दंतेवाड़ा के बड़ेपल्ली में स्वास्थ्य क्रांति: डॉक्टरों ने 13 किमी पैदल चलकर 227 ग्रामीणों की जांच की
सारांश
मुख्य बातें
दंतेवाड़ा जिले के दुर्गम जंगलों में बसे गांव बड़ेपल्ली तक 30 मई 2026 को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम 13 किलोमीटर का पहाड़ी और पथरीला रास्ता पैदल तय कर पहुंची और वहां स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर 227 ग्रामीणों का परीक्षण किया। यह गांव कभी नक्सल प्रभाव और भौगोलिक दुर्गमता के कारण सरकारी सेवाओं की पहुंच से बाहर माना जाता था।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की पहल
यह शिविर मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को उनके दरवाज़े पर ही चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं। यह ऐसे समय में आया है जब बस्तर संभाग के दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
शिविर में क्या-क्या हुआ
शिविर में 227 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। परीक्षण में मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शामिल थी। जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही उपचार और निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया। जांच के दौरान एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के इलाज हेतु उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
सरकार की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार दूरस्थ बस्तर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' से ग्रामीणों को अपने गांव के निकट ही उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
जागरूकता और योजनाओं का प्रसार
स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना, पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित मातृत्व के प्रति भी जागरूक किया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है — इसका लक्ष्य दूरस्थ अंचलों के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति दीर्घकालिक जागरूकता बढ़ाना भी है।
आम जनता पर असर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले इन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगभग असंभव मानी जाती थी, लेकिन नियमित शिविरों और प्रशासनिक सक्रियता से अब लोगों का भरोसा बढ़ा है। गौरतलब है कि बस्तर के जिन इलाकों को कभी भय और पिछड़ेपन का प्रतीक माना जाता था, वहां अब जनसेवा की नई तस्वीर उभर रही है। आने वाले महीनों में ऐसे और शिविरों के आयोजन की योजना बताई जा रही है।