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दत्तपुकुर में साढ़े तीन वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न, 40 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

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दत्तपुकुर में साढ़े तीन वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न, 40 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

सारांश

पश्चिम बंगाल के दत्तपुकुर में साढ़े तीन वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोप में 40 वर्षीय अर्जुन सरदार को POCSO के तहत गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूला। अस्पताल में महिला डॉक्टर की अनुपलब्धता से जाँच में देरी पर भी विरोध हुआ।

मुख्य बातें

अर्जुन सरदार (40 वर्ष) को दत्तपुकुर, उत्तर 24 परगना में साढ़े तीन वर्षीय बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोप में शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया।
आरोपी पर POCSO अधिनियम, 2012 के तहत मामला दर्ज; पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने जुर्म स्वीकार किया।
घटना गुरुवार को हुई, पता शुक्रवार को चला; स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नीलगंज चौकी ने शुरुआत में शिकायत दर्ज करने से इनकार किया।
पीड़िता को बारासात मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ महिला डॉक्टर की कमी के कारण जाँच में कई घंटों की देरी हुई।
आरोपी को शनिवार को बारासात अदालत में पेश किया गया; पुलिस ने हिरासत की माँग की।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के दत्तपुकुर में एक साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में 40 वर्षीय अर्जुन सरदार को शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया है और उसे शनिवार को बारासात अदालत में पेश किया गया।

घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, अर्जुन सरदार दत्तपुकुर में एक रिश्तेदार के घर गया था। आरोप है कि उसने बच्ची को पास के एक घर की छत पर ले जाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। यह घटना गुरुवार को हुई, जबकि इसका पता शुक्रवार को चला, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया।

पीड़िता का परिवार पिछले तीन महीनों से नीलगंज चौकी के अंतर्गत आने वाले सुभाषनगर में किराए के मकान में रह रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब वे नीलगंज चौकी में शिकायत दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने शुरुआत में शिकायत लेने से इनकार कर दिया।

कानूनी कार्रवाई

बाद में आरोपी के खिलाफ बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 के तहत मामला दर्ज किया गया और जाँच शुरू की गई। शुक्रवार रात गिरफ्तारी के बाद शनिवार को अर्जुन सरदार को बारासात अदालत में पेश किया गया, जहाँ पुलिस ने आगे की जाँच के लिए उसकी हिरासत का अनुरोध किया।

अस्पताल में देरी पर विरोध

पीड़िता को शारीरिक जाँच के लिए बारासात मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। परिवार और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उस समय अस्पताल में केवल एक महिला डॉक्टर उपलब्ध थीं, और वे भी व्यस्त थीं, जिसके कारण बच्ची की चिकित्सा जाँच में कई घंटों की देरी हुई। इस देरी के विरोध में अस्पताल के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गए, हालाँकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

परिजनों की माँग

पीड़िता के परिवार ने आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की माँग की है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में बाल यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर पहले से सामाजिक चिंता और जन दबाव बना हुआ है। POCSO के तहत दर्ज मामले में अदालत का अगला आदेश इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर अस्पताल में महिला डॉक्टर की अनुपलब्धता के कारण पीड़िता की जाँच में घंटों की देरी। ये दोनों चूकें व्यवस्थागत हैं, और पश्चिम बंगाल में POCSO मामलों की संवेदनशील हैंडलिंग पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। बच्ची के परिजनों को न्याय के लिए विरोध प्रदर्शन तक करना पड़ा — यह दर्शाता है कि पीड़ित-केंद्रित प्रोटोकॉल केवल कागज़ों तक सीमित है। जब तक पुलिस और अस्पताल दोनों स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ऐसे मामलों में त्वरित न्याय की उम्मीद बेमानी रहेगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दत्तपुकुर में बच्ची से यौन उत्पीड़न का मामला क्या है?
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के दत्तपुकुर में एक साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। आरोपी अर्जुन सरदार (40 वर्ष) को POCSO अधिनियम, 2012 के तहत शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया और पुलिस के अनुसार उसने पूछताछ में जुर्म कबूल किया।
आरोपी अर्जुन सरदार को कब और कहाँ पेश किया गया?
गिरफ्तारी के बाद शनिवार को अर्जुन सरदार को बारासात अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने आगे की जाँच के लिए उसकी हिरासत की माँग की।
बारासात अस्पताल में विरोध प्रदर्शन क्यों हुआ?
पीड़िता को शारीरिक जाँच के लिए बारासात मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उस समय केवल एक महिला डॉक्टर उपलब्ध थीं और वे व्यस्त थीं। परिवार और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस कारण जाँच में कई घंटे की देरी हुई, जिसके चलते अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ।
क्या पुलिस ने शुरुआत में शिकायत दर्ज करने से इनकार किया था?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब वे नीलगंज चौकी में शिकायत दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने पहले शिकायत लेने से मना कर दिया। बाद में POCSO के तहत मामला दर्ज किया गया और शुक्रवार रात गिरफ्तारी हुई।
इस मामले में POCSO क्या है और यह क्यों लागू होता है?
POCSO यानी बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम, 2012, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों में लागू होता है। इस मामले में पीड़िता साढ़े तीन वर्षीय बच्ची है, इसलिए आरोपी पर यही कानून लागू किया गया है, जिसमें कठोर दंड का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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