यूपी कांग्रेस नेतृत्व बदलाव पर दानिश आजाद अंसारी: 'मुखौटा बदलने से चरित्र नहीं बदलता'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने 3 अक्टूबर को लखनऊ में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद अंसारी ने कहा कि केवल नेतृत्व का चेहरा बदल देने से किसी पार्टी का मूल चरित्र नहीं बदलता।
कांग्रेस के नेतृत्व बदलाव पर BJP का पलटवार
मंत्री अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का असली चरित्र पूरा उत्तर प्रदेश भली-भाँति जानता है। उनके अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने दशकों तक प्रदेश की जनता के साथ 'फरेब' किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है, जो विपक्ष को रास नहीं आ रहा।
अंसारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार झूठ और भ्रम का जाल बुनती रही है, लेकिन प्रदेश की जनता उसके कथित नकारात्मक एजेंडे में नहीं आएगी।
आकाश आनंद-मायावती विवाद पर प्रतिक्रिया
आकाश आनंद द्वारा मायावती से माफी माँगने के सवाल पर अंसारी ने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि उत्तर प्रदेश अब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की प्राथमिकताएँ चाहे जो हों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार सर्वहित की भावना के साथ कार्य कर रही है।
सपा-कांग्रेस के कथित 50-50 सीट बंटवारे पर निशाना
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच कथित 50-50 सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर मंत्री ने कहा कि चुनाव नज़दीक आते ही ये दल मुस्लिम समाज को गुमराह करने की नीयत से राजनीति करेंगे। उनका दावा था कि उत्तर प्रदेश की जनता चुनाव में इन दलों को उचित जवाब देगी।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर अटकलें तेज़ हैं और उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तंज
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आगामी अयोध्या दौरे को लेकर अंसारी ने कहा कि चुनावी मौसम में सपा अब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को प्रदेश की उन्नति और समृद्धि से कोई सरोकार नहीं है, और पार्टी के सभी एजेंडे विफल हो चुके हैं।
गौरतलब है कि अयोध्या राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, और वहाँ किसी भी बड़े नेता का दौरा चुनावी संदेश के रूप में देखा जाता है।
आगे क्या
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख दलों की गतिविधियाँ तेज़ होती दिख रही हैं। नए नेतृत्व के साथ कांग्रेस की रणनीति और सपा-कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन का स्वरूप आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगा।