महादेव ऐप घोटाला: सौरभ चंद्राकर रायपुर पहुँचा, 4 नवंबर को विशेष सीबीआई अदालत में पेशी
सारांश
मुख्य बातें
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को दिल्ली से रायपुर लेकर पहुँची। उसे 4 नवंबर 2026 को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। ₹6,000 करोड़ के कथित सट्टेबाजी नेटवर्क में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे चंद्राकर को फ्लाइट ई6 2307 से रायपुर लाया गया।
प्रत्यर्पण से रायपुर तक का सफर
ओमान की रॉयल पुलिस ने चंद्राकर को 8 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। भारतीय एजेंसियों, इंटरपोल और ओमानी अधिकारियों के बीच औपचारिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम 1 नवंबर 2026 को उसे मस्कट से भारत लेकर आई — गिरफ्तारी के 116 दिन बाद। इससे पहले सोमवार, 2 नवंबर को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी।
जांच तेज होने के बाद से चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। आरोप है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने फर्जी पहचान दस्तावेजों का उपयोग किया, जिनमें 'अजंता मेंडिस' के नाम से बना एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी शामिल था। बाद में वह ओमान चला गया।
कानूनी दांव-पेंच: प्रत्यर्पण शर्तों पर विवाद
दिल्ली में सुनवाई के दौरान चंद्राकर के वकील ने सीबीआई की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए। उनकी दलील थी कि ओमान ने केवल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, सीबीआई के मामले में नहीं — और इसलिए सीबीआई मामलों में मुकदमा चलाना प्रत्यर्पण की शर्तों का उल्लंघन होगा। सीबीआई के वकील ने जवाब में कहा कि रायपुर की विशेष अदालत पहले ही चंद्राकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है, ईडी और सीबीआई के मामले परस्पर जुड़े हैं, और अभियोजन की वैधता पर निर्णय रायपुर की अदालत करेगी।
सट्टेबाजी नेटवर्क का संचालन
जांचकर्ताओं के अनुसार, चंद्राकर ने रवि उप्पल और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विभिन्न प्लेटफॉर्म और पैनलों के माध्यम से महादेव सट्टेबाजी नेटवर्क का प्रचार और संचालन किया। आरोप है कि सट्टेबाजी से अर्जित रकम अनेक बैंक खातों के जरिए एकत्र की जाती थी और फिर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई से होता था। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ के अनेक युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी और प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया था।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 13 एफआईआर सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। इनमें से दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। ईडी समानांतर रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है और चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल कर चुकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आरोपी के दावे
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चंद्राकर की गिरफ्तारी पर सीबीआई को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी से संरक्षण राशि के लेन-देन को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं। दूसरी ओर, ओमान की हिरासत में रहने के दौरान चंद्राकर ने दावा किया था कि भारत की जेल में उसकी जान को खतरा हो सकता है और उसने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी। उसका आरोप था कि सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे धमका रहे हैं।
आगे की कार्यवाही
अब सीबीआई पहले चंद्राकर से पूछताछ करेगी, जिसके बाद साक्ष्यों के आधार पर ईडी भी उससे पूछताछ कर सकती है। प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत आगे की कानूनी कार्यवाही और जांच के दायरे पर रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत अपना निर्णय देगी। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण मोड़ पर है जब सीबीआई और ईडी दोनों के आरोपपत्र पहले से तैयार हैं और मुकदमे की दिशा अदालत की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगी।