15 जुलाई 2026
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दंतेवाड़ा के बड़ेपल्ली में स्वास्थ्य क्रांति: डॉक्टरों ने 13 किमी पैदल चलकर 227 ग्रामीणों की जांच की

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दंतेवाड़ा के बड़ेपल्ली में स्वास्थ्य क्रांति: डॉक्टरों ने 13 किमी पैदल चलकर 227 ग्रामीणों की जांच की

सारांश

13 किलोमीटर का जंगली रास्ता, पथरीली पहाड़ियां — और दूसरी तरफ 227 ग्रामीण जिन्हें पहली बार दरवाज़े पर मिली स्वास्थ्य सेवा। दंतेवाड़ा के बड़ेपल्ली में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की यह पहुंच बता रही है कि बस्तर की पहचान बदल रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य टीम ने 13 किलोमीटर पैदल चलकर दंतेवाड़ा के बड़ेपल्ली गांव में शिविर लगाया।
शिविर में 227 ग्रामीणों की मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच की गई।
एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया; 12 मरीज उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजे गए।
ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना , पोषण और सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूक किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार दूरस्थ बस्तर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दंतेवाड़ा जिले के दुर्गम जंगलों में बसे गांव बड़ेपल्ली तक 30 मई 2026 को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम 13 किलोमीटर का पहाड़ी और पथरीला रास्ता पैदल तय कर पहुंची और वहां स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर 227 ग्रामीणों का परीक्षण किया। यह गांव कभी नक्सल प्रभाव और भौगोलिक दुर्गमता के कारण सरकारी सेवाओं की पहुंच से बाहर माना जाता था।

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की पहल

यह शिविर मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को उनके दरवाज़े पर ही चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं। यह ऐसे समय में आया है जब बस्तर संभाग के दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

शिविर में क्या-क्या हुआ

शिविर में 227 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। परीक्षण में मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शामिल थी। जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही उपचार और निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।

महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया। जांच के दौरान एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के इलाज हेतु उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।

सरकार की प्रतिक्रिया

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार दूरस्थ बस्तर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' से ग्रामीणों को अपने गांव के निकट ही उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।

जागरूकता और योजनाओं का प्रसार

स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना, पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित मातृत्व के प्रति भी जागरूक किया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है — इसका लक्ष्य दूरस्थ अंचलों के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति दीर्घकालिक जागरूकता बढ़ाना भी है।

आम जनता पर असर

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले इन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगभग असंभव मानी जाती थी, लेकिन नियमित शिविरों और प्रशासनिक सक्रियता से अब लोगों का भरोसा बढ़ा है। गौरतलब है कि बस्तर के जिन इलाकों को कभी भय और पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाता था, वहां अब जनसेवा की नई तस्वीर उभर रही है। आने वाले महीनों में ऐसे और शिविरों के आयोजन की योजना बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये शिविर एकबारगी घटनाएं हैं या एक टिकाऊ व्यवस्था की शुरुआत। बस्तर के दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां सड़क, बिजली और संचार की बुनियादी कमी अभी भी बनी हुई है — स्वास्थ्य शिविर उस खाई को पाट नहीं सकते जब तक स्थायी उप-स्वास्थ्य केंद्र और प्रशिक्षित स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी तैनात न हों। 227 मरीजों में से 13 को रेफर करना यह भी दर्शाता है कि गांव में ही उपचार की क्षमता अभी सीमित है। अभियान की सफलता तब मानी जाएगी जब ये आंकड़े नियमित निगरानी डेटा में बदलें, न कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों में।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान क्या है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक स्वास्थ्य पहल है जिसका उद्देश्य बस्तर संभाग के दूरदराज़ और दुर्गम गांवों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। इसके तहत स्वास्थ्य टीमें नियमित शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की जांच, उपचार और जागरूकता कार्यक्रम चलाती हैं।
बड़ेपल्ली गांव में स्वास्थ्य शिविर में क्या हुआ?
30 मई 2026 को स्वास्थ्य टीम ने 13 किलोमीटर पैदल चलकर बड़ेपल्ली पहुंचकर 227 ग्रामीणों की मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच की। एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया और 12 अन्य मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
दंतेवाड़ा के दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना इतना कठिन क्यों है?
दंतेवाड़ा और बस्तर के कई गांव घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में बसे हैं जहां सड़क संपर्क नहीं है। इन क्षेत्रों में पहले नक्सल प्रभाव के कारण भी सरकारी टीमों की पहुंच सीमित रही है, जिससे ये गांव दशकों तक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहे।
शिविर में ग्रामीणों को कौन-सी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई?
स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया। इसके साथ ही पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित मातृत्व से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभियान पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार दूरस्थ बस्तर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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