ओखला-तुगलकाबाद में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के लिए MCD-OIL इंडिया का MOU, CM रेखा गुप्ता रहीं मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में 30 जुलाई 2026 को दिल्ली सचिवालय में दिल्ली नगर निगम (MCD) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह MOU तुगलकाबाद और ओखला में 800 टन प्रतिदिन (TDP) क्षमता वाले कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने के लिए है। यह पहल दिल्ली की लैंडफिल साइट्स पर बढ़ते कचरे के संकट से निपटने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
MOU में क्या है
इस समझौते के तहत ओखला और तुगलकाबाद की लैंडफिल साइट्स पर जमा ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस तैयार की जाएगी। दोनों प्लांट मिलकर प्रतिदिन 800 टन कचरे का प्रसंस्करण करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'इन प्लांट में अलग किए गए ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस बनाई जाएगी। इससे कचरे के पहाड़ कम होंगे, साफ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और 'साफ दिल्ली' के लिए हमारा संकल्प और मजबूत होगा।' इस अवसर पर MCD मेयर प्रवेश वाही और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
दिल्ली-एनसीआर में लैंडफिल रीमेडिएशन की स्थिति
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में बताया कि दिल्ली-एनसीआर में चिह्नित सात पुराने कचरा डंपसाइट्स में से चार पर रीमेडिएशन का काम पूरा हो चुका है। इनमें से तीन दिल्ली में, और एक-एक गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी के कचरे के पहाड़ वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं।
नियामक और नीतिगत पृष्ठभूमि
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 27 जनवरी 2021 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत एक निर्देश जारी किया था, जिसमें सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को पुराने डंपसाइट्स की बायो माइनिंग और बायो-रीमेडिएशन के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 3 जून 2025 को NCR की एजेंसियों को लैंडफिल और डंपसाइट्स पर पुराने कचरे के प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।
CAQM के अनुसार, खुले में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (MSW) या बायोमास जलाने से निकलने वाले PM10, PM2.5 और हानिकारक गैसें जैसे NO2, SO2, CO, डाइऑक्सिन तथा फुरान वायु प्रदूषण को गंभीर रूप से बढ़ाती हैं।
नए ठोस अपशिष्ट नियम लागू
केंद्र सरकार ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 की जगह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 लागू किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं। नए नियमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन और सैनिटरी लैंडफिल के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह MOU दिल्ली में बढ़ते कचरे के संकट और वायु प्रदूषण की दोहरी चुनौती से निपटने की एक समन्वित कोशिश है। CBG प्लांट के चालू होने से न केवल लैंडफिल पर बोझ कम होगा, बल्कि स्वच्छ ईंधन का उत्पादन भी होगा। अब नज़रें इस बात पर हैं कि प्लांट निर्माण की समयसीमा और क्रियान्वयन किस गति से आगे बढ़ता है।