3 नवंबर 2026
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केरल डीएसपी भर्ती विवाद: गृह मंत्री चेन्निथला ने एसआईटी जांच के दिए आदेश, एसएफआई नेता की नियुक्ति पर सवाल

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केरल डीएसपी भर्ती विवाद: गृह मंत्री चेन्निथला ने एसआईटी जांच के दिए आदेश, एसएफआई नेता की नियुक्ति पर सवाल

सारांश

केरल में डीएसपी भर्ती विवाद ने नया मोड़ लिया — गृह मंत्री चेन्निथला ने एसआईटी जांच के आदेश दिए। आरोप है कि 17,392 आवेदकों को पीछे छोड़ एसएफआई नेता को असामान्य जल्दबाज़ी में डीएसपी पद दिलाने की कोशिश हुई। पीएससी पहले से ही दूसरे भर्ती विवाद में जांच के घेरे में है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 3 नवंबर 2026 को क्राइम ब्रांच एसआईटी को केरल डीएसपी भर्ती विवाद की जांच के निर्देश दिए।
केपीएससी पर आरोप है कि उसने एसएफआई नेता केजे जिथिन को विशेष भर्ती प्रक्रिया से डीएसपी पद पर नियुक्त करने की कोशिश की।
इस पद के लिए 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था; आवेदन से रैंक सूची तक की प्रक्रिया 10 सितंबर 2025 से 6 मई 2026 के बीच असामान्य गति से पूरी हुई।
शिकायतकर्ता के अनुसार जिथिन ने बीकॉम अनुग्रह अंकों से उत्तीर्ण की और उनके विरुद्ध कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जिथिन ने सभी आरोपों से इनकार किया है; पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू पहले से ही एक अन्य भर्ती मामले में एसआईटी की पूछताछ के दायरे में हैं।

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को उन गंभीर आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया, जिनमें कहा गया है कि केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) ने नियमों की कथित अनदेखी कर एसएफआई के एक नेता को विशेष भर्ती प्रक्रिया के ज़रिए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त करने की कोशिश की। यह विवाद केरल में भर्ती अनियमितताओं की बढ़ती श्रृंखला में एक और कड़ी के रूप में उभरा है।

मुख्य घटनाक्रम

चेन्निथला ने क्राइम ब्रांच एसआईटी की प्रमुख अजिता बेगम को निर्देश दिया कि वे 'सेव यूनिवर्सिटी फोरम' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार द्वारा दायर शिकायत की जांच करें। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह भर्ती प्रक्रिया पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू के नेतृत्व में आगे बढ़ाई गई।

शिकायत के अनुसार, केपीएससी ने एर्नाकुलम के एसएफआई नेता केजे जिथिन को विशेष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से डीएसपी पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह कदम पिछली एलडीएफ सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व जिथिन की नियुक्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

भर्ती प्रक्रिया की समयरेखा

इस पद के लिए कुल 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था और आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 थी। लिखित परीक्षा 31 दिसंबर को आयोजित की गई, जिसके बाद 16 मार्च 2026 को शारीरिक दक्षता परीक्षा हुई। साक्षात्कार 22 अप्रैल को संपन्न हुए और अंतिम रैंक सूची 6 मई को प्रकाशित की गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया असामान्य रूप से जल्दबाज़ी में निपटाई गई। यह ऐसे समय में आया है जब पीएससी पहले से ही एक अन्य भर्ती विवाद में एसआईटी की जांच के दायरे में थी।

आरोपों की प्रकृति

शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जिथिन को डीएसपी पद पर सीधी नियुक्ति के लिए कैसे योग्य माना जा सकता है, जबकि कथित तौर पर उन्होंने बीकॉम परीक्षा अनुग्रह अंकों से उत्तीर्ण की थी और पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में उम्मीदवारों की मुख्य सूची में भी उनका नाम नहीं था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जिथिन के विरुद्ध कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो डीएसपी पद की भर्ती नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

हालाँकि, जिथिन ने चयन प्रक्रिया में किसी भी अनियमितता से इनकार किया है और कहा है कि यह शिकायत उनकी नियुक्ति को राजनीतिक कारणों से रोकने के इरादे से दायर की गई है।

पीएससी पर बढ़ता दबाव

गौरतलब है कि इससे पहले पीएससी अध्यक्ष और तीन सदस्यों से एक अन्य भर्ती विवाद के सिलसिले में क्राइम ब्रांच एसआईटी पूछताछ कर चुकी है। चेन्निथला के ताज़ा आदेश से अब यह विशेष भर्ती प्रस्ताव भी एसआईटी की जांच के दायरे में आ जाएगा, जिससे केरल के सबसे बड़े भर्ती निकाय की साख पर और सवाल उठने की आशंका है।

यह मामला सोमवार को सार्वजनिक रूप से सामने आया और इसने राज्य में पीएससी की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच की दिशा और पीएससी की प्रतिक्रिया इस विवाद का रुख तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संस्था की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े करता है। गृह मंत्री का एसआईटी को निर्देश राजनीतिक दृष्टि से सही कदम दिखता है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या जांच उन ऊपरी कड़ियों तक पहुँचती है जिन्होंने इस प्रक्रिया को संभव बनाया — या केवल निचले स्तर पर सिमट कर रह जाती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल डीएसपी भर्ती विवाद क्या है?
यह विवाद उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया है कि केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) ने असामान्य जल्दबाज़ी में एसएफआई नेता केजे जिथिन को विशेष भर्ती प्रक्रिया के ज़रिए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पद पर नियुक्त करने की कोशिश की। शिकायत में आरोप है कि यह प्रक्रिया भर्ती नियमों का उल्लंघन करते हुए पूरी की गई।
गृह मंत्री चेन्निथला ने एसआईटी जांच के आदेश क्यों दिए?
'सेव यूनिवर्सिटी फोरम' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार की शिकायत के बाद गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 3 नवंबर 2026 को क्राइम ब्रांच एसआईटी प्रमुख अजिता बेगम को मामले की जांच के निर्देश दिए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह भर्ती पूर्व एलडीएफ सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले जिथिन की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई।
केजे जिथिन की डीएसपी नियुक्ति पर क्या आपत्तियाँ हैं?
शिकायतकर्ता के अनुसार जिथिन ने बीकॉम परीक्षा अनुग्रह अंकों से उत्तीर्ण की थी और पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की मुख्य सूची में उनका नाम नहीं था। इसके अलावा, उनके विरुद्ध कथित तौर पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो डीएसपी पद की भर्ती नियमों के अनुसार अयोग्यता का आधार बन सकते हैं।
इस भर्ती प्रक्रिया में जल्दबाज़ी के क्या सबूत बताए गए हैं?
आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 से शुरू होकर लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा, साक्षात्कार और 6 मई 2026 को अंतिम रैंक सूची प्रकाशन तक पूरी प्रक्रिया आठ महीने से कम समय में पूरी की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इतने कम समय में 17,392 उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया असामान्य है।
क्या केपीएससी पहले भी भर्ती विवाद में रही है?
हाँ, पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू और तीन सदस्यों से क्राइम ब्रांच एसआईटी एक अन्य भर्ती विवाद में पहले ही पूछताछ कर चुकी है। यह दूसरा मामला पीएससी की कार्यप्रणाली पर पहले से जारी जांच को और गहरा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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