30 जुलाई 2026
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ओखला-तुगलकाबाद में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के लिए MCD-OIL इंडिया का MOU, CM रेखा गुप्ता रहीं मौजूद

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ओखला-तुगलकाबाद में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के लिए MCD-OIL इंडिया का MOU, CM रेखा गुप्ता रहीं मौजूद

सारांश

दिल्ली के दो प्रमुख लैंडफिल — ओखला और तुगलकाबाद — पर 800 TDP क्षमता के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने के लिए MCD और OIL इंडिया के बीच MOU हुआ। CM रेखा गुप्ता की अगुवाई में हुई यह पहल कचरे के पहाड़ों को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

30 जुलाई 2026 को दिल्ली सचिवालय में MCD और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच MOU पर हस्ताक्षर हुए।
ओखला और तुगलकाबाद में 800 TDP क्षमता वाले कम्प्रेस्ड बायो-गैस प्लांट लगाए जाएंगे।
दिल्ली-एनसीआर के 7 पुराने डंपसाइट्स में से 4 पर रीमेडिएशन पूरी हो चुकी है।
CPCB ने 27 जनवरी 2021 और CAQM ने 3 जून 2025 को बायो-रीमेडिएशन के निर्देश जारी किए थे।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 — 1 अप्रैल 2026 से लागू — में लैंडफिल प्रबंधन के नए प्रावधान शामिल हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में 30 जुलाई 2026 को दिल्ली सचिवालय में दिल्ली नगर निगम (MCD) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह MOU तुगलकाबाद और ओखला में 800 टन प्रतिदिन (TDP) क्षमता वाले कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने के लिए है। यह पहल दिल्ली की लैंडफिल साइट्स पर बढ़ते कचरे के संकट से निपटने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

MOU में क्या है

इस समझौते के तहत ओखला और तुगलकाबाद की लैंडफिल साइट्स पर जमा ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस तैयार की जाएगी। दोनों प्लांट मिलकर प्रतिदिन 800 टन कचरे का प्रसंस्करण करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'इन प्लांट में अलग किए गए ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस बनाई जाएगी। इससे कचरे के पहाड़ कम होंगे, साफ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और 'साफ दिल्ली' के लिए हमारा संकल्प और मजबूत होगा।' इस अवसर पर MCD मेयर प्रवेश वाही और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

दिल्ली-एनसीआर में लैंडफिल रीमेडिएशन की स्थिति

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में बताया कि दिल्ली-एनसीआर में चिह्नित सात पुराने कचरा डंपसाइट्स में से चार पर रीमेडिएशन का काम पूरा हो चुका है। इनमें से तीन दिल्ली में, और एक-एक गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी के कचरे के पहाड़ वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं।

नियामक और नीतिगत पृष्ठभूमि

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 27 जनवरी 2021 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत एक निर्देश जारी किया था, जिसमें सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को पुराने डंपसाइट्स की बायो माइनिंग और बायो-रीमेडिएशन के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 3 जून 2025 को NCR की एजेंसियों को लैंडफिल और डंपसाइट्स पर पुराने कचरे के प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।

CAQM के अनुसार, खुले में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (MSW) या बायोमास जलाने से निकलने वाले PM10, PM2.5 और हानिकारक गैसें जैसे NO2, SO2, CO, डाइऑक्सिन तथा फुरान वायु प्रदूषण को गंभीर रूप से बढ़ाती हैं।

नए ठोस अपशिष्ट नियम लागू

केंद्र सरकार ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2016 की जगह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 लागू किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गए हैं। नए नियमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन और सैनिटरी लैंडफिल के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह MOU दिल्ली में बढ़ते कचरे के संकट और वायु प्रदूषण की दोहरी चुनौती से निपटने की एक समन्वित कोशिश है। CBG प्लांट के चालू होने से न केवल लैंडफिल पर बोझ कम होगा, बल्कि स्वच्छ ईंधन का उत्पादन भी होगा। अब नज़रें इस बात पर हैं कि प्लांट निर्माण की समयसीमा और क्रियान्वयन किस गति से आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दिल्ली की लैंडफिल समस्या दशकों पुरानी है और कई ऐसे समझौते पहले भी हो चुके हैं जिनका क्रियान्वयन अधूरा रहा। असली परीक्षा यह है कि 800 TDP क्षमता के ये प्लांट कब तक चालू होते हैं और क्या इनसे वास्तव में लैंडफिल का बोझ मापनीय रूप से घटता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि CPCB का निर्देश 2021 में आया था — पाँच साल बाद भी सात में से केवल चार साइट्स पर रीमेडिएशन पूरी हो पाई है। बिना सख्त समयसीमा और पारदर्शी निगरानी तंत्र के, यह MOU भी उन घोषणाओं की कतार में खड़ा हो सकता है जो सुर्खियों में तो आईं, लेकिन ज़मीन पर बदलाव नहीं ला सकीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओखला और तुगलकाबाद में लगने वाले बायोगैस प्लांट क्या हैं?
ये कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट हैं जो लैंडफिल साइट्स पर अलग किए गए ऑर्गेनिक कचरे से बायो-गैस बनाएंगे। दोनों प्लांट मिलकर प्रतिदिन 800 टन कचरे का प्रसंस्करण करने में सक्षम होंगे।
MCD और OIL इंडिया के बीच MOU पर कब और कहाँ हस्ताक्षर हुए?
यह MOU 30 जुलाई 2026 को दिल्ली सचिवालय में हस्ताक्षरित हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और MCD मेयर प्रवेश वाही सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
दिल्ली-एनसीआर में लैंडफिल रीमेडिएशन की मौजूदा स्थिति क्या है?
पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में चिह्नित सात पुराने कचरा डंपसाइट्स में से चार पर रीमेडिएशन पूरी हो चुकी है। इनमें तीन दिल्ली में और एक-एक गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद में हैं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 क्या हैं और ये कब से लागू हैं?
केंद्र सरकार ने 2016 के पुराने नियमों की जगह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 लागू किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं। इनमें म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन और सैनिटरी लैंडफिल के लिए विस्तृत प्रावधान शामिल हैं।
इन बायोगैस प्लांट से दिल्ली को क्या फायदा होगा?
इन प्लांट से लैंडफिल पर जमा कचरे के पहाड़ कम होंगे और स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही खुले में कचरा जलाने से होने वाले PM10, PM2.5 और अन्य हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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