3 नवंबर 2026
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महादेव ऐप किंगपिन सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण, रायपुर कोर्ट में 4 नवंबर को होगा पेश

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महादेव ऐप किंगपिन सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण, रायपुर कोर्ट में 4 नवंबर को होगा पेश

सारांश

ओमान से प्रत्यर्पित महादेव ऐप का कथित किंगपिन सौरभ चंद्राकर अब भारत की न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। सीबीआई और ईडी के दो-दो मामलों में वांछित चंद्राकर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा — यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन जुआ सिंडिकेट की जाँच में एक निर्णायक मोड़ है।

मुख्य बातें

सौरभ चंद्राकर , महादेव अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट का मुख्य प्रमोटर, ओमान से प्रत्यर्पित होकर भारत लाया गया।
दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी है; 4 नवंबर 2026 तक रायपुर की विशेष अदालत में पेशी संभव।
चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने महादेव मामले की 13 एफआईआर सीबीआई को ट्रांसफर की थीं; दो में चार्जशीट दाखिल।
सिंडिकेट की आय फर्जी बैंक खातों और हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजी जाती थी; सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर सुरक्षा राशि दी जाती थी।
रॉयल ओमान पुलिस ने रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर चंद्राकर को खोजकर हिरासत में लिया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महादेव अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाने में सफलता हासिल की है, और अब उसे 4 नवंबर 2026 को या उससे पहले रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड प्रदान की है, जिसके बाद एजेंसी उसे रायपुर ले जाएगी जहाँ महादेव ऑनलाइन बुक मामले में पूछताछ के लिए आगे की रिमांड माँगे जाने की उम्मीद है।

प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई

चंद्राकर को रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने खोजकर हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसके विरुद्ध एकत्रित साक्ष्यों के साथ ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा। यह अनुरोध भारतीय एजेंसियों, इंटरपोल नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के सक्षम अधिकारियों के बीच घनिष्ठ समन्वय से आगे बढ़ाया गया। प्रत्यर्पण स्वीकृत होने के बाद सीबीआई की एक विशेष टीम मस्कट पहुँची और उसे भारत वापस लेकर आई। सीबीआई ने इस सहयोग के लिए ओमान की सरकार और रॉयल ओमान पुलिस के प्रति आभार जताया है।

मुख्य मामले और आरोप

चंद्राकर सीबीआई के दो अलग-अलग मामलों में वांछित है, जिनमें पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय के एक मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी एवं जालसाजी संबंधी धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत ये चार्जशीट दाखिल की थीं। ट्रांजिट रिमांड की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद चंद्राकर का चिकित्सा परीक्षण कराया जाएगा।

महादेव सिंडिकेट का संचालन और दायरा

जाँच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्कों में से एक था, जो भारत के बाहर से संचालित किया जाता था। यह क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम सहित अन्य खेल आयोजनों पर सट्टेबाजी की सुविधा देशभर में फैले फ्रेंचाइज्ड पैनल और ब्रांच नेटवर्क के माध्यम से देता था। इससे होने वाली अवैध कमाई को बड़ी संख्या में फर्जी बैंक खातों से गुजारा जाता था, कई लेनदेन के जरिए 'लेयरिंग' की जाती थी, और अंततः हवाला चैनलों के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।

गौरतलब है कि जाँच में यह भी पता चला कि सिंडिकेट को बिना बाधा के चलाने के लिए आय का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा राशि के रूप में दिया जाता था। प्रवर्तन निदेशालय ने भारत और विदेश में सिंडिकेट से जुड़ी कई संपत्तियाँ जब्त की हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका और जाँच की स्थिति

सीबीआई यह जाँच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर कर रही है, जिसने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़ी 13 एफआईआर एजेंसी को स्थानांतरित की थीं। इनमें से दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। यह मामला इस मायने में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीमापार ऑनलाइन जुए के खिलाफ भारतीय एजेंसियों की बड़ी कार्रवाइयों में से एक है।

आगे क्या होगा

चंद्राकर के रायपुर पहुँचने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत उसकी आगे की रिमांड पर फैसला करेगी। जाँचकर्ता उससे सिंडिकेट के विदेशी फंडिंग स्रोतों, हवाला नेटवर्क और कथित सरकारी-कर्मचारी संपर्कों के बारे में पूछताछ करेंगे। ईडी की समानांतर जाँच में मनी-लॉन्ड्रिंग के सभी पहलुओं की जड़ तक पहुँचने का प्रयास जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अदालत में साक्ष्य की मजबूती और सिंडिकेट के भीतर कथित सरकारी-कर्मचारी संपर्कों की जाँच में है। तीन वर्षों से अधिक समय तक चंद्राकर का विदेश में रहना यह सवाल भी उठाता है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया इतनी लंबी क्यों खिंची। ईडी की संपत्ति जब्ती और हवाला नेटवर्क की जाँच जहाँ तक पहुँचे, वहाँ तक पारदर्शिता जरूरी है — क्योंकि अतीत में ऐसे बड़े सट्टेबाजी सिंडिकेट के मामलों में मुख्य सूत्रधारों के विरुद्ध दोषसिद्धि दर निराशाजनक रही है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरभ चंद्राकर कौन है और महादेव ऐप से उसका क्या संबंध है?
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट का मुख्य प्रमोटर और किंगपिन बताया गया है। यह सिंडिकेट भारत के बाहर से संचालित होता था और देशभर में फ्रेंचाइज्ड नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल व कार्ड गेम पर अवैध सट्टेबाजी कराता था।
सौरभ चंद्राकर को ओमान से कैसे प्रत्यर्पित किया गया?
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को खोजकर हिरासत में लिया। सीबीआई और ईडी ने साक्ष्यों सहित औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव ओमान को भेजा, जिसे इंटरपोल नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के समन्वय से आगे बढ़ाया गया। प्रत्यर्पण स्वीकृत होने के बाद सीबीआई की विशेष टीम मस्कट गई और उसे भारत लाई।
चंद्राकर पर कौन-कौन से मामले दर्ज हैं?
चंद्राकर सीबीआई के दो अलग मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। आरोपों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम शामिल हैं।
महादेव सट्टेबाजी सिंडिकेट में पैसे की हेरफेर कैसे होती थी?
जाँच के अनुसार, सिंडिकेट की अवैध कमाई को बड़ी संख्या में फर्जी बैंक खातों से गुजारा जाता था और कई लेनदेन के जरिए 'लेयरिंग' की जाती थी। इसके बाद हवाला चैनलों के माध्यम से धन विदेश भेजा जाता था। कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों को भी सुरक्षा राशि दी जाती थी।
रायपुर कोर्ट में पेशी के बाद आगे क्या होगा?
4 नवंबर 2026 को या उससे पहले रायपुर की सीबीआई विशेष अदालत में पेश होने के बाद एजेंसी पूछताछ के लिए आगे की रिमांड माँगेगी। जाँचकर्ता उससे सिंडिकेट के विदेशी फंडिंग स्रोतों, हवाला नेटवर्क और सरकारी संपर्कों के बारे में पूछताछ करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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