महादेव ऐप मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर ओमान से प्रत्यर्पित, CM साय ने CBI को दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ओमान से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया है। इस उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 2 नवंबर 2026 को CBI और केंद्रीय एजेंसियों को बधाई देते हुए इसे एक बड़ी सफलता करार दिया। चंद्राकर को अब रायपुर स्थित CBI की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, 'महादेव सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को देश में लाया जाए, इसको लेकर CBI का प्रयास था। अब इस मामले में सभी जानकारियाँ मिलेंगी। यह बड़ी सफलता है। इसको लेकर CBI और केंद्रीय एजेंसियों को बहुत-बहुत बधाई।'
इससे पहले छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि 'CBI ने इंटरपोल की मदद से ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के आरोपी सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण सफलतापूर्वक करवा लिया है' और पूछताछ से अहम जानकारियाँ सामने आने की उम्मीद जताई।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कैसे हुई
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे ढूंढकर हिरासत में लिया था। इसके बाद CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सबूतों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा। CBI की एक विशेष टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई।
चंद्राकर CBI के दो अलग मामलों में वांछित है, जिनमें पहले ही आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त ED के एक मामले में भी उसके विरुद्ध अभियोजन शिकायत दर्ज की जा चुकी है।
महादेव ऐप सिंडिकेट की कार्यप्रणाली
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि यह नेटवर्क देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी तंत्रों में से एक था, जिसे भारत के बाहर से संचालित किया जाता था।
यह सिंडिकेट क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराता था। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी-आधारित 'पैनल' और 'ब्रांच' का व्यापक नेटवर्क बनाया गया था, जो लोगों को जोड़ने और उनसे पैसे लेने का काम करता था।
मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार का जाल
CBI के अनुसार, अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन को बड़ी संख्या में फर्जी बैंक खातों के जरिए परिचालित किया जाता था। कई स्तरों के लेनदेन के बाद इस राशि को हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था, ताकि सिंडिकेट बिना किसी बाधा के अपना कारोबार जारी रख सके।
आगे क्या होगा
चंद्राकर को रायपुर में CBI की विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहाँ उसकी पूछताछ से मामले के और तार उजागर होने की उम्मीद है। यह प्रत्यर्पण विदेशों में रहकर भारतीयों के खिलाफ अपराध करने वाले भगोड़ों को कानून के दायरे में लाने के प्रयासों को नई दिशा देता है।