उस्ताद अमजद अली खान ने धर्मशाला में दलाई लामा को सौंपा ग्रैमी पुरस्कार, बोले– 'गर्व और सौभाग्य की बात'
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को मिला प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार मंगलवार को औपचारिक रूप से धर्मशाला स्थित उनके आवास पर सौंपा गया। यह सम्मान प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने उन्हें भेंट किया, जिसके साथ उनके पुत्र अमान अली बंगश और अयान अली बंगश भी मौजूद रहे।
किस श्रेणी में मिला सम्मान
दलाई लामा को यह पुरस्कार ‘बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग’ श्रेणी में उनकी ऑडियोबुक ‘मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज़ होलीनेस द दलाई लामा’ के लिए मिला है। यह कृति दलाई लामा के शांति, करुणा और मानव एकता से जुड़े विचारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ पिरोती है।
आयोजकों के अनुसार इस सहयोग ने यह रेखांकित किया कि संगीत और आध्यात्मिक ज्ञान मिलकर वैश्विक दर्शकों तक सकारात्मक संदेश पहुँचाने में कितने प्रभावी हो सकते हैं।
उस्ताद अमजद अली खान की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान उस्ताद अमजद अली खान ने कहा कि दलाई लामा को यह सम्मान सौंपना उनके लिए ‘गर्व और सौभाग्य की बात’ है। उन्होंने जोड़ा कि दलाई लामा का जीवन और उनके विचार पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
दलाई लामा का संदेश
फरवरी में पुरस्कार की घोषणा के समय दलाई लामा ने कहा था कि वह इस सम्मान को ‘विनम्रता और कृतज्ञता’ के साथ स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार यह पुरस्कार किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि ‘मानवता के प्रति साझा ज़िम्मेदारी’ की पहचान है।
उन्होंने कहा कि शांति, करुणा, पर्यावरण की रक्षा और मानव एकता जैसे मूल्य दुनिया के आठ अरब लोगों के कल्याण के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मान के ज़रिये उनका संदेश और अधिक लोगों तक पहुँचेगा।
तिब्बती नेतृत्व ने जताई खुशी
तिब्बती संसद के स्पीकर खेनपो सोनम तेनफेल ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान ‘ज्ञान और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की कला की वैश्विक पहचान’ है। तिब्बती राजनीतिक नेता सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने भी शुभकामनाएँ देते हुए इसे ‘पूरे तिब्बती समुदाय के लिए गर्व का विषय’ बताया।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि दलाई लामा दशकों से विश्व मंच पर शांति, करुणा और मानव एकता का संदेश देते रहे हैं। उनकी नवीनतम पुस्तक में तिब्बत, चीन और निर्वासन के जीवन से जुड़े अनुभवों का विस्तृत उल्लेख है। यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब उनके वैश्विक प्रभाव और उत्तराधिकार से जुड़ी चर्चाएँ अंतरराष्ट्रीय पटल पर तेज़ हो रही हैं।