केरल डीएसपी भर्ती विवाद: गृह मंत्री चेन्निथला ने एसआईटी जांच के दिए आदेश, एसएफआई नेता की नियुक्ति पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को उन गंभीर आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया, जिनमें कहा गया है कि केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) ने नियमों की कथित अनदेखी कर एसएफआई के एक नेता को विशेष भर्ती प्रक्रिया के ज़रिए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नियुक्त करने की कोशिश की। यह विवाद केरल में भर्ती अनियमितताओं की बढ़ती श्रृंखला में एक और कड़ी के रूप में उभरा है।
मुख्य घटनाक्रम
चेन्निथला ने क्राइम ब्रांच एसआईटी की प्रमुख अजिता बेगम को निर्देश दिया कि वे 'सेव यूनिवर्सिटी फोरम' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार द्वारा दायर शिकायत की जांच करें। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह भर्ती प्रक्रिया पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू के नेतृत्व में आगे बढ़ाई गई।
शिकायत के अनुसार, केपीएससी ने एर्नाकुलम के एसएफआई नेता केजे जिथिन को विशेष भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से डीएसपी पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह कदम पिछली एलडीएफ सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व जिथिन की नियुक्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
भर्ती प्रक्रिया की समयरेखा
इस पद के लिए कुल 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था और आवेदन की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 थी। लिखित परीक्षा 31 दिसंबर को आयोजित की गई, जिसके बाद 16 मार्च 2026 को शारीरिक दक्षता परीक्षा हुई। साक्षात्कार 22 अप्रैल को संपन्न हुए और अंतिम रैंक सूची 6 मई को प्रकाशित की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया असामान्य रूप से जल्दबाज़ी में निपटाई गई। यह ऐसे समय में आया है जब पीएससी पहले से ही एक अन्य भर्ती विवाद में एसआईटी की जांच के दायरे में थी।
आरोपों की प्रकृति
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जिथिन को डीएसपी पद पर सीधी नियुक्ति के लिए कैसे योग्य माना जा सकता है, जबकि कथित तौर पर उन्होंने बीकॉम परीक्षा अनुग्रह अंकों से उत्तीर्ण की थी और पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में उम्मीदवारों की मुख्य सूची में भी उनका नाम नहीं था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जिथिन के विरुद्ध कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो डीएसपी पद की भर्ती नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
हालाँकि, जिथिन ने चयन प्रक्रिया में किसी भी अनियमितता से इनकार किया है और कहा है कि यह शिकायत उनकी नियुक्ति को राजनीतिक कारणों से रोकने के इरादे से दायर की गई है।
पीएससी पर बढ़ता दबाव
गौरतलब है कि इससे पहले पीएससी अध्यक्ष और तीन सदस्यों से एक अन्य भर्ती विवाद के सिलसिले में क्राइम ब्रांच एसआईटी पूछताछ कर चुकी है। चेन्निथला के ताज़ा आदेश से अब यह विशेष भर्ती प्रस्ताव भी एसआईटी की जांच के दायरे में आ जाएगा, जिससे केरल के सबसे बड़े भर्ती निकाय की साख पर और सवाल उठने की आशंका है।
यह मामला सोमवार को सार्वजनिक रूप से सामने आया और इसने राज्य में पीएससी की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच की दिशा और पीएससी की प्रतिक्रिया इस विवाद का रुख तय करेगी।