंधमाल में आए भूस्खलन और गंजाम जिले में फैली बाढ़ के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत ओडिशा सरकार पर आपदा प्रबंधन में गंभीर चूक का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारी वर्षा की अग्रिम चेतावनी के बावजूद सरकार नागरिकों की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही।

जानमाल का नुकसान और राहत की स्थिति

कंधमाल में हुए भूस्खलन में एक नवजात शिशु सहित एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सुलता देव ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में कई ग्रामीण अभी भी लापता हैं, जिससे मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से बचाव अभियान तत्काल तेज़ करने और फंसे लोगों तक भोजन, सुरक्षित पेयजल, दवाइयाँ तथा चिकित्सा सहायता पहुँचाने की माँग की।

डॉप्लर रडार निष्क्रिय रहने का आरोप

सुलता देव ने एक गंभीर तकनीकी विफलता की ओर ध्यान दिलाते हुए आरोप लगाया कि डॉप्लर मौसम रडार प्रणाली लगभग एक वर्ष से निष्क्रिय पड़ी है। उनके अनुसार, इसी कारण प्रशासन स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम पूर्वानुमान जारी नहीं कर सका और समय पर निवारक उपाय करने की क्षमता कमज़ोर पड़ गई। यह आरोप गंभीर है क्योंकि ओडिशा एक चक्रवात-प्रवण राज्य है, जहाँ हर मानसून सीजन में अर्ली-वार्निंग तंत्र जीवन-रक्षक भूमिका निभाता है।

पूर्व सरकार से तुलना

बीजेडी सांसद ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था से वर्तमान स्थिति की तुलना की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने अंतरविभागीय समन्वय, पूर्व चेतावनी प्रणाली और केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष के ज़रिये आपातकालीन प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दी थी। उनके अनुसार, वर्तमान BJP सरकार में संकट से निपटने के लिए दूरदर्शिता, समन्वय और प्रभावी योजना का अभाव है।

बीजेडी कार्यकर्ताओं से अपील

सुलता देव ने पूरे ओडिशा में बीजेडी नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संकटग्रस्त परिवारों की हर संभव मदद करें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रभावित लोगों की जान बचाना और उन्हें तत्काल राहत देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन में कथित विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने की माँग भी की।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भाजपा को सत्ता में आए अभी एक वर्ष से अधिक का समय भी नहीं हुआ है और विपक्षी बीजेडी हर बड़े मुद्दे पर उसे घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। गौरतलब है कि ओडिशा की आपदा प्रबंधन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले 'मॉडल' के रूप में सराहा जा चुका है। ऐसे में यदि डॉप्लर रडार निष्क्रियता और समन्वय विफलता के आरोप सत्यापित होते हैं, तो यह राज्य के आपदा-प्रबंधन की साख के लिए एक गंभीर चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्य है, तो यह एक प्रशासनिक विफलता है जिसकी कीमत जानों से चुकाई गई। ओडिशा को दशकों में अपनी जो 'आपदा-प्रबंधन राजधानी' की छवि बनाई, वह इसी तरह की 'मूलभूत ढाँचे की उपेक्षा' से सबसे पहले टूटती है। BJP सरकार को चाहिए कि वह रडार निष्क्रियता और समन्वय विफलता के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दे — चुप्पी या राजनीतिकरण का आरोप लगाना काफ़ी नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि मौजूदा त्रासदी के बाद राज्य का अर्ली-वार्निंग तंत्र कितनी जल्दी बहाल होता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंधमाल भूस्खलन में कितने लोगों की मौत हुई?
कंधमाल में हुए भूस्खलन में एक नवजात शिशु सहित एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्र में कई ग्रामीण अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
चक्रवात 'अर्नब' ने ओडिशा के किन जिलों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया?
चक्रवात 'अर्नब' के कारण कंधमाल जिले में विनाशकारी भूस्खलन और गंजाम जिले में बाढ़ की स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है। दोनों जिलों में बचाव और राहत अभियान जारी है।
बीजेडी सांसद सुलता देव ने ओडिशा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
बीजेडी राज्यसभा सांसद सुलता देव ने आरोप लगाया कि डॉप्लर मौसम रडार प्रणाली लगभग एक वर्ष से निष्क्रिय है, जिससे सटीक पूर्वानुमान बाधित हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि भारी बारिश की अग्रिम चेतावनी के बावजूद सरकार नागरिकों की रक्षा करने और समय पर राहत पहुँचाने में विफल रही।
पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आपदा मॉडल से वर्तमान सरकार की तुलना क्यों की जा रही है?
सुलता देव ने तर्क दिया कि नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा ने अंतरविभागीय समन्वय, केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष और पूर्व चेतावनी प्रणाली के बल पर आपदाओं में जान-माल का नुकसान कम रखा था। उनका आरोप है कि वर्तमान BJP सरकार में यही समन्वय और दूरदर्शिता अनुपस्थित है।
बीजेडी ने सरकार से क्या माँग की है?
बीजेडी ने माँग की है कि बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान तत्काल तेज़ किया जाए और फंसे लोगों तक भोजन, सुरक्षित पेयजल, दवाइयाँ एवं चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन में कथित विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने की भी माँग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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