महादेव सट्टेबाजी ऐप: सीबीआई ने 66 आरोपियों के खिलाफ 11 चार्जशीट दाखिल कीं, सौरभ चंद्राकर पर शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 9 जुलाई 2026 को महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में 11 नई चार्जशीट दाखिल कीं, जिनमें कथित सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सहित कुल 66 आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी ने इसे भारत के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाई बताया है।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई ने दो अलग-अलग मामलों में यह कार्रवाई की है। पहले मामले में आशीष दास, रोहित गुलाटी, विकास छपारिया, अनिल धम्मनी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा — इन छह आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धोखाधड़ी, जालसाजी तथा आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत छह चार्जशीट दाखिल की गई हैं।
दूसरे मामले में सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े अन्य सदस्यों समेत 66 लोगों के खिलाफ पाँच और आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। इनमें आईपीसी और छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम की संबंधित धाराएँ लगाई गई हैं। गौरतलब है कि चंद्राकर और उप्पल के खिलाफ पहले से ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी — नई चार्जशीट में अतिरिक्त साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए हैं।
नेटवर्क कैसे काम करता था
जांच के अनुसार, महादेव ऐप कई राज्यों में अवैध सट्टेबाजी के पैनल संचालित करता था। इन पैनलों के ज़रिए उपयोगकर्ताओं को जोड़ा जाता, सट्टेबाजी कराई जाती और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की जाती थी। आरोप है कि यह राशि कई गुप्त बैंक खातों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर विदेश भेजी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर 'सुरक्षा राशि' (प्रोटेक्शन मनी) के रूप में दिया गया था। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि इस मामले में कथित राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण किस हद तक मिला था।
जांच के अनुसार, चंद्राकर और उप्पल ने सोशल मीडिया के ज़रिए इस ऐप का बड़े पैमाने पर प्रचार किया, जिससे यह लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुँचा और देशभर में इसका व्यापक नेटवर्क खड़ा हो गया।
भगोड़े आरोपी और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के प्रमोटर और उनके कई प्रमुख सहयोगी कुछ वर्ष पहले भारत छोड़कर पश्चिम एशिया के कुछ देशों में चले गए थे, जहाँ से वे कथित तौर पर पूरे नेटवर्क का संचालन करते रहे। सीबीआई चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा चुकी है और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
आगे क्या होगा
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है और आने वाले महीनों में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। एजेंसी का ध्यान फिलहाल पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी करने पर केंद्रित है। यह मामला भारत में अवैध ऑनलाइन जुए के बढ़ते खतरे और उसके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क पर नियामकीय जांच को नई दिशा दे सकता है।