बीएआई की 30-दिन की डेडलाइन चूक से बैडमिंटन फंडिंग कटी, साई ने एशियन गेम्स कनेक्शन नकारा
सारांश
मुख्य बातें
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने 3 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन जैसे स्टार बैडमिंटन खिलाड़ियों के यूरोपियन लेग की फंडिंग इसलिए नहीं रोकी गई क्योंकि जापान के एशियन गेम्स में भारतीय टीम मेडल नहीं जीत पाई थी — बल्कि इसकी असली वजह बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) द्वारा निर्धारित 30-दिन की डेडलाइन के भीतर प्रस्ताव न सौंपना है। साई के सूत्रों ने कहा कि यदि प्रस्ताव समय पर नहीं मिला, तो टूर्नामेंट को प्रोसेस करना संभव नहीं था।
फंडिंग रोकने का कारण क्या रहा
साई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'पहले, नियमों के मुताबिक फेडरेशन को बिना नामों के 90 दिन पहले और नामों के साथ 60 दिन पहले प्रस्ताव जमा करने होते थे। लेकिन फेडरेशन ने कहा कि वह इतनी जल्दी ऐसा नहीं कर सकता, इसलिए हमने डेडलाइन को बदलकर 30 दिन कर दिया। फिर भी, हमें प्रस्ताव नहीं मिला।' अधिकारी ने यह भी जोड़ा, 'ये नई गाइडलाइंस सभी पर लागू होती हैं। अगर हमारे पास टूर्नामेंट से 30 दिन पहले नामों के साथ प्रस्ताव नहीं है, तो हम उसे प्रोसेस नहीं करेंगे।' साई सूत्रों के मुताबिक, 'बीएआई ने पहले से तय समय में अपना प्रस्ताव जमा नहीं किया। फेडरेशन को भी जिम्मेदारी से काम करना शुरू करना होगा।'
यूरोपियन लेग पर असर
रिपोर्टों के अनुसार, साई ने भारतीय टीम के यूरोपियन लेग को फंड देने से मना कर दिया, जिसमें फिनलैंड, डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी में लगातार चार टूर्नामेंट शामिल थे। खिलाड़ियों को इस निर्णय की जानकारी 6 अक्टूबर को फिनलैंड के वांता में आर्कटिक ओपन शुरू होने से महज कुछ दिन पहले ही मिली। इतने कम समय में वैकल्पिक व्यवस्था कर पाना खिलाड़ियों के लिए अत्यंत कठिन रहा।
कोच के बिना उतरने पर मजबूर हुईं खिलाड़ियाँ
फंडिंग की कमी का सबसे कठिन असर उन खिलाड़ियों पर पड़ा जिनके पास यूरोपियन लेग में अपने कोच नहीं थे। अश्मिता चालिहा ने जब फ्रेंच ओपन में जापान की दिग्गज अकाने यामागुची को हराया, उस दौरान उनके साथ पेशेवर कोच नहीं बल्कि साथी भारतीय खिलाड़ी इशारानी बरुआ थीं। इसी तरह तन्वी शर्मा, जो डेनमार्क टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुँचीं, मैच के दौरान कोच-विहीन रहीं।
सिंधु और लक्ष्य का ऐतिहासिक प्रदर्शन
फंडिंग विवाद के बीच पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने रविवार को जर्मनी के सारलैंडहाले में संपन्न बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 500 इवेंट हाइलो ओपन 2026 में क्रमशः महिला एकल और पुरुष एकल का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। यह चार वर्षों में पहला मौका है जब दो भारतीयों ने एक ही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर इवेंट में सुपर 500 या उससे ऊपर के स्तर के दो खिताब एक साथ जीते हों। गौरतलब है कि यह उपलब्धि तब हासिल की गई जब खिलाड़ी सरकारी फंडिंग की अनिश्चितता से जूझ रहे थे।
आगे क्या होगा
साई के रुख से स्पष्ट है कि आगे भी प्रस्ताव-डेडलाइन के नियम सख्ती से लागू किए जाएंगे। बीएआई को अब अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया दुरुस्त करनी होगी ताकि खिलाड़ी भविष्य में इस तरह की असुविधाजनक स्थितियों में न फँसें। यह विवाद भारतीय खेल फेडरेशनों और साई के बीच प्रशासनिक समन्वय की कमी को एक बार फिर उजागर करता है।